कोलकाता. अभिनेत्री एवं क्रिकेट शो होस्ट मंदिरा बेदी ने कहा कि लोग आमतौर पर शिशुओं को गोद लेते हैं, लेकिन बड़े हो चुके अनाथ बच्चों को भी गोद लेने के लिए लोगों को आगे आना चाहिए. बेदी ने कहा कि लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए इस प्रक्रिया को सरल बनाया जाना चाहिए, जिससे वे बड़े अनाथ बच्चों को गोद ले सकें.
अपने एक खुद के और एक गोद लिए बच्चे की मां बेदी ने कहा, ”हमारे लिए गोद लेना कभी भी अंतिम उपाय नहीं था.” उन्होंने कहा, ”जब मैं और मेरे पति एक दूसरे को डेट कर रहे थे तब भी मैंने उनसे कहा था कि मैं हमेशा से एक अपना खुद का बच्चा और एक बच्चे को गोद लेना चाहती हूं. यह कोई यूं ही सोचा हुआ ख्याल नहीं था-यह एक सपना था जिसे मैंने तब से संजोकर रखा था जब मेरी उम्र 11 से 20 के बीच थी.” बेदी ने “भारत में बच्चों को गोद लेने को सामान्य बनाना और प्रोत्साहित करना” विषय पर आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा, “मातृत्व को खून से परिभाषित नहीं किया जा सकता बल्कि यह इरादे, प्रेम और आजीवन प्रतिबद्धता से परिभाषित होती है.”
लोग अक्सर अनाथ शिशुओं को गोद लेते हैं, लेकिन बेदी ने ऐसी वास्तविकता का जिक्र किया, जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है. बड़े अनाथ बच्चों को गोद नहीं लिया जाता है. उन्होंने कहा, ”बहुत सारे बच्चे छूट जाते हैं. हर कोई चाहता है कि एक बच्चा हो जिसे वो शुरू से ही गोद में रख सके. लेकिन जो बच्चे थोड़े से बड़े होते हैं वे अनदेखे और भुला दिए जाते हैं. उनके बारे में भी सोचो क्योंकि कोई और नहीं सोचता.”

