सीजी न्यूज ऑनलाइन, 03 मार्च 2026। कथित बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने पूर्व वरिष्ठ अधिकारी अनिल टुटेजा को नियमित जमानत प्रदान कर दी है। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की एकलपीठ ने अपने विस्तृत आदेश में कहा कि जब ट्रायल के शीघ्र पूरा होने की संभावना नहीं हो और आरोपी लंबे समय से न्यायिक हिरासत में हो, तब व्यक्तिगत स्वतंत्रता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
यह टुटेजा की दूसरी जमानत याचिका थी। इससे पहले उनकी अर्जी खारिज हो चुकी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने जांच की प्रगति को देखते हुए उन्हें पुनः जमानत याचिका दायर करने की स्वतंत्रता दी थी। उच्च न्यायालय ने माना कि आरोप पत्र दाखिल होने के बावजूद ट्रायल आगे नहीं बढ़ा है, जिससे परिस्थितियों में बदलाव आया है।
18 माह से अधिक हिरासत, ट्रायल शुरू नहीं
अदालत ने उल्लेख किया कि आवेदक 21 अगस्त 2024 से वर्तमान प्रकरण में हिरासत में है। इससे पूर्व वह प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई में भी संबंधित लेनदेन के मामले में बंद रहा। कुल मिलाकर उसकी हिरासत अवधि लगभग 23 माह तक पहुंच चुकी है।
मामले में अब तक 7 आरोप पत्र प्रस्तुत किए जा चुके हैं। 51 आरोपी बनाए गए हैं और 1,111 गवाह प्रस्तावित हैं। दस्तावेजी साक्ष्य हजारों पृष्ठों में है। न्यायालय ने कहा कि इतनी व्यापक सुनवाई स्वाभाविक रूप से लंबा समय लेगी। फिलहाल विशेष न्यायालय द्वारा न तो संज्ञान लिया गया है और न ही आरोप तय हुए हैं, क्योंकि अभियोजन स्वीकृति लंबित है।
व्यक्तिगत स्वतंत्रता सर्वोपरि
कोर्ट ने कहा कि जब संज्ञान और आरोप गठन ही लंबित हों, तब ट्रायल की समयसीमा अनिश्चित हो जाती है। ऐसे में आरोपी को अनिश्चितकाल तक जेल में रखना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार के विपरीत होगा।
अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि साक्ष्य मुख्यतः दस्तावेजी प्रकृति का है, जिसे जांच एजेंसी जब्त कर चुकी है। आरोपी से किसी प्रकार की नकद राशि या अवैध संपत्ति की बरामदगी नहीं हुई है।
शर्तों के साथ मिली राहत
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जमानत केवल लंबी हिरासत और ट्रायल में संभावित विलंब के आधार पर दी गई है, मेरिट पर कोई निष्कर्ष नहीं निकाला गया है।
अदालत ने 1 लाख रुपये के निजी मुचलके एवं सममूल्य जमानतदार पर रिहाई का आदेश दिया है। पासपोर्ट जमा करना, जांच व ट्रायल में सहयोग करना, गवाहों को प्रभावित न करना और बिना अनुमति देश न छोड़ने जैसी शर्तें लागू रहेंगी। शर्तों के उल्लंघन की स्थिति में अभियोजन को जमानत निरस्तीकरण हेतु आवेदन करने की स्वतंत्रता दी गई है।
