न्यूयॉर्क/ढाका. बांग्लादेश में अगले साल की शुरुआत में प्रस्तावित आम चुनावों से पहले अवामी लीग पार्टी की गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाए जाने को लेकर अमेरिकी सांसदों के एक समूह ने चिंता जताई है. मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने 12 मई को पार्टी को आधिकारिक तौर पर भंग कर दिया था.
मंगलवार को यूनुस को भेजे गए एक पत्र में अमेरिकी सांसदों ने उनसे “समावेशी चुनाव” सुनिश्चित करने का आह्वान करते हुए कहा कि बांग्लादेश के लोग स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के माध्यम से निर्वाचित सरकार चुनने के हकदार हैं. यूनुस के प्रेस सचिव शफीकुल आलम ने बुधवार को कहा कि उन्हें पत्र के बारे में कोई जानकारी नहीं है. हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि अवामी लीग के संबंध में अंतरिम सरकार के रुख में कोई बदलाव नहीं होगा.
एक प्रेस वार्ता में पत्र के बारे में पूछे जाने पर आलम ने कहा, “मैंने व्यक्तिगत रूप से पत्र नहीं देखा है और मुझे अभी तक इस मामले की जानकारी नहीं है. हालांकि, अवामी लीग के सिलसिले में सरकार का रुख अडिग है.” आलम ने कहा, “चूंकि, पार्टी की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है और निर्वाचन आयोग ने एक राजनीतिक दल के रूप में इसका पंजीकरण रद्द कर दिया है, इसलिए अवामी लीग यह चुनाव नहीं लड़ सकेगी.” पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों की समिति के रैंकिंग सदस्य ग्रेगरी मीक्स, दक्षिण एवं मध्य एशिया उपसमिति के अध्यक्ष बिल हुइजेंगा, दक्षिण एवं मध्य एशिया उपसमिति की रैंकिंग सदस्य सिडनी कैमलेगर-डोव और सांसद जूली जॉनसन और टॉम सुओज्जी शामिल हैं.
सांसदों ने कहा कि यह बेहद जरूरी है कि अंतरिम सरकार सभी राजनीतिक दलों के साथ मिलकर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के लिए परिस्थितियां तैयार करे, ताकि बांग्लादेश के लोगों की आवाज मतपेटी के माध्यम से शांतिपूर्ण रूप से व्यक्त हो सके और ऐसे सुधार किए जा सकें, जो सरकारी संस्थानों की निष्पक्षता एवं विश्वसनीयता में भरोसा बहाल करें. उन्होंने आशा जताई कि यूनुस सरकार या निर्वाचित उत्तराधिकारी अवामी लीग की गतिविधियों को निलंबित करने के फैसले पर पुर्निवचार करेगा. बांग्लादेश ने अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग की सभी गतिविधियों पर रातों-रात संशोधित आतंकवाद-रोधी कानून के तहत प्रतिबंध लगा दिया है.
यूनुस भारत के साथ संबंध सुधारने पर काम कर रहे हैं: बांग्लादेश के वित्त सलाहकार
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के वित्त सलाहकार सालेहुद्दीन अहमद ने मंगलवार को कहा कि मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने नयी दिल्ली के साथ तनावपूर्ण संबंधों को सुधारने के लिए कदम उठाए हैं और उनका प्रशासन आर्थिक हितों को ”राजनीतिक बयानबाजी” से अलग रखते हुए भारत के साथ आर्थिक संबंध विकसित करने पर काम कर रहा है.
अहमद ने अपने कार्यालय में सरकार की खरीद संबंधी सलाहकार परिषद समिति की बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा, ”मुख्य सलाहकार भारत के साथ कूटनीतिक संबंध सुधारने पर काम कर रहे हैं और वह स्वयं भी इस विषय पर विभिन्न संबंधित पक्षों से बात कर रहे हैं.” जब उनसे पूछा गया कि क्या यूनुस ने भारत से सीधे बात की है तो अहमद ने कहा कि मुख्य सलाहकार ने ”नहीं” की लेकिन उन्होंने इस मामले से जुड़े लोगों से बात की है.
उन्होंने कहा, ”हमारी व्यापार नीति राजनीतिक विचारों से संचालित नहीं होती. यदि भारत से चावल आयात करना वियतनाम या कहीं और से मंगाने की तुलना में सस्ता है तो आर्थिक रूप से यही तर्कसंगत है कि हम यह मुख्य खाद्यान्न भारत से खरीदें.” अहमद ने आशा जताई कि द्विपक्षीय संबंध और खराब नहीं होंगे. अहमद ने कहा कि बांग्लादेश ने ”अच्छे संबंध बनाने की दिशा में कदम उठाते हुए” भारत से 50,000 टन चावल खरीदने के एक प्रस्ताव को मंगलवार को मंजूरी दे दी. उन्होंने कहा कि इस चावल का आयात बांग्लादेश के लिए लाभकारी होगा क्योंकि भारत के बजाय वियतनाम से चावल मंगाने पर प्रति किलोग्राम 10 बांग्लादेशी टका (0.082 अमेरिकी डॉलर) अधिक खर्च आएगा.
अहमद की टिप्पणियां ऐसे समय आई हैं जब कूटनीतिक विश्लेषकों ने कहा है कि भारत एवं बांग्लादेश के संबंध 1971 में पाकिस्तान से बांग्लादेश की स्वतंत्रता के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर हैं. दोनों देशों ने एक-दूसरे के दूतों को तलब किया है तथा दोनों देशों की राजधानियों एवं अन्य स्थानों पर बांग्लादेशी और भारतीय मिशनों के सामने विरोध-प्रदर्शन हुए हैं.
इसके बावजूद सलाहकार ने कहा, ”स्थिति इतनी बुरी अवस्था तक नहीं पहुंची है.” अहमद ने कहा, ”बाहर से देखने पर ऐसा लग सकता है कि बहुत कुछ हो रहा है… हालांकि, कुछ बयान ऐसे होते हैं जिन्हें रोकना कठिन होता है.” जब उनसे पूछा गया कि क्या ”लोग या बाहरी ताकतें” भारत-विरोधी बयान दे रही हैं तो उन्होंने कहा, ”हम दोनों देशों के बीच कोई कड़वाहट नहीं चाहते. यदि बाहर से कोई समस्या भड़काने की कोशिश कर रहा है तो यह किसी भी देश के हित में नहीं है.” उन्होंने साथ ही कहा कि ये घटनाएं ”राष्ट्रीय अभिव्यक्ति” का प्रतिनिधित्व नहीं करतीं बल्कि ये ”बांग्लादेश के लिए जटिल परिस्थितियां” पैदा कर रही हैं.

