बलौदाबाजार. छत्तीसग­ढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में शिकारियों द्वारा जंगल में बिछाए गए बिजली के तार के संपर्क में आने से एक गर्भवती बायसन की मौत हो गई. अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी. अधिकारियों ने बताया कि शिकारियों ने जानवर का सिर व पैर काट दिए और उसके पेट से पूरी तरह से विकसित भ्रूण निकाल लिया.

उन्होंने बताया कि गर्भवती बायसन का क्षत-विक्षत शव शनिवार को बलौदाबाजार वन प्रभाग के तहत अर्जुनी वन क्षेत्र में मिला, जिसके बाद वन र्किमयों ने मामले की जांच शुरू की. अधिकारियों ने बताया कि शुरुआती जांच से पता चला कि शिकारियों ने बिजली के तार का जाल बिछाया था और उसके संपर्क में आने से बायसन की मौत हो गई. उन्होंने बताया कि आशंका है कि शिकारियों ने शव को ठिकाने लगाने के लिए उसके टुकड़े किए. अधिकारियों ने बताया कि कुछ संदिग्धों की पहचान कर ली गई है और उन्हें पकड़ने की कोशिशें जारी हैं.

रायपुर के वन्यजीव कार्यकर्ता नितिन सिंघवी ने इस घटना के लिए वन विभाग की कथित लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया.
उन्होंने आरोप लगाया कि त्योहारी के दौरान शिकार ब­ढ़ने की पहले से चेतावनी के बावजूद विभाग कार्रवाई करने में विफल रहा.
सिंघवी ने राज्य के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को सोमवार को लिखे एक पत्र में घटना पर दुख व्यक्त किया और वन विभाग से पर्यटन को ब­ढ़ावा देने के बजाय विशेष रूप से वन्यजीव संरक्षण व शिकार विरोधी उपायों पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया.

उन्होंने कहा कि बायसन एक लुप्तप्राय प्रजाति है और इतने क्रूर तरीके से उसे मरना एक चेतावनी से कम नहीं है. सिंघवी ने आरोप लगाया कि रायग­ढ़ वन प्रभाग में दिवाली के एक दिन बाद भी ऐसी ही एक घटना हुई, जहां जंगली सूअरों को फंसाने के लिए लगाए गए बिजली के तार से एक हाथी की मौत हो गई. उन्होंने वन्यजीव अभयारण्यों, राष्ट्रीय उद्यानों और बाघ अभयारण्यों में प्रशिक्षित ‘स्निफर डॉग स्क्वॉड’ तैनात करने की मांग की.

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