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Home»International»अलास्का सम्मेलन: ट्रंप-पुतिन बैठक में कोई समझौता नहीं हुआ, लेकिन युद्धविराम के लिए अब भी प्रयास जारी
International

अलास्का सम्मेलन: ट्रंप-पुतिन बैठक में कोई समझौता नहीं हुआ, लेकिन युद्धविराम के लिए अब भी प्रयास जारी

Team RashtrawaniBy Team RashtrawaniAugust 17, 2025No Comments5 Mins Read
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अलास्का सम्मेलन: ट्रंप-पुतिन बैठक में कोई समझौता नहीं हुआ, लेकिन युद्धविराम के लिए अब भी प्रयास जारी
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लंदन/न्यूयॉर्क. अलास्का में रूस के नेता व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात से कुछ घंटे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि वह यूक्रेन में युद्धविराम देखना चाहते हैं और यदि आज इस पर सहमति नहीं बनी तो वह ”खुश नहीं होंगे”. ऐसा प्रतीत होता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति अलास्का से बिना किसी समझौते के ही वापस लौट आए हैं.

ट्रंप ने संवाददाताओं से कहा, ”हम वहां तक नहीं पहुंचे” और बाद में अस्पष्ट रूप से कहा कि उन्होंने और पुतिन ने ”बहुत प्रगति की है”.
ट्रंप द्वारा आगामी सप्ताहों और महीनों में पुतिन के साथ बातचीत करने के सुझाव पर पुन? विचार किए जाने की संभावना है तथा रूसी नेता ने कहा है कि उनकी अगली बैठक मॉस्को में हो सकती है.

शिखर सम्मेलन के बाद ‘फॉक्स न्यूज’ के साथ एक साक्षात्कार में जब ट्रंप से पूछा गया कि यूक्रेन में युद्ध कैसे समाप्त हो सकता है और क्या भूमि की अदला-बदली होगी, तो ट्रंप ने कहा: ”ये वे बिंदु हैं जिन पर हम काफी हद तक सहमत हैं”. यूक्रेन से क्षेत्रीय रियायतें हासिल करना लंबे समय से शांति समझौते पर किसी भी वार्ता के लिए मॉस्को की पूर्व शर्तों में से एक रहा है. पुतिन शायद यह दांव लगा रहे हैं कि यूक्रेन पर लगातार सैन्य दबाव बनाए रखते हुए इन रियायतों पर जोर देना उनके लिए फायदेमंद होगा.

यूक्रेन में युद्ध को लेकर जनता में बेचैनी बढ़ रही है और पुतिन उम्मीद कर रहे होंगे कि थकी हुई जनता अंतत? इस समझौते को स्वीकार्य और आकर्षक भी मानेगी. रूस ने रातोंरात यूक्रेनी शहरों पर नए हमले शुरू कर दिए, जिनमें 300 से अधिक ड्रोन और 30 मिसाइल शामिल थीं. यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की, जिन्हें अलास्का शिखर सम्मेलन से बाहर रखा गया था, ने कहा है कि कीव क्षेत्रीय रियायतों पर सहमत नहीं होगा. ऐसा कदम यूक्रेन के संविधान के तहत अवैध होगा, जिसमें देश की क्षेत्रीय सीमाओं में परिवर्तन को मंजूरी देने के लिए राष्ट्रव्यापी जनमत संग्रह की आवश्यकता होती है.

युद्धविराम के बदले जमीन समझौते के पीछे यह धारणा है कि इससे यूक्रेनी और यूरोपीय सुरक्षा बढ़ेगी. ट्रंप इसे व्यापक शांति समझौते के लिए पुतिन को बातचीत की मेज पर लाने और पुर्निनर्माण के अवसरों को खोलने की दिशा में पहला कदम मानते हैं. वास्तव में, इस तरह का समझौता दीर्घकालिक रूसी खतरे को कम करने में कोई खास मदद नहीं करेगा. रूस यूरोपीय नाटो सदस्य देश पर प्रत्यक्ष सैन्य हमला करे या नहीं, महाद्वीप को कमजोर करने के लिए उसे ऐसा करने की कोई आवश्यकता नहीं है.

यूक्रेन के लिए, इस तरह के समझौते का खतरा साफ है. इस समझौते के तहत रूस यूक्रेन में बड़े पैमाने पर चल रहे युद्ध को रोक तो सकता है, लेकिन यह लगभग निश्चित रूप से देश को अंदर से अस्थिर करना जारी रखेगा. स्थायी क्षेत्रीय रियायत इन जोखिमों से निपटना और भी मुश्किल बना देगी. इस तरह के समझौते से यूक्रेन में जनमत विभाजित होने की संभावना है, और युद्ध प्रयासों में शामिल लोग पूछेंगे: ”आखिर हम किसके लिए लड़ रहे हैं?” युद्धविराम के बदले जमीन का समझौता एक बेकार सौदा होगा. यह निश्चित रूप से यूक्रेन, यूरोप और पश्चिम के लिए और भी जटिल समस्याएं पैदा करेगा. ट्रंप के लिए बेहतर होगा कि वे आने वाले महीनों में पुतिन के साथ आगे की बातचीत में यूक्रेन को इस तरह के समझौते के लिए बाध्य करने से बचें.

पुतिन ने यूक्रेन के लिए सुरक्षा उपायों पर सहमति जताई: अमेरिकी दूत

विशेष अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ ने रविवार को कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ शिखर वार्ता में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अमेरिका और यूरोपीय सहयोगियों को यूक्रेन को नाटो जैसी सुरक्षा गारंटी देने पर सहमति व्यक्त की है. विटकॉफ ने कहा कि यह गारंटी नाटो की सामूहिक रक्षा प्रतिबद्धता के समान होगी और साढ़े तीन साल से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए किसी भी संभावित समझौते का हिस्सा है.

विटकॉफ ने ‘सीएनएन’ के ‘स्टेट ऑफ द यूनियन’ कार्यक्रम में कहा, ”हम कुछ चीजों पर सहमति बनाने में सफल रहे : जैसे कि अमेरिका नाटो की तरह सुरक्षा प्रदान कर सकता है.” यूक्रेन उसे उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) में शामिल किए जाने की मांग करता रहा है. विशेष अमेरिकी दूत ने कहा कि उन्होंने पहली बार पुतिन को इस पर सहमत होते सुना है.

इस बीच, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने ब्रसेल्स में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के साथ संवाददाता सम्मेलन में कहा, ”हम यूक्रेन के लिए नाटो के अनुच्छेद 5 जैसी सुरक्षा गारंटी में योगदान करने की राष्ट्रपति ट्रंप की इच्छा का स्वागत करते हैं. इच्छुक देशों का गठबंधन-जिसमें यूरोपीय संघ भी शामिल है- अपना योगदान देने के लिए तैयार है.” विटकॉफ ने अलास्का में शुक्रवार को हुई शिखर बैठक का पहला ब्योरा देते हुए कहा कि दोनों पक्ष “मजबूत सुरक्षा गारंटी पर सहमत हुए हैं.” उन्होंने यह भी कहा कि यूक्रेन के किसी भी अन्य क्षेत्र पर कब्जा न करने के लिए रूस कानूनी प्रतिबद्धता जताएगा.

जेलेंस्की ने हाल में अमेरिका को इस बात के लिए धन्यवाद दिया कि वाशिंगटन यूक्रेन के लिए सुरक्षा गारंटी का समर्थन करने को तैयार है, लेकिन उन्होंने कहा कि अभी भी विवरण अस्पष्ट है. इस बीच, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि अगर युद्ध-विराम नहीं हुआ, तो इसके ”नतीजे” भुगतने होंगे, जैसा कि ट्रंप ने पुतिन से मुलाकात से पहले चेतावनी दी थी. रूबियो ने यह भी कहा कि जब तक यूक्रेन बातचीत में शामिल नहीं होगा, तब तक युद्ध-विराम पर कोई समझौता नहीं हो पाएगा.

रूबियो ने ‘एबीसी’ के ‘दिस वीक’ कार्यक्रम में कहा, “अब, अगर कोई शांति समझौता नहीं होता, अगर इस युद्ध का अंत नहीं होता, तो राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कर दिया है कि इसके नतीजे भुगतने होंगे.” उन्होंने कहा, “लेकिन हम इससे बचने की कोशिश कर रहे हैं. बेहतर है शांति स्थापित हो, शत्रुता का अंत हो.” अमेरिकी विदेश मंत्री ने यह भी कहा, “हम शांति समझौते के कगार पर नहीं हैं.” उन्होंने कहा कि वहां तक पहुंचना आसान नहीं होगा और इसके लिए बहुत मेहनत करनी पड़ेगी.

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