राष्ट्रवाणी: पार्टी के युवा कार्यकर्ताओं ने भी इस स्थिति पर चिंता जताई है. बताया जा रहा है कि उन्होंने वरिष्ठ नेताओं से संपर्क कर अपनी बात रखी और पूछा कि कांग्रेस सांसद के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला कैसे किया जाए. इससे बीजेपी के भीतर इस मुद्दे को लेकर रणनीतिक चिंता का अंदाजा लगाया जा सकता है. सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने युवा कार्यकर्ताओं को सलाह दी है कि वे कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व के राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) को लेकर विरोध को मुद्दा बनाएं. उनका मानना है कि इससे मणिपुर में एनआरसी की जोरदार वकालत करने वाले अकोइजम के रुख और कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व की सोच के बीच अंतर दिखाया जा सकता है. हालांकि, बीजेपी के सभी नेता यह नहीं मानते कि अकोइजम की बढ़ती लोकप्रियता भविष्य में पार्टी के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती बन सकती है. कुछ नेताओं का कहना है कि मणिपुर कांग्रेस के भीतर गुटबाजी उनके राजनीतिक रास्ते में बाधा बन सकती है. खास तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह के नेतृत्व वाले कांग्रेस के पुराने नेताओं का प्रभाव अकोइजम के लिए चुनौती बन सकता है. कांग्रेस के कुछ सूत्र भी मानते हैं कि सांसद को बाहरी विरोध से ज्यादा अपनी ही पार्टी के भीतर राजनीतिक मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. अकोइजम को जेएनयू ने 9 अक्टूबर को बर्खास्त किया था. विश्वविद्यालय ने यह कार्रवाई 11 छात्राओं की ओर से दर्ज कराई गई यौन उत्पीड़न की शिकायतों की जांच के बाद की थी. हालांकि, अकोइजम ने इन आरोपों से इनकार किया है. उन्होंने विश्वविद्यालय की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए और कार्रवाई को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है. इस मामले के सामने आने के बाद बीजेपी ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया. 10 अक्टूबर को बीजेपी महिला मोर्चा ने इंफाल में कांग्रेस भवन की ओर विरोध मार्च निकाला और अकोइजम से संसद की सदस्यता छोड़ने की मांग की. मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह ने भी उनके इस्तीफे की मांग की. वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से अकोइजम को दिए जा रहे समर्थन पर सवाल उठाए. बीजेपी का विरोध केवल मणिपुर तक सीमित नहीं रहा. 13 अक्टूबर को प्रदेश अध्यक्ष शारदा देवी सहित बीजेपी की महिला सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की और मामले में हस्तक्षेप की मांग की. पार्टी की महिला शाखा ने दिल्ली समेत कई जगहों पर प्रदर्शन किए. बीजेपी की युवा शाखा ने भी 16 अक्टूबर को इंफाल में मार्च निकाला. एक तरफ बीजेपी नेता अकोइजम के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे, तो दूसरी तरफ उनके समर्थन में भी लोग सड़कों पर उतर आए. 14 अक्टूबर को इंफाल में आयोजित एक रैली में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए. इनमें ज्यादातर युवा थे. प्रदर्शनकारियों ने बीजेपी पर कांग्रेस सांसद को राजनीतिक रूप से निशाना बनाने का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि और पार्टी के प्रदेश मुख्यालय की ओर मार्च किया. इस बीच बीजेपी विधायक टोंगब्रम रॉबिंद्रो सिंह ने पार्टी के दूसरे नेताओं से अलग रुख अपनाया. उन्होंने अकोइजम के प्रति भरोसा और सम्मान जताया. साथ ही संसद में मणिपुर के मुद्दों को उठाने के उनके प्रयासों की तारीफ की. हालांकि, उन्होंने सांसद से विवाद के आरोपों को लेकर कानूनी रास्ता अपनाने और खुद को पाक-साफ साबित करने की अपील भी की. वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ओकराम इबोबी सिंह ने भी आरोपों के समय पर सवाल उठाए. हालांकि, उन्होंने कहा कि मामले में कानून को अपना काम करने देना चाहिए. मणिपुर की राजनीति में अकोइजम को लेकर बढ़ती चर्चा ने बीजेपी के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है. पार्टी के कुछ नेताओं को लग रहा है कि सार्वजनिक विरोध के कारण कांग्रेस सांसद को युवाओं के बीच सहानुभूति और समर्थन मिला है. हालांकि, यह लोकप्रियता आगे चलकर कितनी बड़ी राजनीतिक ताकत बनती है, यह अभी साफ नहीं है. दूसरी ओर, कांग्रेस के भीतर गुटबाजी और पुराने नेताओं का प्रभाव अकोइजम की आगे की राह मुश्किल बना सकता है. ऐसे में आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी उनके बढ़ते प्रभाव का मुकाबला किस रणनीति से करती है और कांग्रेस सांसद अपनी लोकप्रियता को संगठन के भीतर कितनी राजनीतिक ताकत में बदल पाते हैं. QR स्कैन करें, डाउनलोड करें News18 ऐप या वेबसाइट पर जारी रखने के लिए यहां क्लिक करें
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