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Home»Blog»मोदी सरकार ने अलगाववाद को जम्मू-कश्मीर से बाहर निकाल दिया: शाह
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मोदी सरकार ने अलगाववाद को जम्मू-कश्मीर से बाहर निकाल दिया: शाह

atulpradhanBy atulpradhanMarch 26, 2025No Comments7 Mins Read
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मोदी सरकार ने अलगाववाद को जम्मू-कश्मीर से बाहर निकाल दिया: शाह
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नयी दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कहा कि ‘हुर्रियत कॉन्फ्रेंस’ से जुड़े दो संगठनों ने अलगाववाद से सभी संबंध तोड़ने की घोषणा की है. शाह ने कहा कि यह कदम भारत की एकता को मजबूत करेगा. उन्होंने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की एकीकरण नीतियों ने जम्मू-कश्मीर से अलगाववाद को बाहर कर दिया है.

शाह ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ”हुर्रियत से जुड़े दो संगठनों ने अलगाववाद से सभी संबंध तोड़ने की घोषणा की है. मैं भारत की एकता को मजबूत करने की दिशा में अहम इस कदम का स्वागत करता हूं और ऐसे सभी समूहों से आग्रह करता हूं कि वे आगे आएं तथा अलगाववाद को हमेशा के लिए खत्म कर दें.” उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित, शांतिपूर्ण और एकीकृत भारत के निर्माण के सपने को साकार करने की दिशा में बड़ी जीत है. हुर्रियत कॉन्फ्रेंस जम्मू-कश्मीर का एक अलगाववादी संगठन है. इसके अधिकतर घटकों पर सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया है.

पिछले दस साल में भारत आपदा प्रबंधन में क्षेत्रीय एवं वैश्विक ताकत बनकर उभरा : अमित शाह

आपदा प्रबंधन में आर्थिक सहायता देने में कुछ राज्यों के साथ भेदभाव के विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को राज्यसभा में दावा किया कि पिछले दस साल में भारत आपदा प्रबंधन के मामले में राष्ट्रीय ही नहीं क्षेत्रीय एवं वैश्विक ताकत बनकर उभरा है तथा इसे दुनिया भी यह स्वीकार कर रही है.

उच्च सदन में शाह ने आपदा प्रबंधन (संशोधन) विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि इसमें सत्ता के केंद्रीयकरण का कोई प्रश्न ही नहीं उठता है. उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन के बारे में इस विधेयक में न केवल प्रतिक्रियात्मक रवैया अपनाने बल्कि पहले से तैयारी करने, अभिनव प्रयासों वाले और सभी की भागीदारी वाले रवैये को अपनाने पर जोर दिया गया है. गृह मंत्री के जवाब के उच्च सदन ने सरकारी संशोधनों के साथ इस विधेयक को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी. इसके साथ ही सदन ने विपक्षी सदस्यों द्वारा पेश संशोधनों को खारिज कर दिया.

शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आपदा के जोखिमों को घटाने के लिए विश्व के समक्ष जो 10 सूत्री एजेंडा रखा है, उसे 40 देशों ने अपना लिया है और उसका पालन कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि विधयक में न केवल राज्य सरकारों बल्कि आम लोगों की भागीदारी का प्रावधान किया गया है.

शाह ने कहा, ”पिछले दस सालों में आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में जो परिवर्तन आया है, हम राष्ट्रीय स्तर के साथ-साथ क्षेत्रीय एवं वैश्विक ताकत बनकर उभरे हैं, यह पूरी दुनिया स्वीकार करती है. भारत की सफलता गाथा को लंबे समय तक बनाये रखने के लिए यह विधेयक लाया गया है.” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह सफलता गाथा सरकार की नहीं पूरे देश की है. शाह ने कहा कि आपदा प्रबंधन की लड़ाई संस्थाओं को अधिकार संपन्न बनाने के साथ-साथ जवाबदेह बनाये बिना नहीं लड़ी जा सकती है. उन्होंने कहा कि विधेयक में इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है.

उन्होंने कहा कि आपदा का सीधा रिश्ता जलवायु परिवर्तन से है. उन्होंने कहा कि आपदा रोकने के लिए आवश्यक है कि जलवायु परिवर्तन पर नजर रखी जाए और ग्लोबल वार्मिंग को रोका जाए. उन्होंने वेदों का जिक्र किया और कहा कि इसमें न केवल पृथ्वी बल्कि अंतरिक्ष तक को बचाने की बात कही गयी है. गृह मंत्री ने सृष्टि को बचाने के लिए भारत द्वारा प्राचीन समय से किए जा रहे उपायों का जिक्र करते हुए हड़प्पा सभ्यता का भी उल्लेख किया.

उन्होंने कहा कि सदस्यों ने सत्ता के केंद्रीयकरण को लेकर चिंता व्यक्त की है किंतु यदि विधेयक को ध्यान से देखा जाए तो क्रियान्वयन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी जिला आपदा प्रबंधन की है जो राज्य सरकार के तहत आता है. शाह ने कहा कि विधेयक में कहीं भी संघीय ढांचे को नुकसान करने की संभावना ही नहीं है.

चर्चा में कई विपक्षी सदस्यों ने आपदा सहायता के मामले में केंद्र सरकार पर गैर-भाजपा शासित राज्यों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया था. इसी का जवाब देते हुए शाह ने कहा, ”वित्त आयोग ने आपदा सहायता के लिए एक वैज्ञानिक व्यवस्था की है. इससे एक भी कानी पाई कम किसी भी राज्य को नरेन्द्र मोदी सरकार ने नहीं दी है, बल्कि हमने ज्यादा दिया है.” विधेयक पर संशोधन लाये जाने की जरूरत को स्पष्ट करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि यदि किसी इमारत की समय-समय पर मरम्मत न हो तो वह खराब हो जाती है. उन्होंने कहा, ”यदि हम समय की जरूरत के अनुसार कानून में बदलाव करें तो क्या आपत्ति है.”

उन्होंने कहा, ”शायद उनको (विपक्षी सदस्यों को) लगता है कि हम (सत्ता में) आयेंगे तो बदलेंगे तो बहुत देर है…पंद्रह-बीस साल तक किसी का नंबर नहीं लगने वाला. जो कुछ करना है, हमें करना है, लंबे समय तक.” शाह ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण आपदाओं का आकार और स्तर, दोनों बदला है, तो इससे निबटने के तरीके और व्यवस्था भी बदलनी पड़ेगी और संस्थाओं की जवाबदेही तय करनी पड़ेगी एवं शक्तियां देनी पड़ेगी. उन्होंने कहा कि केवल इसी उद्देश्य से ही यह विधेयक लाया गया है.

उन्होंने कहा कि इस विधेयक को लेकर विभिन्न पक्षों से बातचीत की गयी और उनके 89 प्रतिशत सुझावों को मानकर इसे तैयार किया गया. उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन में दक्षता, सटीकता, क्षमता, तीव्रता को समाहित करने के लिए यह विधेयक बनाया गया है.
शाह ने आपदा प्रबंधन के लिए गुजरात सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि आपदा प्रबंधन में ”शून्य हताहत” के लक्ष्य को लेकर काम किए गए और इसमें सफलता भी मिली. गृह मंत्री ने कहा कि आज किसानों, मछुआरों सहित समाज के सभी वर्गों को प्राकृतिक आपदाओं के बारे में ऐप के माध्यम से जानकारी दी जा रही है.

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज पर्यावरण संरक्षण के मामले में दुनिया का नेतृत्व कर रहे हैं और इसीलिए संयुक्त राष्ट्र ने उन्हें ‘चैंपियंस ऑफ अर्थ’ की उपाधि देकर सम्मानित किया है. शाह ने विपक्ष के कई नेताओं पर कोविड आपदा के समय लोगों को टीकाकरण के मामले में गुमराह करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि कोविड आपदा में केवल केंद्र सरकार और राज्य सरकारें ही नहीं बल्कि देश की 140 करोड़ जनता मिलकर लड़ रही थी और यही हमारी विजय का कारण है.

‘पीएम केयर्स फंड’ संप्रग के प्रधानमंत्री राहत कोष से अधिक पारदर्शी : अमित शाह

राज्यसभा में मंगलवार को गृह मंत्री अमित शाह ने पूर्ववर्ती संप्रग सरकार के दौरान प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष के प्रबंधन को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि उसमें जवाबदेही एवं पारर्दिशता की कमी थी. उच्च सदन में आपदा प्रबंधन (संशोधन) विधेयक 2024 पर चर्चा का जवाब देते हुए शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष संप्रग के दौर में बनाया गया था, जबकि ‘पीएम-केयर्स फंड’ की स्थापना राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के दौरान की गई थी.

गृह मंत्री ने कहा, ”कांग्रेस के शासन में प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष पर सिर्फ एक परिवार का नियंत्रण था. कांग्रेस अध्यक्ष प्रधानमंत्री राहत कोष के सदस्य होते थे. आप इस देश के लोगों को क्या जवाब देंगे?” उन्होंने आरोप लगाया कि संप्रग शासन में राजीव गांधी फाउंडेशन को प्रधानमंत्री राहत कोष से धन दिया गया. उन्होंने कहा, ”उनके समय में कोई पारर्दिशता नहीं थी. फंड के उपयोग को देखने के लिए कोई समिति नहीं थी.”

शाह ने कहा कि इसके विपरीत ”पीएम-केयर्स फंड” के प्रबंधन में ट्रस्टी के रूप में वित्त और रक्षा मंत्रियों सहित शीर्ष पांच मंत्री शामिल हैं तथा पांच सचिवों की एक समिति इसके व्यय की समीक्षा करती है और मंजूरी देती है. कोविड महामारी के दौरान ‘पीएम-केयर्स फंड” का इस्तेमाल वेंटिलेटर और टीकाकरण आदि के लिए किया गया था. उन्होंने कहा कि ‘पीएम-केयर्स फंड’ के प्रबंधन में किसी राजनीतिक पार्टी के अध्यक्ष शामिल नहीं हैं.

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