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Home»Blog»भारत-पाक सैन्य संघर्ष हमेशा पारंपरिक दायरे में रहा: मिसरी ने संसदीय समिति से कहा
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भारत-पाक सैन्य संघर्ष हमेशा पारंपरिक दायरे में रहा: मिसरी ने संसदीय समिति से कहा

atulpradhanBy atulpradhanMay 20, 2025No Comments6 Mins Read
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भारत-पाक सैन्य संघर्ष हमेशा पारंपरिक दायरे में रहा: मिसरी ने संसदीय समिति से कहा
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नयी दिल्ली. विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने सोमवार को एक संसदीय समिति को बताया कि भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य संघर्ष हमेशा पारंपरिक दायरे में रहा तथा पड़ोसी देश की ओर से परमाणु (खतरे) का कोई संकेत नहीं दिखा. सूत्रों ने यह जानकारी दी.
सूत्रों ने कहा कि मिसरी ने सरकार के इस रुख को दोहराया कि सैन्य कार्रवाई रोकने पर द्विपक्षीय स्तर पर सहमति बनी थी.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों देशों के बीच संघर्ष को रोकने में अपने प्रशासन की भूमिका होने का दावा किया था. समिति की बैठक में कुछ विपक्षी सदस्यों ने ट्रंप के इस दावे को लेकर भी सवाल उठाया. विदेश मंत्रालय ने कांग्रेस सांसद शशि थरूर की अध्यक्षता वाली विदेश मामलों की स्थायी समिति के समक्ष एक प्रस्तुति में कहा कि पहलगाम आतंकी हमले की प्रारंभिक जांच में आतंकवादियों के पाकिस्तान में बैठे उनके आकाओं के साथ ‘संपर्क सूत्र’ का पता चला है.

मंत्रालय ने कहा कि आतंकवाद के पनाहगाह के रूप में पाकिस्तान का ‘ट्रैक रिकॉर्ड’ अच्छी तरह से स्थापित है, जो ठोस तथ्यों और सबूतों पर आधारित है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान अपनी धरती पर कुछ व्यक्तियों की हत्याओं के लिए भारत को दोषी ठहराता है, जबकि उसके आरोपों में कोई तथ्य या सबूत नहीं है. मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान का उद्देश्य दोनों देशों के बीच गलत तुलना करना है.

विदेश मंत्रालय ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकवादी पाकिस्तान में खुलेआम घूमते हैं और भारत के खिलाफ हिंसा भड़काते रहते हैं. सूत्रों ने बताया कि कुछ सांसदों ने पूछा कि क्या पाकिस्तान ने सैन्य संघर्ष में चीनी उपकरणों का इस्तेमाल किया था. मिसरी ने कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि भारत ने पाकिस्तानी हवाई ठिकानों को तबाह कर दिया.

भारत और पाकिस्तान द्वारा शत्रुता समाप्त करने का निर्णय लिए जाने के बाद वाहवाही लूटने के इरादे से ट्रंप द्वारा किए गए कई सोशल मीडिया पोस्ट के बारे में जब विपक्ष के एक सदस्य ने पूछा, तो विदेश सचिव ने चुटकी लेते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने ऐसा करने के लिए उनकी अनुमति नहीं ली थी.

विदेश मंत्रालय ने अपनी प्रस्तुति में कहा कि किसी अन्य देश को जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर टिप्पणी करने का ‘कोई अधिकार नहीं है’, जो भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता के लिए अमेरिका के सुझाव का स्पष्ट खंडन है. अमेरिकी नेता ने यहां तक ??दावा किया था कि उनके देश ने संभावित परमाणु युद्ध को रोक दिया है, जिससे लाखों लोग मारे जा सकते थे.

कई सदस्यों (जिनमें से अधिकतर विपक्ष से थे) ने पहलगाम आतंकी हमले, भारत के खिलाफ तुर्किये और अजरबैजान के शत्रुतापूर्ण रुख, आईएमएफ से ऋण प्राप्त करने में पाकिस्तान को मिली सफलता और सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने कई अन्य मुद्दों से जुड़े सवाल उठाए.

विपक्ष के एक सदस्य ने पूछा कि भारत सरकार ट्रंप के दावे का खंडन करने के लिए मजबूती से सामने क्यों नहीं आई. हालांकि, विदेश मंत्रालय ने अपनी पिछली प्रेस वार्ता में यह स्पष्ट कर दिया था कि भारत और पाकिस्तान द्विपक्षीय स्तर पर गोलीबारी बंद करने पर सहमत हुए थे. इस बात को मिसरी ने दोहराया और कहा कि पड़ोसी देश के अनुरोध पर सैन्य अभियान महानिदेशक (डीजीएमओ) स्तर की वार्ता में यह निर्णय लिया गया था.

सदस्यों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए मिसरी ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष हमेशा पारंपरिक दायरे में रहा और पड़ोसी देश की ओर से किसी परमाणु (खतरे) का संकेत नहीं दिखा. थरूर ने तीन घंटे की बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा कि बैठक में रिकॉर्ड 24 सदस्यों ने भाग लिया. उन्होंने कहा कि समिति ने सर्वसम्मति से मिसरी के साथ एकजुटता व्यक्त की, क्योंकि दोनों पक्षों द्वारा सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति जताए जाने के बाद उन पर ऑनलाइन माध्यम से ”अनुचित हमले” किए गए थे.

मिसरी और उनके परिवार को सोशल मीडिया मंच पर कटु आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था, इसलिए समिति ने राष्ट्र के प्रति अच्छी सेवा के लिए उनका समर्थन व्यक्त किया. समिति एक औपचारिक प्रस्ताव पारित करना चाहती थी, लेकिन भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी ने ऐसा नहीं करने का अनुरोध किया. सूत्रों ने कहा कि आईएमएफ से ऋण प्राप्त करने में पाकिस्तान के सफल होने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि भारत इसका विरोध करता है, लेकिन विभिन्न देश अपने हितों से निर्देशित होते हैं.

भारत के खिलाफ तुर्किये के प्रतिकूल रुख के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि यह देश पारंपरिक रूप से भारत का समर्थक नहीं रहा है और उन्होंने कहा कि पड़ोसी देश की लगातार शत्रुतापूर्ण नीति के कारण उन्हें भारत-पाक संबंधों में सुधार की कोई संभावना नहीं दिखती.

मंत्रालय ने अपनी प्रस्तुति में कहा कि पिछले वर्ष अकेले भारत में पाकिस्तान आधारित आतंकवादी संगठनों से जुड़े कम से कम 24 आतंकवादी हमले हुए, जिनमें 24 सुरक्षार्किमयों और 30 नागरिकों की मौत हो गई. मिसरी ने विपक्ष की ओर से की जा रही विदेश मंत्री एस जयशंकर की आलोचना को भी खारिज किया, जिसमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जयशंकर की एक टिप्पणी का हवाला देते हुए दावा किया था कि पाकिस्तान को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बारे में पहले ही जानकारी दे दी गई थी. उन्होंने पूछा था कि इसके कारण भारत ने अपने कितने विमान खो दिए.

उन्होंने कहा कि मंत्री को गलत संदर्भ में उद्धृत किया जा रहा है. मिसरी ने कहा कि छह मई की देर रात आतंकी ठिकानों पर हमलों के बाद ही डीजीएमओ स्तर पर पाकिस्तान से संपर्क किया गया था. कांग्रेस सांसद शशि थरूर की अध्यक्षता में विदेश मामलों पर संसद की स्थायी समिति की बैठक में तृणमूल कांग्रेस के अभिषेक बनर्जी, कांग्रेस के राजीव शुक्ला और दीपेंद्र हुड्डा, एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की अपराजिता सारंगी एवं अरुण गोविल आदि ने भाग लिया.

यह बैठक भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा पहलगाम हमले का बदला लेने के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किए जाने और उसके बाद दोनों देशों के बीच हुए सैन्य संघर्ष की पृष्ठभूमि में हुई. भारत और पाकिस्तान 10 मई को सैन्य कार्रवाई रोकने के लिए सहमत हुए थे.

संसदीय समिति ने विदेश सचिव विक्रम मिसरी को सोशल मीडिया पर ‘ट्रोल’ किए जाने की निंदा की

विदेश मामलों पर संसद की स्थायी समिति ने विदेश सचिव विक्रम मिसरी को सोशल मीडिया पर ‘ट्रोल’ किए जाने की एक सुर में निंदा की तथा उनके पेशेवर आचरण की प्रशंसा की. सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी. मिसरी पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान सैन्य संघर्ष के बारे में संसदीय समिति को जानकारी दे रहे थे.

भारत और पाकिस्तान के बीच 10 मई को सैन्य कार्रवाई रोकने पर बनी सहमति के बाद विदेश सचिव को सोशल मीडिया पर ‘ट्रोलिंग’ का सामना करना पड़ा. हालांकि राजनीतिक नेताओं, पूर्व नौकरशाहों और सेना के सेवानिवृत्त अधिकारियों ने मिसरी का समर्थन किया.
कांग्रेस सांसद शशि थरूर विदेश मामलों पर संसद की स्थायी समिति के अध्यक्ष हैं. समिति की बैठक में तृणमूल कांग्रेस के अभिषेक बनर्जी, कांग्रेस के राजीव शुक्ला और दीपेंद्र हुड्डा, एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और भाजपा के अरुण गोविल और अपराजिता सारंगी सहित कई सदस्यों ने भाग लिया. यह बैठक पहलगाम हमले का बदला लेने के लिए भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और उसके बाद दोनों देशों के बीच सैन्य संघर्ष की पृष्ठभूमि में हुयी.

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