Close Menu
Rashtrawani
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • देश
  • विदेश
  • खेल
  • व्यापार
  • मनोरंजन
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
प्रमुख राष्ट्रवाणी

इस्राइल-US का ईरान के नतांज परमाणु स्थल पर हमला; ईरान के रामसर में हमले में परिवार की मौत

March 21, 2026

IPL 2026: आकाशदीप पीठ की चोट के कारण आईपीएल से बाहर

March 21, 2026

महतारी वंदन योजना: आर्थिक संबल से आत्मविश्वास तक, सशक्त हो रही छत्तीसगढ़ की महिलाएं

March 21, 2026
Facebook X (Twitter) Instagram
  • Terms
  • About Us – राष्ट्रवाणी | Rashtrawani
  • Contact
Facebook X (Twitter) Instagram
RashtrawaniRashtrawani
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • देश
  • विदेश
  • खेल
  • व्यापार
  • मनोरंजन
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
Subscribe
Rashtrawani
Home»Business»अमेरिकी शुल्क के बाद सोचना होगा कि सस्ता रूसी तेल फायदेमंद है या नहीं: अभिजीत बनर्जी
Business

अमेरिकी शुल्क के बाद सोचना होगा कि सस्ता रूसी तेल फायदेमंद है या नहीं: अभिजीत बनर्जी

Team RashtrawaniBy Team RashtrawaniAugust 10, 2025No Comments5 Mins Read
Share Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Reddit Telegram Email
अमेरिकी शुल्क के बाद सोचना होगा कि सस्ता रूसी तेल फायदेमंद है या नहीं: अभिजीत बनर्जी
Share
Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

नयी दिल्ली. नोबेल पुरस्कार विजेता अभिजीत बनर्जी ने कहा है कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के भारतीय वस्तुओं पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने की घोषणा के बाद भारत को विचार करना चाहिए कि रूस से सस्ते तेल का आयात फायदेमंद है या नहीं.
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने पिछले हफ्ते एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें भारत के रूस से तेल खरीदने के कारण भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया गया था. इससे भारत पर लगाया गया कुल शुल्क 50 प्रतिशत हो जाएगा, जो दुनिया में किसी भी देश पर अमेरिका द्वारा लगाए गए सबसे अधिक शुल्कों में से एक है. अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क 27 अगस्त से लागू होगा.

बनर्जी ने बीएमएल मुंजाल विश्वविद्यालय के एक कार्यक्रम के मौके पर पीटीआई-भाषा से कहा, ”हमें इस बारे में गंभीरता से सोचना होगा कि क्या रूस से तेल आयात करने लायक है या फिर अमेरिका जाकर यह कहना होगा कि अगर हम रूसी तेल का आयात बंद कर दें, तो क्या वे इसे (शुल्क) हटा लेंगे.” चूंकि भारी शुल्क से भारत द्वारा अमेरिका को किए जाने वाले 27 अरब अमेरिकी डॉलर के गैर-छूट वाले निर्यात पर असर पड़ने की आशंका है, इसलिए रूस से तेल आयात रोकने या कम करने की चर्चा हो रही है.

प्रख्यात अर्थशास्त्री ने कहा, ”इसके बारे में सोचना गलत नहीं है. हमारे कुछ निर्यात 25 प्रतिशत शुल्क पर ही प्रतिस्पर्धी नहीं हैं, इसलिए शायद 50 प्रतिशत (शुल्क) कोई मायने नहीं रखता.” भारत रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़ा आयातक है, और उसने जुलाई में प्रतिदिन 16 लाख बैरल तेल खरीदा था. हालांकि, देश ने अगस्त और सितंबर के लिए कोई ऑर्डर नहीं दिया है. ऐसा इसलिए भी है क्योंकि रूसी तेल पर छूट अब घटकर लगभग दो अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल रह गई हैं.

यह पूछने पर कि क्या भारत को चीन से निवेश पर लगे प्रतिबंध हटाने चाहिए, बनर्जी ने कहा, ”हमें इसे चीन के साथ व्यापार वार्ता के जरिये जोड़ना चाहिए.” उन्होंने आगे कहा, ”मुझे लगता है कि ऐसा करने का यह सही समय है. चीन को भी यह सोचने की जरूरत है कि वे अमेरिका के साथ कैसे व्यापार करेंगे और उनके पास क्या लाभ हैं.” यह पूछने पर कि क्या भारत को आसियान व्यापार समूह में शामिल होना चाहिए, उन्होंने कहा, ”शायद, मुझे लगता है कि हमें ऐसा करना चाहिए. मुझे लगता है कि चीन, आसियान से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है.”

भू-राजनीतिक तनाव और व्यापार अनिश्चितताओं के बीच चालू वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन के बारे में उन्होंने कहा, ”यह उतना अच्छा नहीं रहेगा, जितना हमने उम्मीद की थी.” उन्होंने बताया कि मध्यम वर्ग वास्तव में संकट में है, और पिछले कुछ वर्षों से निजी निवेश में भी कोई वृद्धि नहीं हुई है. उन्होंने कहा, ”टीसीएस जैसी कंपनियां भर्ती नहीं कर रही हैं, आईटी कर्मचारियों का वेतन नहीं बढ़ रहा है… ये सभी ऐसे मुद्दे हैं, जिनसे हम निपट नहीं पाए हैं. हमें इस तथ्य को स्वीकार करना होगा.”

भारतीय रिफाइनरी रूसी तेल के बिना काम चला सकती हैं, लेकिन बनाना होगा संतुलन: विशेषज्ञ

भारतीय रिफाइनरी तकनीकी रूप से रूस से कच्चे तेल की आपूर्ति के बिना काम चला सकती हैं, लेकिन इस बदलाव के लिए उन्हें बड़े आर्थिक और रणनीतिक संतुलन बनाने होंगे. विश्लेषकों ने कहा कि रूसी कच्चा तेल उच्च ‘डिस्टिलेट’ उत्पादन को बढ़ावा देता है. इसका अर्थ है कि कच्चे तेल के शोधन के दौरान बनने वाले पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन का हिस्सा अधिक होता है. भारत की रिफाइनरी खपत में रूसी कच्चे तेल की हिस्सेदारी 38 प्रतिशत तक है.

वैश्विक विश्लेषण फर्म केप्लर के अनुसार, रूसी कच्चे तेल को वैकल्पिक तेलों से बदलने से उत्पादन में बदलाव आएगा. इसके चलते डीजल और विमान ईंधन का उत्पादन कम होगा और अवशेष उत्पादन बढ़ जाएगा. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले हफ्ते भारत से अमेरिकी आयात पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा की थी. यह शुल्क रूस से कच्चे तेल का आयात करने के लिए दंड के रूप में है. इससे भारत पर कुल अमेरिकी शुल्क बढ़कर 50 प्रतिशत हो गया है. ऐसे में रूस से तेल आयात रोकने या कम करने की चर्चा हो रही है.

केप्लर ने अपनी रिपोर्ट – ‘भारतीय आयात पर अमेरिकी शुल्क: ऊर्जा बाजारों और व्यापार प्रवाह पर प्रभाव’ में कहा, ”तकनीकी दृष्टि से भारतीय रिफाइनरी रूसी कच्चे तेल के बिना काम चला सकती हैं, लेकिन इस बदलाव में बड़े आर्थिक और रणनीतिक समझौते शामिल होंगे.” रिपोर्ट के मुताबिक, भारी छूट और भारत की रिफाइनरी प्रणालियों के अनुकूल होने के कारण रूसी कच्चे तेल के आयात में वृद्धि हुई.

रूसी कच्चा तेल उच्च डिस्टिलेट उत्पाद (डीजल और विमान ईंधन) का समर्थन करता है और भारत के उन्नत शोधन बुनियादी ढांचे के लिए उपयुक्त है. इसने सरकारी और निजी दोनों रिफाइनरियों को मज.बूत मार्जिन बनाए रखने में मदद की. केप्लर ने कहा कि इसके उलट जाने पर मार्जिन पर अधिक प्रीमियम नहीं होगा. इसके अलावा अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इससे भी पेट्रोलियम विपणन कंपनियों पर दबाव बढ़ेगा.

Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email
Previous Articleरोहित, कोहली वनडे में असाधारण, जब तक अच्छा कर रहे तब तक खेलना चाहिए: गांगुली
Next Article वरिष्ठ चीनी राजनयिक लियू जियानचाओ को हिरासत में लिया गया
Team Rashtrawani
  • Website

Related Posts

Business

तेल कंपनियों ने प्रीमियम पेट्रोल के दाम 2.3 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ाए, सामान्य पेट्रोल स्थिर

March 20, 2026
Business

The Bonus Market Update: हरे निशान पर खुला भारतीय शेयर बाजार; सेंसेक्स 296 अंक चढ़ा, निफ्टी 23600 के पार

March 18, 2026
Business

आज की सोना-चांदी की कीमतें: 3000 रुपये का उछाल, सोना 1.57 लाख रुपये पर पहुंचा

March 17, 2026
Add A Comment
Leave A Reply Cancel Reply

Ads
Top Posts

सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति ने जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की

April 30, 202547 Views

निर्मला सीतारमण ने जातिगत गणना का श्रेय लेने पर तमिलनाडु सरकार को घेरा

May 3, 202546 Views

सरकार ने गेहूं का एमएसपी 160 रुपये ब­ढ़ाकर 2,585 रुपये प्रति क्विंटल किया

October 1, 202543 Views
Stay In Touch
  • Facebook
  • WhatsApp
  • Twitter
  • Instagram
Latest Reviews
राष्ट्रवाणी

राष्ट्रवाणी के वैचारिक प्रकल्प है। यहां आपको राष्ट्र हित के ऐसे दृष्टिकोण पर आधारित समाचार, विचार और अभिमत प्राप्त होंगे, जो भारतीयता, हिंदुत्व और पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली, विश्व बंधुत्व और वसुधैव कुटुंबकम के शाश्वत चिंतन को पुष्ट करता है।

संपादक : नीरज दीवान

मोबाइल नंबर : 7024799009

Most Popular

सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति ने जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की

April 30, 202547 Views

निर्मला सीतारमण ने जातिगत गणना का श्रेय लेने पर तमिलनाडु सरकार को घेरा

May 3, 202546 Views

सरकार ने गेहूं का एमएसपी 160 रुपये ब­ढ़ाकर 2,585 रुपये प्रति क्विंटल किया

October 1, 202543 Views
Our Picks

इस्राइल-US का ईरान के नतांज परमाणु स्थल पर हमला; ईरान के रामसर में हमले में परिवार की मौत

March 21, 2026

IPL 2026: आकाशदीप पीठ की चोट के कारण आईपीएल से बाहर

March 21, 2026

महतारी वंदन योजना: आर्थिक संबल से आत्मविश्वास तक, सशक्त हो रही छत्तीसगढ़ की महिलाएं

March 21, 2026
Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • देश
  • विदेश
  • खेल
  • व्यापार
  • मनोरंजन
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
© 2026 Rashtrawani

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.