राष्ट्रवाणी: यूरोप के साथ भारत के संबंधों के लिहाज से भी नवंबर के शुरुआती दिन महत्वपूर्ण हैं. ऑस्ट्रिया की विदेश मंत्री बीट माइनल-राइजिंगर 27 अक्टूबर से 2 नवंबर तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं. 28 अक्टूबर को नई दिल्ली में उन्होंने विदेश मंत्री जयशंकर के साथ द्विपक्षीय वार्ता की थी. दोनों देशों के बीच बातचीत का प्रमुख केंद्र आर्थिक और व्यापारिक सहयोग रहा. भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते से ऑस्ट्रियाई कंपनियों के लिए भारतीय बाजार में नए अवसर खुलने की उम्मीद है. ऑस्ट्रिया की कंपनियों की भारत में बुनियादी ढांचे, रेलवे, जलविद्युत और औद्योगिक क्षेत्र में पहले से मौजूद भागीदारी को और विस्तार देने पर भी जोर है. इसके अलावा शिक्षा, कौशल विकास, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं भी दोनों देशों के एजेंडे में हैं. ऑस्ट्रिया जनवरी 2027 से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य बनने जा रहा है, जबकि भारत भी 2028-29 के कार्यकाल के लिए इस परिषद की सदस्यता चाहता है. ऐसे में संयुक्त राष्ट्र सुधार और वैश्विक शांति जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के बीच सहयोग का महत्व बढ़ जाता है. नई दिल्ली में 2 और 3 नवंबर को आयोजित होने वाला ‘भारत-ईयू डिजिटल सहयोग सम्मेलन’ भी इस सप्ताह के प्रमुख कार्यक्रमों में शामिल है. साउथ एशियन यूनिवर्सिटी में होने वाले इस सम्मेलन में शोधकर्ता, नीति निर्माता, तकनीकी विशेषज्ञ, उद्योग प्रतिनिधि और नवाचार से जुड़े लोग हिस्सा लेंगे. सम्मेलन का उद्देश्य डिजिटल तकनीक और नीतिगत सहयोग को आगे बढ़ाना है. इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, 6जी, हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग, डिजिटल बुनियादी ढांचे, साइबर सुरक्षा और तकनीकी नियमन जैसे विषयों पर चर्चा होगी. भारत और यूरोपीय संघ दोनों ही डिजिटल अर्थव्यवस्था को भविष्य की आर्थिक प्रतिस्पर्धा का महत्वपूर्ण आधार मानते हैं. भारत के पास बड़े डिजिटल उपयोगकर्ता आधार, तकनीकी प्रतिभा और डिजिटल सार्वजनिक ढांचे की ताकत है, जबकि यूरोप के पास अनुसंधान, औद्योगिक तकनीक और नियामक अनुभव है. ऐसे में दोनों पक्षों के बीच सहयोग बढ़ने से न केवल तकनीकी नवाचार को गति मिल सकती है, बल्कि सुरक्षित डिजिटल नेटवर्क और भरोसेमंद तकनीकी व्यवस्था विकसित करने में भी मदद मिल सकती है. सम्मेलन का आयोजन आईएनपीएसीई (इनपेस), सी-डैक और आईआईटी गुवाहाटी कर रहे हैं. भारत की कूटनीतिक गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण पक्ष अरुणाचल प्रदेश में भी दिखाई देगा. तवांग में भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी 1 से 7 नवंबर तक आम लोगों के दर्शन के लिए उपलब्ध रहेगी. यह आयोजन 31 अक्टूबर से 21 नवंबर तक अरुणाचल प्रदेश के तीन प्रमुख बौद्ध केंद्रों तवांग, बोमडिला और नामसाई में चलने वाले व्यापक कार्यक्रम का हिस्सा है. राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली में संरक्षित पिपरहवा से प्राप्त पवित्र अवशेषों को विशेष व्यवस्था के तहत अरुणाचल प्रदेश लाया गया है. इस आयोजन के साथ ‘बौद्ध विरासत पर एक प्रदर्शनी और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन’ भी आयोजित किया जा रहा है. सम्मेलन में भारत सहित छह अन्य देशों के बौद्ध भिक्षु, विद्वान और प्रतिनिधि शामिल होंगे. ‘हिमालयी क्षेत्र और उससे आगे बौद्ध धर्म का प्रसार’ विषय पर होने वाला यह सम्मेलन भारत की सांस्कृतिक और सभ्यतागत कूटनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण है. बौद्ध धर्म भारत से निकलकर एशिया के अनेक देशों तक पहुंचा और आज भी दक्षिण तथा दक्षिण-पूर्व एशिया से लेकर हिमालयी क्षेत्र के देशों के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव का एक मजबूत आधार है. तवांग का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह क्षेत्र तिब्बती बौद्ध परंपरा का एक प्रमुख केंद्र है. यहां होने वाला आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ भारत की समृद्ध बौद्ध विरासत और पड़ोसी देशों के साथ उसके ऐतिहासिक सांस्कृतिक संबंधों को भी सामने लाएगा. केंद्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने अरुणाचल प्रदेश सरकार, अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ और राष्ट्रीय संग्रहालय के सहयोग से इस आयोजन की व्यवस्था की है. केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने 31 अक्टूबर को तवांग में उद्घाटन समारोह में हिस्सा लिया. नवंबर का पहला सप्ताह भारत की विदेश नीति के कई महत्वपूर्ण पहलुओं को एक साथ सामने ला रहा है. एक तरफ कॉमनवेल्थ के जरिए विकासशील देशों के साथ साझेदारी मजबूत करने की कोशिश है, तो दूसरी तरफ यूरोप के साथ व्यापार और डिजिटल तकनीक में सहयोग बढ़ाने पर जोर है. वहीं, तवांग में बुद्ध के पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी भारत की सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जोड़ने का अवसर प्रदान कर रही है. QR स्कैन करें, डाउनलोड करें News18 ऐप या वेबसाइट पर जारी रखने के लिए यहां क्लिक करें
Trending
- जिस उम्र में पूरे होने थे सपने, उसी में छोड़ गया दुनिया, टीवी एक्टर अनुज ठाकुर का निधन—पढ़ें इनसाइड स्टोरी – राष्ट्रवाणी
- सैनिक स्कूल में लेना है एडमिशन, सफल स्टूडेंट ने दिया प्रवेश परीक्षा पास करने का मंत्र – राष्ट्रवाणी
- एक तरफ ईरान, दूसरी तरफ सऊदी, तीसरी ओर अमेरिका, पाकिस्तान के सामने 3 मुश्किलें—पढ़ें इनसाइड स्टोरी – राष्ट्रवाणी
- छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस समारोह की तैयारियां पूरी, कल मिनी स्टेडियम में होगा भव्य आयोजन….. – राष्ट्रवाणी
- छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 : राज्योत्सव के शिल्पग्राम में बिखरी झारा आर्ट कलाकृतियों की छटा…. – राष्ट्रवाणी
- छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 : गढ़ कलेवा के स्टॉल में स्वादिष्ट छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का स्वाद ले रहे नागरिक…. – राष्ट्रवाणी
- छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 : राज्योत्सव में महक रहा राजस्थान का स्वाद, नीरज शर्मा बोले—पढ़ें इनसाइड स्टोरी – राष्ट्रवाणी
- राज्योत्सव में लोककला के रंग, सुरों की गूंज और थिरकते कदमों ने बांधा समां, शिल्पग्राम मंच पर सजी छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की मनमोहक महफिल, पंडवानी से लेकर फ्यूजन बैंड तक कलाकारों ने बिखेरा कला का जादू….. – राष्ट्रवाणी

