नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कोलकाता के सरकारी आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एक प्रशिक्षु डॉक्टर के बलात्कार और हत्या से संबंधित स्वत? संज्ञान मामले की सुनवाई नवंबर तक के लिए टाल दी। कोलकाता की एक निचली अदालत ने इस मामले में 20 जनवरी को दोषी संजय रॉय को ‘‘मृत्यु तक आजीवन कारावास’’ की सजा सुनाई थी। इस जघन्य अपराध के कारण देश भर में आक्रोश फैल गया था और पश्चिम बंगाल में लंबे समय तक विरोध प्रदर्शन हुए।
न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने इस मामले की सुनवाई स्थगित कर दी, क्योंकि वह अन्य मामलों की सुनवाई में व्यस्त थी। कनिष्ठ और वरिष्ठ चिकित्सकों के एक संगठन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता करुणा नंदी ने दलील दी कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में भाग लेने वाले चिकित्सकों को पुलिस पूछताछ के लिए बुला रही है। उन्होंने पीठ से सुनवाई के लिए जल्द तारीख निर्धारित करने का अनुरोध किया।
मामले के मुख्य आरोपी की दोषसिद्धि के बावजूद उच्चतम न्यायालय चिकित्सकों की अनधिकृत अनुपस्थिति को नियमित करने सहित कई आवश्यक मुद्दों की निगरानी कर रहा है। स्रातकोत्तर प्रशिक्षु चिकित्सक का शव पिछले साल नौ अगस्त को अस्पताल के सेमिनार कक्ष में मिला था। कोलकाता पुलिस ने अगले ही दिन एक नागरिक स्वयंसेवक रॉय को गिरफ्तार किया था।
इस मामले का स्वत? संज्ञान लेते हुए पीठ ने पिछले साल 20 अगस्त को एक राष्ट्रीय कार्यबल (एनटीएफ) का गठन किया था, ताकि अपराध के मद्देनजर चिकित्सा पेशेवरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु एक प्रोटोकॉल तैयार किया जा सके। एनटीएफ ने पिछले साल नवंबर में अपनी रिपोर्ट में कहा था कि स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों के खिलाफ अपराधों से निपटने के लिए एक अलग केंद्रीय कानून की आवश्यकता नहीं है। यह रिपोर्ट केंद्र सरकार के हलफनामे का हिस्सा थी।
कार्यबल ने कहा था कि भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत गंभीर अपराधों के अलावा छोटे अपराधों से निपटने के लिए राज्य के कानूनों में पर्याप्त प्रावधान हैं। एनटीएफ ने कई सिफारिशों में कहा कि 24 राज्यों ने ‘‘स्वास्थ्य सेवा संस्थान’’ और ‘‘चिकित्सा पेशेवर’’ शब्दों को परिभाषित करते हुए स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों के खिलाफ ंिहसा से निपटने के लिए कानून बनाए हैं।
शुरूआत में कोलकाता पुलिस ने जांच का जिम्मा संभाला था, लेकिन उसकी जांच पर असंतोष व्यक्त करते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 13 अगस्त को सौंप दी थी। इसके बाद, शीर्ष अदालत ने 19 अगस्त, 2024 से खुद ही मामले की निगरानी शुरू की थी।
सीबीआई ने पिछले साल अक्टूबर में रॉय के खिलाफ आरोप-पत्र दाखिल किया था।

