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Home»Blog»जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में कई लोगों की मौत, कम से कम 20 घायल
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जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में कई लोगों की मौत, कम से कम 20 घायल

atulpradhanBy atulpradhanApril 22, 2025No Comments9 Mins Read
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जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में कई लोगों की मौत, कम से कम 20 घायल
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श्रीनगर/शिवमोगा. कश्मीर के पहलगाम कस्बे के निकट एक खूबसूरत घास के मैदान में मंगलवार को आतंकवादियों द्वारा की गई गोलीबारी में कई पर्यटकों के मारे जाने और कम से कम 20 के घायल होने की आशंका है. जिस समय यह आतंकी हमला हुआ उस समय पर्यटक यहां आम दिनों की तरह खूबसूरत नजारों का आनंद ले रहे थे.

एक उच्च पदस्थ अधिकारी ने विस्तृत जानकारी दिये बिना अनुमान व्यक्त किया कि मृतकों की संख्या 20 से अधिक हो सकती है.
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस आतंकी हमले को “हाल के वर्षों में आम लोगों पर हुए किसी भी हमले से कहीं बड़ा” बताते हुए कहा कि मृतकों की संख्या का पता लगाया जा रहा है. अधिकारियों ने कहा कि हमला ऐसे समय हुआ है जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे डी वेंस भारत दौरे पर हैं. हमला दोपहर करीब तीन बजे हुआ.

यह फरवरी 2019 में पुलवामा में हुए आत्मघाती हमले के बाद से कश्मीर में हुआ सबसे बड़ा आतंकी हमला हो सकता है. पुलवामा में आतंकी हमले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के 47 जवानों की जान चली गई थी. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आतंकी हमले की निंदा की और कहा कि आतंकियों को बख्शा नहीं जाएगा. मोदी ने ‘एक्स’ पर कहा, “मैं जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा करता हूं. जिन लोगों ने अपने प्रियजनों को खो दिया है, उनके प्रति मेरी संवेदना व्यक्त करता हूं. मैं घायल लोगों के जल्द से जल्द स्वस्थ होने की कामना करता हूं. प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता प्रदान की जा रही है.”

उन्होंने कहा, “इस जघन्य कृत्य के पीछे जो लोग हैं, उन्हें न्याय के कटघरे में लाया जाएगा…उन्हें बख्शा नहीं जाएगा! उनका नापाक एजेंडा कभी सफल नहीं होगा. आतंकवाद से लड़ने का हमारा संकल्प अडिग है और यह और भी मजबूत होगा.” पहलगाम शहर से लगभग छह किलोमीटर दूर बैसरन घने देवदार के जंगलों और पहाड़ों से घिरा एक विशाल घास का मैदान है तथा पर्यटकों और ‘ट्रेकर्स’ के बीच पसंदीदा स्थान है.

अधिकारियों ने बताया कि हथियारबंद आतंकवादी ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ कहे जाने वाले घास के मैदान में घुस आए और भोजनालयों के आसपास घूम रहे, टट्टू की सवारी कर रहे व पिकनिक मना रहे व नजारों का आनंद ले रहे पर्यटकों पर गोलीबारी शुरू कर दी. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सऊदी अरब की यात्रा पर गए प्रधानमंत्री को जानकारी दी और कहा कि वह सभी एजेंसियों के साथ तत्काल सुरक्षा समीक्षा बैठक करने के लिए श्रीनगर जा रहे हैं.

शाह ने ‘एक्स’ पर कहा, ”जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले से दुखी हूं. मेरी संवेदनाएं मृतकों के परिजनों के साथ हैं. इस जघन्य आतंकी हमले में शामिल लोगों को बख्शा नहीं जाएगा और हम अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई करेंगे तथा उन्हें कड़ी से कड़ी सजा देंगे.” घटनास्थल के कथित वीडियो में शवों और रोती हुईं महिलाओं का दहला देने वाला दृश्य देखा जा सकता है. हालांकि इस वीडियो की आधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं हुई है.

हमले के समय घटनास्थल पर मौजूद एक महिला ने ‘पीटीआई-भाषा’ को फोन पर बताया, “मेरे पति के सिर में गोली लगी, जबकि सात अन्य लोग भी हमले में घायल हुए हैं.” महिला ने अपनी पहचान नहीं बताई, लेकिन घायलों को अस्पताल पहुंचाने में मदद की गुहार लगाई. एक अन्य महिला पर्यटक ने बताया कि जैसे ही गोलियां चलीं, वहां अफरातफरी मच गई और पर्यटक छिपने के लिए भागे, लेकिन खुले स्थान पर छिपने के लिए कोई जगह नहीं थी. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने घटना की निंदा की.

अब्दुल्ला ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “मृतकों की संख्या का पता लगाया जा रहा है, इसलिए मैं विस्तृत विवरण नहीं दे पाउंगा. स्थिति स्पष्ट होने पर आधिकारिक रूप से सूचित किया जाएगा. यह हाल के वर्षों में आम लोगों पर हुए किसी भी हमले से कहीं बड़ा हमला है.” उन्होंने कहा, “मैं स्तब्ध हूं. हमारे आगंतुकों पर यह हमला घृणित है. इस हमले को अंजाम देने वाले अपराधी जानवर हैं, अमानवीय हैं और नफरत के लायक हैं. इसकी निंदा के लिए कोई भी शब्द पर्याप्त नहीं है. मैं मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं.” पहलगाम से नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक अल्ताफ अहमद वानी ने इस हमले को “कायरतापूर्ण” बताया और कहा कि निर्दोष लोगों को निशाना बनाना इस्लाम की शिक्षाओं के खिलाफ है.

उन्होंने कहा, “इस कायरतापूर्ण कृत्य के दोषियों से सख्ती से निपटा जाएगा.” उन्होंने संवाददाताओं से कहा, “यह हमला बहुत दर्दनाक और दुर्भाग्यपूर्ण है. यह अप्रत्याशित स्थान पर हुआ जो पहलगाम (बस स्टैंड) से लगभग पांच किलोमीटर दूर है. इसका इस्तेमाल ट्रैकिंग के लिए किया जाता है और लोग वहां खच्चरों पर सवार होकर जाते हैं.” पूरा जिला प्रशासन और पुलिस बल मौके पर पहुंचा और एंबुलेंस को घटनास्थल पर भेज दिया गया. एक हेलीकॉप्टर का भी घायलों को बचाने में इस्तेमाल किया गया.

कुछ घायलों को स्थानीय लोग अपने खच्चरों पर लादकर नीचे लाए. अधिकारियों ने बताया कि गोलीबारी की आवाजें आने की शुरुआती खबर मिलने के बाद सेना, सीआरपीएफ और स्थानीय पुलिस बैसरन पहुंची. बैसरन 1980 के दशक में फिल्म निर्माताओं का बेहद पसंदीदा रहा. यह घटना ऐसे समय हुई है जब वर्षों तक आतंकवाद से जूझने के बाद कश्मीर में पर्यटकों की संख्या में भारी वृद्धि देखी गई है.

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में कर्नाटक के एक कारोबारी की मौत

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में मंगलवार को हुए आतंकवादी हमले में कर्नाटक के शिवमोगा जिले के एक कारोबारी की मौत हो गई. कारोबारी के परिवार ने यह जानकारी दी. मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने कारोबारी मंजूनाथ राव के निधन पर शोक जताया. सिद्धरमैया ने घटना को लेकर अधिकारियों के साथ बैठक की. एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि कर्नाटक से अधिकारियों की एक टीम कश्मीर के लिए रवाना हो गई है.

पहलगाम में आतंकी हमले के बाद लोग पड़े थे खून से लथपथ, मदद के लिए मची चीख-पुकार
दक्षिण कश्मीर के प्रमुख पर्यटन स्थल पहलगाम में बैसरन के घास के मैदानों में तब मदद के लिए चीख-पुकार मच गई, जब जम्मू-कश्मीर में हाल के वर्षों में आम लोगों पर हुए सबसे घातक आतंकवादी हमलों में से एक के बाद एक दर्जन से अधिक पर्यटक खून से लथपथ पड़े थे.

भारी हथियारों से लैस आतंकवादी बैसरन की घाटी से निकले और करीब 40 पर्यटकों के समूह को घेर लिया. आतंकवादियों ने पर्यटकों पर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी, जिसमें कई लोग मारे गए और कम से कम 20 अन्य घायल हो गए. प्रत्यक्षर्दिशयों ने दावा किया कि जैसे ही गोलियां चलनी शुरू हुईं, पर्यटन से आजीविका कमाने वाले मुट्ठी भर स्थानीय लोग जान बचाने के लिए भाग गए, जिससे पर्यटक बेबस होकर रह गए.

एक महिला ने फोन पर ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ”मेरे पति को सिर में गोली मारी गई… उन्हें मुसलमान न होने की वजह से गोली मारी गई. हमले में सात अन्य लोग घायल हुए हैं.” अपना नाम नहीं बताने वाली महिला ने घायलों को अस्पताल पहुंचाने में मदद की गुहार लगाई. महिला ने इस संवाददाता से बेतहाशा गुहार लगाई, ”भैया प्लीज मेरे पति को बचा लो.” अधिकारियों ने बताया कि चूंकि घास के मैदानों तक केवल पैदल या खच्चरों से ही पहुंचा जा सकता है, इसलिए अधिकारियों को घायलों को निकालने के लिए हेलीकॉप्टर बुलाना पड़ा. हालांकि, हेलीकॉप्टर के घटनास्थल पर पहुंचने से पहले ही स्थानीय लोगों ने कुछ घायलों को अपने खच्चरों पर लादकर नीचे उतार लिया था.

स्थानीय पर्यटक गाइडों और टट्टूवालों ने जीवित बचे लोगों को सांत्वना दी, साथ ही उन्होंने घायल पर्यटकों को अपने कंधों पर उठाकर निकटतम वाहन योग्य स्थान तक पहुंचाने के लिए और लोगों को बुलाया. हमले की खबर फैलते ही पहलगाम की सड़कें और गलियां सुनसान हो गईं, क्योंकि बड़ी संख्या में आए पर्यटक शहर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर चले गए.

जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि मृतकों की संख्या का पता लगाया जा रहा है. उन्होंने ‘एक्स’ पर कहा, ”यह हमला हाल के वर्षों में आम लोगों पर हुए किसी भी हमले से कहीं बड़ा है.” वर्ष 2000 में पहलगाम स्थित अमरनाथ आधार शिविर पर हुए आतंकवादी हमले में 30 से अधिक लोग मारे गए थे और 60 अन्य घायल हुए थे. इसके एक वर्ष बाद शेषनाग में अमरनाथ तीर्थयात्रियों पर हुए हमले में 13 लोग मारे गए थे और 15 अन्य घायल हुए थे, जबकि वर्ष 2002 में पहलगाम क्षेत्र में हुए एक अन्य हमले में 11 लोग मारे गए थे.

वर्ष 2017 में अमरनाथ यात्रा के दौरान एक आतंकी हमले में आठ तीर्थयात्री मारे गए थे. पिछले साल मई में पहलगाम के यन्नार में आतंकवादियों द्वारा की गई गोलीबारी में राजस्थान का एक पर्यटक दंपति घायल हो गया था. पहलगाम में हमले वाली जगह का एक वीडियो सामने आया है जिसमें कई लोग खून से लथपथ और जमीन पर बेसुध पड़े हुए दिखाई दे रहे हैं, जबकि महिला पर्यटक रोते हुए अपने प्रियजनों की तलाश कर रही हैं. कुछ लोग इतने स्तब्ध थे कि कोई प्रतिक्रिया नहीं दे सके और स्थानीय लोग उनकी मदद कर रहे थे.

मुख्यमंत्री अब्दुल्ला ने कहा, ”मैं स्तब्ध हूं. हमारे आगंतुकों पर यह हमला घृणित है. इस हमले के अपराधी जानवर, अमानवीय हैं और घृणा के लायक हैं. इसकी निंदा के लिए कोई भी शब्द पर्याप्त नहीं है. मैं मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं.” हमला ऐसे समय में हुआ है जब सालों तक आतंकवाद से जूझने के बाद कश्मीर में पर्यटकों की संख्या में भारी वृद्धि देखी जा रही है. साथ ही, 38 दिवसीय अमरनाथ तीर्थयात्रा तीन जुलाई से शुरू होनी है.

देश भर से लाखों तीर्थयात्री दो मार्गों से पवित्र गुफा मंदिर की यात्रा करते हैं. एक मार्ग दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में पारंपरिक 48 किलोमीटर लंबा पहलगाम मार्ग है जबकि दूसरा मार्ग गंदेरबल जिले में 14 किलोमीटर का छोटा बालटाल मार्ग है जहां खड़ी चढ़ाई है. बैसरन पहलगाम में एक प्रमुख पर्यटन स्थल है. यह उन पर्वतारोहियों के लिए शिविर स्थल भी है जो तुलियन झील तक जाते हैं.

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