राष्ट्रवाणी: राज्य ब्यूरो, रायपुर। नीट पर्चा लीक मामले में बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी के बीच छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती घोटाला मामले में कानून का शिकंजा अब और अधिक कसता चला जा रहा है। इसी क्रम में प्रवर्तन निदेशालय ने आयोग के पूर्व चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी को गिरफ्तार कर लिया है। इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर से हलचल तेज हो गई है। टामन सिंह सोनवानी पहले से ही रायपुर सेंट्रल जेल में बंद थे। केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी ने सीजीपीएससी-2021 की विवादास्पद भर्ती और प्रश्नपत्र लीक प्रकरण से जुड़े मनी लाड्रिंग एंगल की गहराई से छानबीन के लिए पहले ही इसीआइआर दर्ज कर ली थी। इसके बाद विशेष अदालत से प्रोडक्शन वारंट जारी कराया गया, जिसके आधार पर ईडी की टीम ने रायपुर जेल के भीतर ही लगातार तीन दिनों तक उनसे लंबी और मैराथन पूछताछ की। पुख्ता सबूतों और कड़ियों को जोड़ने के बाद शनिवार को उन्हें इस मामले में औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के तुरंत बाद ईडी ने आरोपी पूर्व चेयरमैन को विशेष अदालत के समक्ष पेश किया। एजेंसी ने अदालत से गहन पूछताछ के लिए कस्टोडियल रिमांड की मांग की, जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए टामन सिंह सोनवानी को 31 जुलाई तक सात दिनों की रिमांड पर ईडी को सौंप दिया है। अब आने वाले दिनों में जांच एजेंसी इस बात की परतें उधेड़ने का प्रयास करेगी कि आखिर कैसे पूरी भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित किया गया और इसके पीछे कौन-कौन से वित्तीय नेटवर्क सक्रिय थे। यह पूरा मामला वर्ष 2021 की उन नियुक्तियों से जुड़ा है, जिन पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद के गंभीर आरोप लगे थे। आरोप है कि रसूखदार और प्रभावशाली लोगों के नात-रिश्तेदारों को डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी जैसे प्रतिष्ठित पदों पर चयनित कराने के लिए चयन प्रक्रिया के साथ सुनियोजित तरीके से खिलवाड़ किया गया था। इस धांधली के एवज में भारी-भरकम रकम के लेन-देन की बात भी सामने आई थी। मामले में सीबीआई पहले ही अपनी जांच के दौरान पूर्व चेयरमैन सोनवानी, बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड के डायरेक्टर श्रवण कुमार गोयल और कुछ परीक्षार्थियों समेत कुल 29 आरोपितों के खिलाफ अंतिम आरोपपत्र विशेष अदालत में दाखिल कर चुकी है। सीबीआई की शुरुआती कार्रवाई के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय की ओर से की गई गिरफ्तारी से वित्तीय अनियमितता और मनी लाड्रिंग के इस पेचीदा जाल की जांच में कई अन्य संदिग्ध चेहरों और प्रभावशाली किरदारों के बेनकाब होने की संभावना जताई जा रही है।

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