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Home»Country»बानू मुश्ताक से दशहरा का उद्घाटन कराने का फैसला सही, लोगों ने इसे स्वीकार किया: सिद्धरमैया
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बानू मुश्ताक से दशहरा का उद्घाटन कराने का फैसला सही, लोगों ने इसे स्वीकार किया: सिद्धरमैया

Team RashtrawaniBy Team RashtrawaniSeptember 22, 2025No Comments5 Mins Read
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बानू मुश्ताक से दशहरा का उद्घाटन कराने का फैसला सही, लोगों ने इसे स्वीकार किया: सिद्धरमैया
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मैसुरु. कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार विजेता लेखिका बानू मुश्ताक को मैसुरु दशहरा के उद्घाटन के लिए आमंत्रित करने के अपनी सरकार के फैसले का पुरजोर बचाव किया और कहा कि राज्य के बहुसंख्य लोगों ने इसे स्वीकार कर लिया है और इससे राज्य को प्रतिष्ठा मिली है. सिद्धरमैया ने कहा कि दशहरा किसी एक धर्म या जाति का त्योहार नहीं है, यह सभी का त्योहार है. यह “नाडा हब्बा” (राज्य उत्सव) है, लोगों का त्योहार है.

महलों के इस शहर में प्रसिद्ध 11 दिवसीय दशहरा समारोह सोमवार को धार्मिक और पारंपरिक उत्साह के साथ शुरू हुआ, जिसका उद्घाटन मुश्ताक ने किया. उद्घाटन समारोह विवादों के बीच हुआ, क्योंकि कुछ वर्गों ने मुश्ताक को आमंत्रित करने के सरकार के फैसले पर आपत्ति जताई थी.

सिद्धरमैया ने कहा, ”बानू मुश्ताक जन्म से भले ही एक मुस्लिम महिला हों, लेकिन वह पहले एक इंसान हैं. इंसानों को एक-दूसरे से प्यार और सम्मान करना चाहिए और जाति-धर्म के आधार पर नफरत नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह मानवता का गुण नहीं है.” मैसुरु दशहरा के उद्घाटन के बाद उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ”अगर हम मानवता को स्वीकार करते हैं, तो हमें नाडा हब्बा के उत्सव में भाग लेने वाले किसी भी जाति, धर्म या वर्ग के लोगों को स्वीकार करना चाहिए. इस राज्य के अधिकांश लोगों ने बानू मुश्ताक द्वारा दशहरा का उद्घाटन स्वीकार कर लिया है.” उन्होंने कहा, “इस वर्ष बानू मुश्ताक द्वारा दशहरा का उद्घाटन करना एक सही निर्णय है और इससे कर्नाटक को प्रतिष्ठा मिली है. इसलिए मैं जनता और सरकार की ओर से मुश्ताक को बधाई देता हूं.”

मुख्यमंत्री ने कहा कि उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय ने उन लोगों को उचित सबक सिखाया, जिन्होंने दशहरा के उद्घाटन के लिए मुश्ताक को सरकार द्वारा आमंत्रित किए जाने का विरोध किया था. उन्होंने कहा कि अदालतों ने उनसे संविधान की प्रस्तावना पढ़ने को कहा है.

उन्होंने कहा, ”सभी को यह समझना चाहिए कि हमारा संविधान धर्मनिरपेक्ष है. हम एक ऐसा समाज हैं, जहां विविधता में एकता है, चाहे हमारा धर्म और जाति कुछ भी हो, हम सभी भारतीय हैं. जो लोग संविधान का विरोध करते हैं, वे इसे विकृत करने की कोशिश करते हैं, ऐसे लोग स्वार्थी हैं.” मुश्ताक के उद्घाटन भाषण की सराहना करते हुए सिद्धरमैया ने कहा कि वह खुद भी बुकर पुरस्कार विजेता लेखिका की तरह नहीं बोल सकते.

उन्होंने कहा, ”एक कवि, लेखिका और उद्घाटनकर्ता होने के नाते, उन्होंने इस परिस्थिति में सटीक और सार्थक ढंग से बात की. मुझे उम्मीद है कि सभी ने उनका संदेश समझ लिया होगा. शायद उन्होंने उनलोगों की भी आंखें खोल दी हैं, जो उनका विरोध करते थे, यहां तक कि जो लोग उनका विरोध करते थे, वे भी अंदर से खुश हैं.” उन्होंने एक किसान संगठन का हिस्सा होने, एक कार्यकर्ता, कन्नड़ लेखिका और कवि के रूप में मुश्ताक के काम की सराहना की.

सरकार द्वारा उन्हें आमंत्रित करने के फैसले का विरोध इस आरोप से उपजा है कि मुश्ताक ने अतीत में ऐसे बयान दिए हैं जिन्हें कुछ लोग “हिंदू विरोधी” और “कन्नड़ विरोधी” मानते हैं. आलोचकों की दलील है कि पारंपरिक रूप से वैदिक अनुष्ठानों और देवी चामुंडेश्वरी को पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ शुरू होने वाले इस उत्सव के लिए उनका चयन धार्मिक भावनाओं और इस आयोजन से जुड़ी लंबे समय से चली आ रही परंपराओं का अनादर करता है.

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेताओं और अन्य लोगों ने राज्य सरकार द्वारा मुश्ताक को दशहरा उत्सव के उद्घाटन के लिए आमंत्रित करने के फैसले पर आपत्ति जतायी थी. यह आपत्ति एक पुराने वीडियो के वायरल होने के बाद जताई गई थी, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कन्नड़ भाषा की देवी भुवनेश्वरी के रूप में पूजा करने पर आपत्ति जताई है और कहा है कि यह उनके (अल्पसंख्यकों) जैसे लोगों के लिए अपवाद है.

भाजपा के कई नेताओं ने मुश्ताक से दशहरा के उद्घाटन के लिए सहमति देने से पहले देवी चामुंडेश्वरी के प्रति अपनी श्रद्धा स्पष्ट करने को कहा था. हालांकि, मुश्ताक ने कहा है कि उनके पुराने भाषण के कुछ चुनिंदा अंशों को सोशल मीडिया पर पोस्ट करके उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है.

यह उल्लेख करते हुए कि दशहरा उत्सव की शुरुआत विजयनगर साम्राज्य के राजाओं ने की थी और उसके पतन के बाद, राजा वाडियार प्रथम के नेतृत्व में मैसूरु के राजाओं ने 1610 में इसे मनाना शुरू किया, मुख्यमंत्री ने कहा कि हैदर अली और टीपू सुल्तान ने भी मैसूरु पर अपने शासन के दौरान श्रीरंगपट्टनम में दशहरा मनाया था.

उन्होंने कहा, ”लोगों को इतिहास जानना चाहिए. इतिहास को तोड़-मरोड़कर, स्वार्थ और राजनीति के लिए काम करना एक अक्षम्य अपराध है. चाहे कोई भी हो, ऐसे मामलों में किसी को भी राजनीति नहीं करनी चाहिए. अगर राजनीति करनी है, तो चुनाव के दौरान करो. बेवजह नफरत या किसी को खुश करने के लिए राजनीति नहीं करनी चाहिए.” इस साल दशहरा उत्सव ग्यारह दिनों का भव्य आयोजन होगा. सिद्धरमैया ने कहा कि इस साल अच्छी बारिश हुई है, बांध भरे हुए हैं और राज्य के लोग खुश हैं. उन्होंने अपनी सरकार की पांच गारंटी योजनाओं की सफलता का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा, ”कर्नाटक सरकार धर्मनिरपेक्षता और सभी के लिए समान अधिकारों और अवसरों में विश्वास करती है.”

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