मंगलुरु: कर्नाटक के मंगलुरु जिले की एक विशेष अदालत ने 12 वर्ष पुराने एक बच्ची की तस्करी के मामले में पति-पत्नी समेत तीन आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय (द्वितीय) ने तीन जुलाई को पजीर निवासी लिनेटा वेगस (38), पति जॉसी वेगस (58) और उसकी मां लूसी वेगस (65) को सजा सुनाई तथा सभी पर 5,000-5,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया।

अदालत ने जुर्माना नहीं भरने पर दोषियों को छह महीने की अतिरिक्त कैद का भी आदेश दिया। अधिकारियों ने बताया कि क्षेत्र में बच्चों के तस्करों के सक्रिय होने की सूचना मिली थी, जिस पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने ‘चाइल्डलाइन’ के साथ मिलकर अपराधियों को पकड़ने के लिए एक जाल बिछाया।

उन्होंने बताया कि सामाजिक कार्यकर्ता विद्या दिनकर ने पुलिस के साथ मिलकर बच्चे को ‘खरीदने’ का नाटक किया और दोनों उस क्लिनिक में गये, जहां आरोपी बच्चे को बेचने के लिए आये थे। विशेष लोक अभियोजक ज्योति प्रमोद नायक ने बताया कि 26 जुलाई, 2013 को शाम करीब साढ़े छह बजे आरोपियों ने बच्ची को बेचने के लिए दो लाख रुपये मांगे थे।

उन्होंने बताया कि पुलिस टीम ने 90,000 रुपये का अग्रिम भुगतान कर बाकी रकम अगले दिन देने का वादा किया और आरोपियों को धर दबोचा। ‘चाइल्डलाइन’ की कर्मचारी अशुंथा डिसूजा की शिकायत पर तत्कालीन भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 370(4) और 34 के तहत मामला दर्ज किया गया था। ज्योति प्रमोद नायक ने बताया कि मुकदमे के दौरान यह पता चला कि बच्ची की मां रंगव्वा की मुकदमे के दौरान ही मृत्यु हो गयी थी।

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