राष्ट्रवाणी: क्या है ब्रिटेन का बी-रेडी कैंपने?
- ब्रिटेन ने 22 अक्टूबर को ‘बी-रेडी’ कैंपेन शुरू किया है और लोगों से अपील की है कि वो कम से कम 72 घंटों तक की किसी भी आपदा के लिए तैयार रहें।
- अमेरिका के रक्षा विभाग पेंटागन ने भी ऐसी ही तैयारी अपनी सेना के लिए की है।
- दरअसल अमेरिका, ब्रिटेन और जापान का एक सुर में एक ही बात कहना चिंता तो बढ़ाता है।
ब्रिटेन ने 22 अक्टूबर को ‘बी-रेडी’ कैंपेन शुरू किया है और लोगों से अपील की है कि वो कम से कम 72 घंटों तक की किसी भी आपदा के लिए तैयार रहें. क्योंकि इतना समय रेस्क्यू टीम को पहुंचने के लिए चाहिए. सरकार ने लोगों से 9 लीटर पानी, कंबल, बाथरूम का सामान, फर्स्ट एड, कैश जैसी चीजें रखने को कहा है. साथ ही लोगों से अपने घर में आईडी प्रूव की कॉपी रखने की अपील भी की गई है. हालांकि जापान की तरह ब्रिटेन ने इन तैयारियों को सिर्फ आपदा की तैयारी नहीं माना है. डिफेंस सेक्रेटरी वेस स्ट्रीटिंग ने कहा है कि दुश्मन के हमले हमारे रोजमर्रा के इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा सकते हैं. यह खतरे अब दूर की बात नहीं, बल्कि असली खतरे हैं. यह कोई पहली पहल नहीं है, इससे पहले यूरोप के कुछ देश भी लोगों से ऐसे हालातों के लिए तैयार रहने की अपील कर चुके हैं. इसी साल अगस्त के महीने में आयरलैंड ने भी लोगों से ऐसी ही अपील की थी. उन्होंने ‘बी इमरजेंसी रेडी’ कैंपेन चलाया और लोगों को राशन और जरूरी सामान रखने की सलाह दी. अमेरिका ने भी सेना को किया तैयार
अमेरिका के रक्षा विभाग पेंटागन ने भी ऐसी ही तैयारी अपनी सेना के लिए की है. पर ये तैयारी दिनों की नहीं बल्कि महीनों की है. इसके तहत अमेरिकी सेना के हर बड़े ठिकाने को कम से कम 90 दिनों तक जरूरी कामकाज अपने दम पर चलाने में सक्षम बनाने की तैयारी हो रही है. फॉक्स न्यूज डिजिटल की रिपोर्ट के मुताबिक, इस पहल का नाम FORTRESS (Federal Operations for Resilience, Troop Resources, Energy, Supply, and Survivability) रखा गया है. इस प्रपोजल में सैन्य ठिकानों को सिर्फ बिजली के मामले में ही आत्मनिर्भर नहीं बनना होगा, बल्कि पानी, ईंधन, संचार और दूसरी जरूरी सुविधाओं का भी इंतजाम करना होगा. यानी किसी लंबे आपातकाल के दौरान भी सैन्य ठिकानों का कामकाज जारी रह सके. सिर्फ युद्ध ही नहीं है खतरा, साइबर सिक्योरिटी भी चिंता
दरअसल अमेरिका, ब्रिटेन और जापान का एक सुर में एक ही बात कहना चिंता तो बढ़ाता है. अमेरिका में मिडटर्म चुनाव 3 नवंबर को हो जाएंगे. ट्रम्प कई बार ये संकेत भी दे चुके हैं कि इलेक्शन के बाद ईरान पर बड़े पैमाने पर हमले होंगे. वहीं अमेरिकी अखबार ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ के मुताबिक, अमेरिका ने डिप्लोमैटिक और मिलिट्री चैनलों के जरिए खाड़ी देशों से कहा है कि वे ईरान के खिलाफ छोटे, लेकिन तेज मिलिट्री कैंपेन के लिए तैयार रहें. वहीं रूस, ब्रिटेन पर हमले कर सकता है. जापान को चीन के ताइवान पर हमले के लिए तैयार रहना है. जापान के डिफेंस मिनिस्टर शिन्जिरो कोइजुमी पहले ही कह चुके हैं कि जापान के आसपास का माहौल दूसरे विश्व युद्ध के बाद सबसे गंभीर है. पर ये तैयार सिर्फ युद्ध के खतरे की नहीं है. बल्कि साइबर हमले और सिक्योरिटी बड़ा खतरा है. ये वो खतरा है जो धीरे-धीरे बहुत बड़ा होता जा रहा है. चीन और अमेरिका की तकनीक को लेकर मची होड़ पूरी दुनिया को पता है. इसी बीच चीन पानी में ड्रोन चलाने के परीक्षण कर रहा है. रूस समेत ये देश एआई की मदद से ड्रोन, मिसाइल और इसी तकनीक पर आधारित डिफेंस सिस्टम बनाने में लगे हैं. चीन तो पानी के भीतर सबमरीन में एआई पावर्ड सिस्टम लगाने की टेस्टिंग भी कर चुका है. वर्ल्ड ऑर्डर बदल रहा है और हम चीन-रूस अमेरिका की बादशाहत नहीं मानना चाहते. तो क्या दुनिया में ताकत की बदलती ये तस्वीर युद्ध के रंग से रंगने वाली है… इसका जवाब भविष्य की गर्त में ही छिपा है. QR स्कैन करें, डाउनलोड करें News18 ऐप या वेबसाइट पर जारी रखने के लिए यहां क्लिक करें
