Close Menu
Rashtrawani
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • देश
  • विदेश
  • खेल
  • व्यापार
  • मनोरंजन
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
प्रमुख राष्ट्रवाणी

फिल्म ‘बॉर्डर 2’ ने देश में टिकट खिड़की पर 250 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की

January 28, 2026

खेलों में देश की तैयारियों का परिणाम है 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी मिलना: मुर्मू

January 28, 2026

भारत-ईयू ने एफटीए वार्ता पूरी की, परिधान, रसायनों के लिए शून्य शुल्क; कार, वाइन के लिए रियायती पहुंच

January 27, 2026
Facebook X (Twitter) Instagram
  • Terms
  • About Us – राष्ट्रवाणी | Rashtrawani
  • Contact
Facebook X (Twitter) Instagram
RashtrawaniRashtrawani
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • देश
  • विदेश
  • खेल
  • व्यापार
  • मनोरंजन
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
Subscribe
Rashtrawani
Home»Chhattisgarh»भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रसिद्ध साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल का निधन
Chhattisgarh

भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रसिद्ध साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल का निधन

Team RashtrawaniBy Team RashtrawaniDecember 23, 2025No Comments8 Mins Read
Share Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Reddit Telegram Email
भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रसिद्ध साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल का निधन
Share
Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

रायपुर. भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रसिद्ध साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल का मंगलवार शाम यहां निधन हो गया.
वह 89 वर्ष के थे. उनके पुत्र शाश्वत शुक्ल ने यह जानकारी दी. शाश्वत शुक्ल ने पीटीआई-भाषा को बताया कि सांस लेने में तकलीफ होने के बाद शुक्ल को इस महीने की दो तारीख को रायपुर के अखिल भारतीय आयुर्वज्ञिान संस्थान (एम्स) में भर्ती कराया गया था. आज शाम 4.48 बजे में उन्होंने अंतिम सांस ली. शुक्ल के परिवार में उनकी पत्नी, बेटा शाश्वत और एक बेटी है.

शाश्वत ने बताया कि शुक्ल के पार्थिव शरीर को पहले उनके निवास स्थान ले जाया जाएगा. उनके अंतिम संस्कार के संबंध में जल्द ही जानकारी दी जाएगी. शाश्वत शुक्ल ने बताया कि अक्टूबर माह में सांस लेने में हो रही तकलीफ के बाद शुक्ल को रायपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. तबीयत में सुधार होने के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी तब से वह घर पर ही इलाज करा रहे थे.

एक नवंबर को जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने छत्तीसगढ़ का दौरा किया था तब उन्होंने शुक्ल और उनके के परिवार से बात की थी तथा उनके स्वास्थ्य और कुशलक्षेम के बारे में जानकारी ली थी. शाश्वत ने बताया कि दो दिसंबर को अचानक तबीयत अधिक बिगड़ने के बाद उन्हें रायपुर एम्स ले जाया गया जहां उनका इलाज किया जा रहा था.

‘नौकर की कमीज’, ‘खिलेगा तो देखेंगे’, ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ और ‘एक चुप्पी जगह’ जैसे उपन्यासों के रचयिता विनोद कुमार शुक्ल को 59 वें ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. 21 नवंबर को शुक्ल को उनके रायपुर स्थित निवास पर आयोजित एक समारोह में ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया.

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में एक जनवरी 1937 को जन्मे विनोद कुमार शुक्ल हिंदी साहित्य के ऐसे रचनाकार थे जो बहुत धीमे बोलते थे, लेकिन साहित्य की दुनिया में उनकी आवाज बहुत दूर तक सुनाई देती थी. उन्होंने मध्यमवर्गीय, साधारण और लगभग अनदेखे रह जाने वाले जीवन को शब्द देते हुए हिंदी में एक बिल्कुल अलग तरह की संवेदनशील और जादुई दुनिया रची है.

उनका पहला कविता संग्रह ‘लगभग जय हिन्द’ 1971 में आया और वहीं से उनकी विशिष्ट भाषिक बनावट, चुप्पी और भीतर तक उतरती कोमल संवेदनाएं हिंदी कविता में दर्ज होने लगीं. उनके उपन्यास ‘नौकर की कमीज.’ (1979) ने हिंदी कथा-साहित्य में एक नया मोड़ दिया, जिस पर मणि कौल ने फिल्म भी बनाई है. शुक्ल को साहित्य अकादमी पुरस्कार, गजानन माधव मुक्तिबोध फेलोशिप, रज.ा पुरस्कार, शिखर सम्मान, राष्ट्रीय मैथिलीशरण गुप्त सम्मान, दयावती मोदी कवि शेखर सम्मान, हिंदी गौरव सम्मान और 2023 में पैन-नाबोकोव जैसे पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया था.

मुख्यमंत्री साय ने साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल के निधन पर व्यक्त की गहरी शोक-संवेदन
छत्तीसगढ़ के गौरव, वरिष्ठ एवं विख्यात साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल के निधन पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गहरा शोक व्यक्त किया है. मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विनोद कुमार शुक्ल का निधन हिंदी साहित्य और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना के लिए अपूरणीय क्षति है. मुख्यमंत्री ने कहा कि नौकर की कमीज और दीवार में एक खिड़की रहती थी जैसी कालजयी कृतियों के माध्यम से विनोद कुमार शुक्ल ने साधारण जीवन को असाधारण गरिमा प्रदान की. उनकी लेखनी में मानवीय संवेदना, सादगी और जीवन की सूक्ष्म अनुभूतियाँ अत्यंत सहजता से अभिव्यक्त होती थीं, जिसने पाठकों की अनेक पीढ़ियों को गहराई से प्रभावित किया.

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विनोद कुमार शुक्ल की रचनाएँ केवल साहित्य नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों और जीवन-दर्शन की सजीव अभिव्यक्ति हैं. उनकी संवेदनशील दृष्टि और मौलिक भाषा-शैली सदैव पाठकों को प्रेरणा देती रहेंगी और हिंदी साहित्य में उनका योगदान अमिट रहेगा. मुख्यमंत्री साय ने ईश्वर से प्रार्थना की कि वे इस दुःख की घड़ी में सभी को संबल प्रदान करें तथा पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें.

विनोद कुमार शुक्ल : वह आदमी नया गरम कोट पहिन कर चला गया विचार की तरह

अपने काव्य संग्रह और उपन्यासों से हिंदी पाठकों को हर बार चकित करने वाले विनोद कुमार शुक्ल ने अपनी संवेदनशील एवं ”जादुई यथार्थ” के आसपास वाली लेखन शैली से साहित्य जगत में एक विशिष्ट स्थान बनाया था. भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार एवं साहित अकादमी जैसे शीर्षस्थ पुरस्कार प्राप्त करने के बावजूद उनकी लिखने की ललक तनिक भी कम नहीं हुई थी. छत्तीसगढ़ के इस प्रसिद्ध साहित्यकार का मंगलवार शाम निधन हो गया. वह 89 वर्ष के थे.

शुक्ल ने अपनी उपन्यास त्रयी ”नौकर की कमीज”, ”खिलेगा तो देखेंगे” और ”दीवार में एक खिड़की रहती थी” के माध्यम से हिंदी साहित्य जगत में एक ऐसी जमीन तोड़ी जिसके कारण वह समालोचकों ही नहीं पाठकों के भी रातों रात पसंदीदा रचनाकार बन गये.
शुक्ल को 59 वें ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उनके रायपुर स्थित निवास पर आयोजित एक समारोह में उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया था.

इस वर्ष एक नवंबर को जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने छत्तीसगढ़ का दौरा किया था तब उन्होंने शुक्ल और उनके परिवार से बात की थी तथा उनके स्वास्थ्य और कुशलक्षेम के बारे में जानकारी ली थी. शुक्ल पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे और अस्पताल में भी भर्ती रहे थे.

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में एक जनवरी 1937 को जन्मे विनोद कुमार शुक्ल हिंदी साहित्य के ऐसे रचनाकार थे, जो बहुत धीमे बोलते थे, लेकिन साहित्य की दुनिया में उनकी आवाज बहुत दूर तक सुनाई देती थी. उन्होंने मध्यमवर्गीय, साधारण और लगभग अनदेखे रह जाने वाले जीवन को शब्द देते हुए हिंदी में एक बिल्कुल अलग तरह की संवेदनशील, न्यूनतम और जादुई दुनिया रची.
उनका पहला कविता संग्रह ‘लगभग जय हिन्द’ 1971 में आया और वहीं से उनकी विशिष्ट भाषिक बनावट, चुप्पी और भीतर तक उतरती कोमल संवेदनाएं हिंदी कविता में दर्ज होने लगीं. उनके उपन्यास ‘नौकर की कमीज.’ (1979) ने हिंदी कथा-साहित्य में एक नया मोड़ दिया, जिस पर मणि कौल ने फिल्म भी बनाई है.

शुक्ल को साहित्य अकादमी पुरस्कार, गजानन माधव मुक्तिबोध फेलोशिप, रज.ा पुरस्कार, शिखर सम्मान, राष्ट्रीय मैथिलीशरण गुप्त सम्मान, दयावती मोदी कवि शेखर सम्मान, हिंदी गौरव सम्मान और 2023 का पैन-नाबोकोव जैसे पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया था. शुक्ल छत्तीसगढ़ के उन लेखकों में से एक थे जिन्होंने राज्य के महान साहित्यकार पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी और गजानंद माधव मुक्तिबोध की परंपरा को आगे बढ़ाया था. शुक्ल पिछले पिछले पांच दशक से भी अधिक समय से लगातार लिख रहे थे और लिखते जा रहे थे.

अपने अंतिम दिनों में जब वह अस्पताल में भर्ती थे तब भी उनके करीब कागज और कलम ही हुआ करता था. उनके पुत्र शाश्वत के मुताबिक अस्पताल में शुक्ल को ऑक्सीजन दिया जा रहा था और इसी हालत में उनका लेखन कार्य भी जारी था. इस वर्ष सितंबर माह में रायपुर में चौथे हिंद युग्म महोत्सव के दौरान शुक्ल को 30 लाख रुपए की रॉयल्टी का प्रतीकात्मक चेक दिया गया था जो चर्चा को विषय बन गया था. महोत्सव में शुक्ल ने कहा था कि व्यक्ति जितना स्थानीय होगा, उतनी ही वैश्विकता उसके भीतर होगी और इसीलिए अपनी स्थानीयता और बचपन की स्मृतियों को संभालकर रखना चाहिए. अपने घर से बाहर यह शुक्ल का अंतिम सार्वजनिक कार्यक्रम था. बाद में 21 नवंबर को उनके घर पर ही उन्हें हिंदी का सर्वोच्च सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया.

इस दौरान शुक्ल ने कहा था, ”जब हिन्दी भाषा सहित तमाम भाषाओं पर संकट की बात कही जा रही है, मुझे पूरी उम्मीद है नई पीढ़ी हर भाषा का सम्मान करेगी. हर विचारधारा का सम्मान करेगी. किसी भाषा या अच्छे विचार का नष्ट होना, मनुष्यता का नष्ट होना है.” शुक्ल ने कहा था, ”मुझे बच्चों, किशोरों और युवाओं से बहुत उम्मीदें हैं. मैं हमेशा कहता रहा हूं कि हर मनुष्य को अपने जीवन में एक किताब जरूर लिखनी चाहिए. अच्छी किताबें हमेशा साथ होनी चाहिए. अच्छी किताब को समझने के लिए हमेशा जूझना पड़ता है. किसी भी क्षेत्र में शास्त्रीयता को पाना है तो उस क्षेत्र के सबसे अच्छे साहित्य के पास जाना चाहिये.”

मध्यप्रदेश के जबलपुर कृषि विश्वविद्यालय से कृषि विज्ञान में एम.एससी की डिग्री हासिल करने के बाद शुक्ल ने अध्यपान कार्य को व्यवसाय के रूप में चुना. इस दौरान उनका लेखन कार्य भी जारी रहा. उनका पहला कविता-संग्रह ‘लगभग जयहिन्द’ का प्रकाशन 1971 में हुआ था. इसके बाद वह लगातार लिखते गए.

शुक्ल के काव्य संग्रहों में ‘लगभग जयहिंद’, ‘वह आदमी चला गया नया गरम कोट पहिनकर विचार की तरह’ और ‘सब कुछ होना बचा रहेगा” काफी र्चिचत रहे. उनकी कई कृतियों का देश-विदेश की विभिन्न भाषाओं में अनुवाद हो चुका है. उनकी बाल साहित्य में भी रूचि थी. साल 2023 में उन्हें अंतरराष्ट्रीय साहित्य में उपलब्धि के लिए 2023 के पेन/नाबोकोव पुरस्कार के लिए चुना गया था. वह भारतीय एशियाई मूल के पहले लेखक थे, जिन्हें इस सम्मान से नवाजा गया था.

Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email
Previous Articleहिंदुओं पर कथित हिंसा के विरोध में बांग्लादेश उप उच्चायोग की ओर मार्च निकाला
Next Article शेफाली के आक्रामक अर्धशतक से भारत ने दूसरे महिला टी20 में श्रीलंका को रौंदा
Team Rashtrawani
  • Website

Related Posts

Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ की झांकी बनी आकर्षण का केंद्र, देश के पहले डिजिटल म्यूजियम की झलक ने छुआ दिल

January 27, 2026
Chhattisgarh

कोरबा में लगभग 40 साल पुराना 10 टन वजनी लोहे का पुल रातों-रात चोरी, पांच लोग

January 24, 2026
Chhattisgarh

सरगुजा के युवा खिलाड़ियों ने लहराया परचम, राष्ट्रीय क्वांन की डो चैंपियनशिप में 12 मेडल जीते

January 24, 2026
Add A Comment
Leave A Reply Cancel Reply

Top Posts

निर्मला सीतारमण ने जातिगत गणना का श्रेय लेने पर तमिलनाडु सरकार को घेरा

May 3, 202546 Views

सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति ने जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की

April 30, 202546 Views

चपरासी से उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के आरोप में एक प्रिंसिपल और प्रोफेसर निलंबित

April 8, 202543 Views
Stay In Touch
  • Facebook
  • WhatsApp
  • Twitter
  • Instagram
Latest Reviews
राष्ट्रवाणी

राष्ट्रवाणी के वैचारिक प्रकल्प है। यहां आपको राष्ट्र हित के ऐसे दृष्टिकोण पर आधारित समाचार, विचार और अभिमत प्राप्त होंगे, जो भारतीयता, हिंदुत्व और पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली, विश्व बंधुत्व और वसुधैव कुटुंबकम के शाश्वत चिंतन को पुष्ट करता है।

संपादक : नीरज दीवान

मोबाइल नंबर : 7024799009

Most Popular

निर्मला सीतारमण ने जातिगत गणना का श्रेय लेने पर तमिलनाडु सरकार को घेरा

May 3, 202546 Views

सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति ने जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की

April 30, 202546 Views

चपरासी से उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के आरोप में एक प्रिंसिपल और प्रोफेसर निलंबित

April 8, 202543 Views
Our Picks

फिल्म ‘बॉर्डर 2’ ने देश में टिकट खिड़की पर 250 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की

January 28, 2026

खेलों में देश की तैयारियों का परिणाम है 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी मिलना: मुर्मू

January 28, 2026

भारत-ईयू ने एफटीए वार्ता पूरी की, परिधान, रसायनों के लिए शून्य शुल्क; कार, वाइन के लिए रियायती पहुंच

January 27, 2026
Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • देश
  • विदेश
  • खेल
  • व्यापार
  • मनोरंजन
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
© 2026 Rashtrawani

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.