ढाका. बांग्लादेश के कुमिल्ला जिले में तीन दिन पहले अल्पसंख्यक समुदाय की एक महिला से कथित तौर पर हुए बलात्कार की घटना का वीडियो वायरल होने के बाद रविवार को पूरे देश में आक्रोश उत्पन्न हो गया. पुलिस ने बताया कि घटना के मुख्य संदिग्ध को कई अन्य लोगों के साथ गिरफ्तार कर लिया गया है.

कुमिल्ला जिले के पुलिस प्रमुख नजीर अहमद खान ने कहा कि मुख्य आरोपी को ढाका के सईदाबाद इलाके में तड़के छापेमारी करके गिरफ्तार कर लिया गया तथा चार अन्य को सोशल मीडिया पर महिला की तस्वीर व पहचान उजागर करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया. ढाका विश्वविद्यालय के छात्रों ने घटना की निंदा करते हुए परिसर में मार्च निकाला, जबकि अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों के लिए सर्मिपत जगन्नाथ हॉल छात्रावास में रहने वाले विद्यार्थी ने न्याय की मांग करते हुए जुलूस निकाला.

पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने दोषियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की मांग की.  इस बीच, उच्च न्यायालय ने एक निर्देश जारी कर अधिकारियों से शनिवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो को तुरंत हटाने को कहा. दो न्यायाधीशों की पीठ ने संबंधित अधिकारियों से पीड़िता की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उसे आवश्यक उपचार प्रदान करने को भी कहा. मीडिया में आई कुछ खबरों में कहा गया है कि वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई की.

इनमें से एक खबर के अनुसार, पड़ोस के लोगों ने शुरुआत में सामूहिक पिटाई के बाद आरोपी को छोड़ दिया और उसे पुलिस को सौंपने के बजाय अस्पताल ले गए. संदिग्ध व्यक्ति अस्पताल से कथित तौर पर भाग गया था. मीडिया में आई खबरों के अनुसार, महिला कुमिल्ला के मुरादनगर उप-जिले में स्थित अपने मायके जा रही थी, जहां आरोपी रात में जबरन उसके घर में घुसे थे.

अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के बेटे एवं अपनी मां के सलाहकार के रूप में काम कर चुके साजिब अहमद वाजिद ने इस घटना पर अपना आक्रोश व्यक्त करने के लिए ‘एक्स’ का सहारा लिया. उन्होंने पिछले 11 महीनों में भीड़ द्वारा किये गए हमलों, आतंकवाद और बलात्कार की घटनाओं में वृद्धि के लिए यूनुस प्रशासन को दोषी करार दिया.

पिछले साल अगस्त में हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग सरकार को हटाये जाने के बाद बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों के सदस्यों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं हुई थीं. पिछले साल पांच अगस्त को हसीना को प्रधानमंत्री पद से अपदस्थ कर दिये जाने के बाद वह भारत भाग गई थीं. यह घटना ‘स्टूडेंट्स अगेंस्ट डि्क्रिरमिनेशन’ नामक मंच के नेतृत्व में हुए हिंसक आंदोलन के परिणामस्वरूप हुई थी. नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस(85) ने इसके तीन दिन बाद अंतरिम सरकार की कमान संभाली थी.

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