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Home»Country»असम में सुरक्षा बलों ने सात घुसपैठियों को बांग्लादेश वापस भेजा
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असम में सुरक्षा बलों ने सात घुसपैठियों को बांग्लादेश वापस भेजा

Team RashtrawaniBy Team RashtrawaniJuly 31, 2025No Comments7 Mins Read
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असम में सुरक्षा बलों ने सात घुसपैठियों को बांग्लादेश वापस भेजा
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गुवाहाटी/शिलांग/मुंबई/मुरारई. असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने कहा कि सुरक्षा बलों ने बुधवार को असम के श्रीभूमि जिले से सात बांग्लादेशी घुसपैठियों को पड़ोसी देश में वापस भेज दिया. मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “अवैध घुसपैठियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी है. अवैध घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखते हुए आज तड़के श्रीभूमि से सात बांग्लादेशी नागरिकों को वापस भेज दिया गया.” शर्मा ने चेतावनी देते हुए कहा, “”घुसपैठ की कोशिश न करें, पकड़े जाएंगे और वापस खदेड़ दिए जाएंगे.” सोमवार को असम पुलिस ने श्रीभूमि से 20 अवैध घुसपैठियों को बांग्लादेश वापस भेज दिया था.

शर्मा ने कहा था कि असम “सभी भारतीयों का घर है, न कि उन अवैध विदेशियों का जो राज्य की जनसांख्यिकी को बदलने की कोशिश कर रहे हैं. हम अवैध प्रवासियों को बर्दाश्त नहीं करेंगे”. उन्होंने दावा किया था कि हाल के महीनों में 377 से अधिक कथित घुसपैठियों को वापस भेजा गया है और राज्य सरकार घुसपैठ मुक्त असम के लिए प्रतिबद्ध है.

पिछले वर्ष पड़ोसी देश में अशांति शुरू होने के बाद से सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने पूर्वोत्तर में 1,885 किलोमीटर लंबी भारत-बांग्लादेश सीमा पर अपनी चौकसी बढ़ा दी है. एक अधिकारी ने बताया कि असम पुलिस भारत-बांग्लादेश सीमा पर बेहद चौकस है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी व्यक्ति अवैध रूप से राज्य में प्रवेश न कर सके.

मेघालय: तीन महीने में 116 बांग्लादेशी नागरिक पकड़े गए

मेघालय में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने बुधवार को कहा कि उसने पिछले तीन महीनों के दौरान 116 बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ा है और 6.2 करोड़ रुपये मूल्य के 622 पशु जब्त किये हैं. अधिकारियों के अनुसार, भारत-बांग्लादेश सीमा पर 25 अप्रैल से 25 जुलाई के बीच चलाए गए अभियान के दौरान उनके पास से 1.3 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की तस्करी की अन्य वस्तुएं भी बरामद की गईं.

बीएसएफ ने बताया कि इस अवधि में कुल 150 लोगों को पकड़ा गया, जिनमें 34 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं. जब्त की गई तस्करी की अन्य सामग्री में याबा टैबलेट्स, गांजा, शराब, सौंदर्य प्रसाधन, वस्त्र और बड़ी मात्रा में मोबाइल डिस्प्ले यूनिट्स शामिल हैं जिनकी कुल कीमत 1.3 करोड़ रुपये से अधिक है. बीएसएफ के एक प्रवक्ता ने बताया कि मेघालय पुलिस के साथ समन्वय में अभियान संचालित किए गए.

महाराष्ट्र सरकार अवैध बांग्लादेशी निवासियों को जारी किए गए फर्जी जन्म प्रमाण पत्र रद्द करेगी : मंत्री

महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने बुधवार को कहा कि सरकार राज्य में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों को जारी किए गए फर्जी जन्म प्रमाण पत्र 15 अगस्त तक रद्द कर देगी. बावनकुले ने संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि ऐसे 42,000 मामले सामने आए हैं. हालांकि, वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक है, जिसका पता अधिकारियों द्वारा लगाया जाएगा.

बावनकुले ने कहा, ”15 अगस्त तक, राज्य में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों को दिए गए फर्जी जन्म प्रमाण पत्र रद्द कर दिए जाएंगे.” उन्होंने कहा कि ऐसे प्रमाण पत्रों की प्रतियां राजस्व विभाग और स्वास्थ्य विभाग को भेजनी होंगी. इस वर्ष की शुरुआत में भाजपा नेता किरीट सोमैया ने आरोप लगाया था कि जाली दस्तावेज प्रस्तुत करने वाले बांग्लादेशियों को 3,997 जन्म प्रमाण पत्र जारी किए गए थे, जिसके बाद राज्य सरकार ने पूर्व में मालेगांव में तैनात रहे दो अधिकारियों को निलंबित कर दिया था.

बांग्लादेश निर्वासित बंगाली प्रवासियों के परिवार अनिश्चितता के संकट में
बीरभूम जिले के मुस्लिम बहुल मुरारई विधानसभा क्षेत्र के पैकर गांव की दोरजी पाड़ा बस्ती में 60 वर्षीय भोदू शेख की आंखों में भविष्य को लेकर अनिश्चितता है. भोदू की बेटी सोनाली और पांच वर्षीय नाती साबिर को दामाद दानेश के साथ पिछले महीने दिल्ली पुलिस ने रोहिणी के सेक्टर 26 स्थित बंगाली बस्ती से उठा लिया था और बांग्लादेश भेज दिया था.

दिल्ली पुलिस ने बताया था कि विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (एफआरआरओ) के आदेश के बाद उन्हें निर्वासित किया गया था.
भोदू ने बताया कि यह परिवार लगभग 25 साल से दिल्ली में रह रहा था, जहां दानेश कूड़ा-कचरा बीनने का काम करता था. उन्होंने आरोप लगाया कि बस्ती के सैकड़ों अन्य निवासियों के साथ उन्हें भी इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि वे बांग्ला बोलते थे और उन्हें बांग्लादेशी कहे जाने का सबसे ज़्यादा ख.तरा था.

भोदू ने दावा किया, “मैं इसी गांव में पैदा हुआ था, और मेरी बेटी भी. मेरा नाती दिल्ली में पैदा हुआ.” सोनाली के भाई सूरज शेख ने आरोप लगाया कि उन्होंने एक वकील को 30,000 रुपये दिए थे, जिसने उनकी बहन और उसके परिवार को रिहा करवाने का वादा किया, लेकिन बाद में उन्हें पता चला कि उन्हें बांग्लादेश भेज दिया गया है.

सूरज की पत्नी सीमा ने कहा, “हम ईद-उल-अजहा त्यौहार के लिए घर आए थे, लेकिन अब हम वापस जाने से बहुत डरे हुए हैं.” अपने इस दावे के समर्थन में कि उसकी बहन अब बांग्लादेश में किसी अज्ञात स्थान पर है, सूरज ने एक फेसबुक वीडियो दिखाया, जिसकी प्रामाणिकता की पीटीआई स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सका. इस वीडियो में सोनाली और उसका परिवार तीन अन्य लोगों के साथ हाथ जोड़कर मदद की गुहार लगा रहे हैं.

लगभग एक किलोमीटर दूर, पैकर के फकीरपाड़ा में 30 वर्षीय आमिर खान की भी ऐसी ही कहानी है. आमिर ने आरोप लगाया कि उनकी बहन स्वीटी बीबी और उनके दो बेटों कुर्बान शेख (16) और इमाम दीवान (6) को दिल्ली पुलिस ने सोनाली के पड़ोस से ही हिरासत में लिया और फिर 27 जून को बांग्लादेश भेज दिया.

आमिर ने बताया, “मेरी बहन उस इलाके में घरेलू सहायिका का काम करती थी. वह 12 साल की उम्र से दिल्ली में रह रही थी और जब पुलिस ने छापा मारा तो वह घर पर नहीं थी, इसलिए वे उसके बड़े बेटे को ले गए. जब वह कुर्बान को ढूंढ़ने पुलिस स्टेशन पहुंची, तो उसे भी गिरफ़्तार कर लिया गया. उसने बीरभूम में अपने स्थायी पते के सबूत के तौर पर आधार कार्ड दिखाया, जिसे पुलिस ने खारिज कर दिया.” आमिर ने राज्य स्वास्थ्य विभाग का प्रमाण पत्र दिखाया, जिसमें कहा गया है कि इमाम का जन्म एक जनवरी, 2020 को मुरारई ग्रामीण अस्पताल में हुआ था.

फेसबुक के वीडियो में स्वीटी ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके साथ मारपीट की और बांग्लादेश भेजने से पहले उन पर मेडिकल जांच और बायोमेट्रिक परीक्षण के लिए दबाव डाला. स्वीटी की मां महिदा बीबी ने रूंधे गले से कहा, “लगभग एक महीने से हमारा उनसे कोई संपर्क नहीं हुआ है. हमें कोई अंदाजा नहीं है कि वे कहां हैं और अनजान देश में कैसे रह रहे हैं.” तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और मुरारई के स्थानीय निवासी समीरुल इस्लाम ने कहा, “हम इसके खिलाफ अंत तक लड़ेंगे, राजनीतिक और कानूनी दोनों तरह से.” इस्लाम ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा प्रवासी बंगालियों के बारे में फैलाए गए कथित ‘भाषाई आतंक’ के खिलाफ बोलपुर में अपनी पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी की ‘भाषा आंदोलन’ रैली में उनके साथ मार्च किया.

झारखंड के सीमावर्ती गांव कहिनगर में अताउल शेख (16) और उनके पड़ोसी मरजान (17) ने इस महीने की शुरुआत में ओडिशा सरकार के एक हिरासत शिविर में रखे जाने की अपनी आपबीती सुनाई. मरजान ने दावा किया कि उन्होंने शिविर में लगभग 250 प्रवासी श्रमिकों को बंद देखा जो सभी बांग्ला भाषी थे. मरजान को दो दिन तक हिरासत में रखा गया था. मरजान की भाभी चांदनी बीबी ने पूछा, “क्या सिफ़र् बांग्लादेशी ही बंगाली बोलते हैं? क्या काफ़ी संख्या में भारतीय ये भाषा नहीं बोलते?” उन्होंने कहा, “इस तर्क से तो कोलकाता में हर बंगाली भाषी नागरिक को गिरफ़्तार कर लेना चाहिए. लगता है अब हमें अंग्रेज़ी बोलना सीखना ही होगा.”

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