
चंडीगढ़. पंजाब के मोहाली की एक स्थानीय अदालत ने शुक्रवार को स्वयंभू ईसाई धर्म प्रचारक बजिंदर सिंह को 2018 के बलात्कार के मामले में दोषी ठहराया. अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश विक्रांत कुमार की अदालत एक अप्रैल को सजा सुनाएगी. बजिंदर सिंह को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (बलात्कार), 323 (जानबूझकर चोट पहुंचाने के लिए सजा) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत दोषी ठहराया गया है. दोषी ठहराए जाने के बाद 42 वर्षीय पादरी को पटियाला जेल ले जाया गया.
मामले में पांच अन्य आरोपियों अकबर भट्टी, राजेश चौधरी, जतिंदर कुमार, सितार अली और संदीप पहलवान को बरी कर दिया गया.
यह मामला 2018 में जीरकपुर पुलिस थाने में एक महिला द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया था.
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि बजिंदर सिंह ने उसे विदेश ले जाने का वादा करके बहकाया और मोहाली के सेक्टर 63 स्थित अपने आवास पर उसके साथ बलात्कार किया और उसका वीडियो भी बना लिया.
उसने आरोप लगाया था कि आरोपी ने धमकी दी थी कि अगर वह उसकी मांगें नहीं मानेगी तो वह वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट कर देगा. यह सजा ऐसे समय में दी गई है जब पादरी 28 फरवरी को दर्ज यौन उत्पीड़न के एक अन्य मामले में जांच का सामना कर रहा है.
कपूरथला पुलिस ने 22 वर्षीय महिला द्वारा उसके खिलाफ लगाए गए उत्पीड़न के आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया है.
सिंह ने अपने खिलाफ लगे आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया था. मोहाली पुलिस ने 25 मार्च को पादरी के खिलाफ मारपीट और अन्य आरोपों में मामला दर्ज किया था. इससे कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर पादरी का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वह कथित तौर पर एक महिला से बहस कर रहा था और उसे थप्पड़ मार रहा था.

