न्यूयॉर्क/वाशिंगटन/इस्लामाबाद. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत और रूस के करीबी संबंधों को लेकर उन पर तीखा प्रहार किया और कहा कि दोनों देश अपनी ”मृत अर्थव्यवस्थाओं को एक साथ गर्त में” ले जा सकते हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति ने नयी दिल्ली और मॉस्को की आलोचना करते हुए यह टिप्पणी तब की है जब कुछ घंटों पहले उन्होंने भारत के खिलाफ 25 प्रतिशत शुल्क लगाने और रूस के साथ उसके व्यापार के लिए ”जुर्माना” लगाने की घोषणा की.
उन्होंने कहा, ”मुझे परवाह नहीं है कि भारत, रूस के साथ क्या करता है. वे एक साथ अपनी मृत अर्थव्यवस्थाओं को गर्त में ले जा सकते हैं, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता है.” अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, ”हमने भारत के साथ बहुत कम व्यापार किया है, उनके शुल्क बहुत अधिक हैं.” ट्रंप ने एक अगस्त से भारत पर 25 प्रतिशत से अधिक शुल्क लगाने की बुधवार को घोषणा की थी. उन्होंने रूस से कच्चा तेल और सैन्य उपकरण खरीदने के लिए भी भारत पर जुर्माना लगाने की घोषणा की.
यह आश्चर्यजनक घोषणा ऐसे समय में की गई है जब इससे एक दिन पहले ही भारतीय अधिकारियों ने कहा था कि एक अमेरिकी व्यापार दल व्यापार समझौते पर बातचीत करने के लिए 25 अगस्त से भारत का दौरा करेगा. इस घोषणा को भारत पर अमेरिका की मांगों को मानने के लिए दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जिसने हाल ही में जापान, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ (ईयू) जैसे प्रमुख साझेदारों के साथ अनुकूल व्यापार समझौते किए हैं. ट्रंप ने भारत की व्यापार नीतियों को ‘सबसे कठिन और अप्रिय’ बताया है.
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, “सब कुछ ठीक नहीं है! इसलिए भारत को एक अगस्त से 25 प्रतिशत शुल्क और रूस से खरीद को लेकर ‘जुर्माना’ भी देना होगा.” यह जुर्माना इसलिए लगाया गया क्योंकि भारत ने रूस से तेल और सैन्य उपकरणों की बड़ी खरीद की है. भारत रूसी आयात के लिए जुर्माने का सामना करने वाला पहला देश है. रूस से भारत का कच्चा तेल आयात रूस-यूक्रेन युद्ध से पहले कुल खरीद का 0.2 प्रतिशत था, जो अब बढ़कर 35-40 प्रतिशत हो गया है. चीन के बाद, रूसी तेल का सबसे बड़ा खरीदार भारत है.
उन्होंने कहा कि हालांकि, भारत हमारा मित्र है, ”लेकिन हमने पिछले कई वर्षों में उनके साथ अपेक्षाकृत कम व्यापार किया है, क्योंकि उनके शुल्क बहुत अधिक हैं, जो दुनिया में ‘सबसे अधिक’ हैं. उनके पास सबसे कठोर और अप्रिय गैर-मौद्रिक व्यापार बाधाएं हैं.” उन्होंने कहा कि इसके अलावा, भारत ने रूस से अपने सैन्य उपकरण और ऊर्जा उत्पाद तब खरीदे हैं जब हर कोई चाहता है कि रूस, यूक्रेन में ”हत्याएं” बंद करे.
ट्रंप ने ‘विशाल तेल भंडार’ विकसित करने के लिए पाकिस्तान के साथ व्यापार समझौते की घोषणा की
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के साथ एक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने की घोषणा की है और कहा है कि अमेरिका “विशाल तेल भंडार” विकसित करने के लिए पाकिस्तान के साथ काम करेगा. हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि ट्रंप पाकिस्तान में किस विशाल तेल भंडार की बात कर रहे थे. अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर यह भी सवाल उठाया कि क्या पाकिस्तान “कभी” भारत को तेल बेच सकता है.
ट्रंप ने बुधवार को ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट में कहा, “हमने अभी-अभी पाकिस्तान के साथ एक समझौता किया है, जिसके तहत अमेरिका पाकिस्तान के विशाल तेल भंडार को विकसित करने के लिए मिलकर काम करेगा.” उन्होंने कहा, “हम उस तेल कंपनी को चुनने की प्रक्रिया शुरू कर चुके हैं जो इस साझेदारी का नेतृत्व करेगी. कौन जानता है, शायद वे किसी दिन भारत को तेल बेचेंगे!” पाकिस्तान लंबे समय से अपने अपतटीय क्षेत्र पर बड़े तेल भंडार होने का दावा करता रहा है, लेकिन इन भंडारों का दोहन करने में कोई प्रगति नहीं हुई है. वह इन भंडारों का दोहन करने के लिए निवेश आर्किषत करने की कोशिश कर रहा है. देश फिलहाल अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पश्चिम एशिया से तेल आयात करता है.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ. ने बृहस्पतिवार को सोशल मीडिया पर ट्रंप को इस “ऐतिहासिक” व्यापार समझौते के लिए धन्यवाद दिया और उम्मीद जताई कि इससे दोनों पक्षों के बीच सहयोग बढ़ेगा. उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा, “मैं राष्ट्रपति ट्रंप डोनाल्ड ट्रंप को ऐतिहासिक अमेरिका-पाकिस्तान व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में नेतृत्वकारी भूमिका के लिए हार्दिक धन्यवाद देना चाहता हूं, जिसे कल रात वाशिंगटन में दोनों पक्षों ने सफलतापूर्वक संपन्न किया.” उन्होंने कहा, “यह ऐतिहासिक समझौता हमारे बढ़ते सहयोग को और मज़बूत करेगा.” रेडियो पाकिस्तान की खबर में कहा गया है कि यह समझौता पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब, अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि राजदूत जैमीसन ग्रीर के बीच वाशिंगटन डीसी में हुई एक बैठक के दौरान हुआ.
खबर के मुताबिक, “इस समझौते के परिणामस्वरूप, विशेष रूप से अमेरिका को किए जाने वाले पाकिस्तानी निर्यात पर पारस्परिक शुल्क में कमी आएगी. यह समझौता विशेष रूप से ऊर्जा, खनन और खनिज, आईटी, क्रिप्टोकरेंसी और अन्य क्षेत्रों में आर्थिक सहयोग के एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक है.” इससे कुछ घंटे पहले ट्रंप ने भारत से आने वाले सभी सामान पर 25 प्रतिशत शुल्क लगाने तथा रूसी सैन्य उपकरणों व ईंधन की खरीद को लेकर भारत पर अतिरिक्त जुर्माना लगाने की घोषणा की थी. सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में ट्रंप ने भारत की व्यापार नीतियों को “अत्यंत कठोर व फिजूल” बताया.
ट्रंप ने कहा, “सब कुछ ठीक नहीं है! इसलिए भारत को एक अगस्त से 25 प्रतिशत शुल्क और उपरोक्त के लिए जुर्माना देना होगा.” इससे पहले दिन में उन्होंने कई बार भारत द्वारा लगाए गए शुल्क के बारे में बात की और ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) समूह में भारत की सदस्यता का उल्लेख किया. उन्होंने ब्रिक्स को “अमेरिका विरोधी” बताया. भारत के साथ बातचीत को लेकर एक सवाल के जवाब में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका भारत से बात कर रहा है.
उन्होंने कहा, “…देखते हैं, हम अभी भारत के साथ बातचीत कर रहे हैं.” उन्होंने भारत के शुल्क को “दुनिया के सबसे ज़्यादा शुल्क में से एक” बताया. वहीं भारत ने कहा कि उसने द्विपक्षीय व्यापार को लेकर ट्रंप के बयान पर “ध्यान दिया” है और सरकार इसके प्रभावों का अध्ययन कर रही है. एक बयान में कहा गया, “भारत और अमेरिका पिछले कुछ महीनों से एक निष्पक्ष, संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं. हम इसके लिए प्रतिबद्ध हैं.” ट्रंप ने शुल्क लागू करने की तारीख एक अगस्त तय की है.
शरीफ ने व्यापार समझौते को बताया ”ऐतिहासिक”, ट्रंप का शुक्रिया अदा किया
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते को बृहस्पतिवार को ”ऐतिहासिक” बताते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का शुक्रिया अदा किया और इससे दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ने की उम्मीद जाहिर की. ट्रंप ने बुधवार को घोषणा की कि अमेरिका ने पाकिस्तान के साथ एक समझौता किया है, जिसके तहत वे दक्षिण एशियाई देश के ” विशाल तेल भंडार” को विकसित करने के लिए मिलकर काम करेंगे.
प्रधानमंत्री शरीफ ने सोशल मीडिया पर लिखा, ” मैं ऐतिहासिक अमेरिका-पाकिस्तान व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में नेतृत्वकारी भूमिका के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं. इसे (समझौते को) कल रात वॉशिंगटन में दोनों पक्षों द्वारा सफलतापूर्वक संपन्न किया गया.” उन्होंने कहा, ” यह ऐतिहासिक समझौता हमारे बढ़ते सहयोग को और मजबूत करेगा ताकि आने वाले दिनों में हमारी स्थायी साझेदारी की सीमाओं का विस्तार हो सके.”

