
इंफाल. मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने कहा है कि ” अप्रवासियों की अनियंत्रित आमद” के कारण राज्य में अभूतपूर्व तरीके से नयी बस्तियां और गांवों बसे हैं, जिनसे मूल निवासियों की पहचान और अस्तित्व को खतरा पैदा हो गया है. मंगलवार शाम राज्यपाल अजय कुमार भल्ला को लिखे पत्र में सिंह ने कहा कि मणिपुर में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ने 2017 से सत्यापन अभियान चलाए हैं, अनिर्दष्टि बस्तियों की पहचान की है, सैकड़ों अवैध अप्रवासियों को हिरासत में लिया है या निर्वासित किया है. उन्होंने कहा, “कैबिनेट उप-समिति का गठन, आधुनिक तकनीक का उपयोग, उपग्रह मानचित्रण और जमीनी स्तर पर खुफिया नेटवर्क ने इन प्रयासों को मजबूत किया है.” सिंह ने कहा कि 2023 में तीन सदस्यीय कैबिनेट उप-समिति के गठन के बाद 5,457 अवैध अप्रवासियों का पता चला है, जिनमें से ज़्यादातर म्यांमा से हैं.
पूर्व मुख्यमंत्री ने पत्र में कहा, “बिना दस्तावेज वाले अप्रवासियों की अनियंत्रित आमद के कारण नयी बस्तियों और गांवों में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है. आदिवासी और वन क्षेत्रों में आरक्षित वन भूमि पर अतिक्रमण हुआ है, और तनाव व अशांति बढी है. ये अवैध अप्रवासी हथियारों से लैस हैं और अफीम/ड्रग्स गिरोह इन्हें पैसा देते हैं.” उन्होंने कहा कि अवैध अप्रवासियों की आमद से शिक्षा, आवास और स्वास्थ्य सेवा समेत सार्वजनिक सेवाओं पर भी दबाव पड़ा है.
उन्होंने कहा, “ऐतिहासिक रूप से, म्यांमा में सैन्य तख्तापलट ने भारतीय क्षेत्र में, विशेष रूप से मणिपुर में, कहीं-कहीं से खुली कुल 398 किलोमीटर की सीमा के जरिये सीमा पार से आवाजाही को बढ़ावा दिया है.” सिंह ने कहा कि म्यांमा और बांग्लादेश से अवैध प्रवासियों की उपस्थिति ने राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अफीम की खेती को बढ़ावा दिया है. उन्होंने कहा कि 2017 और 2023 के बीच, 15,715 एकड़ से अधिक में की गई अवैध अफीम की खेती को नष्ट कर दिया गया है.

