राष्ट्रवाणी: नितिन नामदेव, रायपुर। छत्तीसगढ़ में मातंगी माता का एक ऐसा मंदिर है, जहां चारों तरफ हजारों घड़ियां टंगी हैं। मंदिर के पुजारी हरिओम महाराज के मुताबिक, यहां घड़ी बांधने से हर मुराद पूरी हो जाती है। इसके अलावा लाल कपड़ा में नारियल चढ़ाने एवं जंजीर के साथ घंटी बांधने से भी मनोकामना पूरी होती है। रायपुर से करीब 45 किलोमीटर दूर कुरुद विकासखंड के जीजामगांव, बिरेझर गांव में मां मातंगी देवी धाम स्थित है। यह धाम अपनी अनोखी धार्मिक परंपराओं के कारण श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। मंदिर की सबसे विशेष मान्यता घड़ी बांधने की है। इस मंदिर में बांधी गई घंड़ी का बंद होना जीवन में अच्छे समय की शुरुआत का संकेत माना जाता है। श्रद्धालु अपनी मन्नत मांगकर मंदिर परिसर में घड़ी बांधते हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार, जब वह घड़ी बंद हो जाती है तो व्यक्ति का अच्छा समय शुरू होने लगता है। मंदिर में विश्वास के चलते मंदिर परिसर में सैकड़ों घड़ियां बंधी हुई हैं। इसके अलावा यहां घंटी, ताला और नारियल बांधने की भी परंपरा है। छत्तीसगढ़ के अलावा ओडिशा, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन और मनोकामना लेकर पहुंचते हैं। कोरबा से पहुंची श्रद्धालु कमला साहू ने कहा कि यहां घड़ी, घंटी और ताला बांधने की परंपरा है। ऐसी मान्यता है कि इससे जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और मांगी गई मनोकामनाएं पूरी होती हैं इसलिए हम आए थे। इसी विश्वास के साथ उन्होंने भी मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना कर अपनी मन्नत मांगी है। वहीं दुर्ग से पहुंची श्रद्धालु ज्योति साहू ने बताया कि उन्होंने कई लोगों से मां मातंगी धाम की महिमा सुनी थी। विशेष रूप से घड़ी बांधने की परंपरा के बारे में जानने के बाद उनकी इच्छा यहां आने की हुई। मंदिर के पुजारी हरिओम महाराज ने बताया कि मां मातंगी देवी धाम में घड़ी के अलावा घंटी और ताला बांधने की परंपरा है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि घंटी और ताला बांधने से जीवन की बाधाएं और परेशानियां दूर होती हैं। वहीं लाल कपड़े में नारियल बांधकर लोग अपनी मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करते हैं, जबकि पीले कपड़े में नारियल बांधने की परंपरा नकारात्मक प्रभावों और बुरी शक्तियों से रक्षा की कामना से जुड़ी मानी जाती है।

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