🔴छत्तीसगढ़ अधिवक्ता कल्याण समिति की बैठक में बड़े फैसले, विधेयक संशोधन पर भी चर्चा
राष्ट्रवाणी 22 मार्च 2026 । छत्तीसगढ़ अधिवक्ता कल्याण निधि न्यासी समिति की महत्वपूर्ण बैठक विगत दिनों आयोजित की गई। बैठक मंत्रालय में विधि मंत्री की अध्यक्षता में संपन्न हुई, जिसमें अधिवक्ताओं के हित से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा और निर्णय लिए गए।
बैठक में ये रहे प्रमुख सदस्य:
बैठक में विधि मंत्री, महाधिवक्ता, छत्तीसगढ़ राज्य विधि परिषद के पदाधिकारी, वित्त विभाग के अधिकारी, भारतीय जीवन बीमा निगम और बैंक प्रतिनिधियों सहित कई वरिष्ठ सदस्य उपस्थित रहे।
अधिवक्ता संरक्षण विधेयक पर चर्चा:
बैठक में “छत्तीसगढ़ अधिवक्ता संरक्षण विधेयक 2020” पर विशेष चर्चा की गई। उप समिति द्वारा सुझाए गए संशोधनों को ध्यान में रखते हुए विधेयक के कुछ प्रावधानों में आंशिक बदलाव करने का प्रस्ताव रखा गया। इसे आगे की प्रक्रिया के लिए विधि विभाग के माध्यम से विधानसभा में प्रस्तुत करने की बात कही गई।
एजेंडा पर व्यापक विचार-विमर्श
बैठक में विभिन्न एजेंडा बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई और अधिवक्ताओं के कल्याण से जुड़े प्रस्तावों को सर्वसम्मति से पारित किया गया।
मृत्यु सहायता राशि में बढ़ोतरी:
अधिवक्ताओं को मिलने वाली मृत्यु दावा राशि को 1.50 लाख रुपये से बढ़ाकर 2.50 लाख रुपये करने का प्रस्ताव पारित किया गया है। साथ ही मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान से मिलने वाली सहायता राशि में भी वृद्धि का प्रस्ताव रखा गया है।
स्टाम्प शुल्क में संशोधन:
अधिवक्ता कल्याण निधि को मजबूत करने के लिए स्टाम्प शुल्क में बढ़ोतरी का निर्णय लिया गया है। 50 रुपये के स्थान पर 100 रुपये और 25 रुपये के स्थान पर 50 रुपये के स्टाम्प लागू करने का प्रस्ताव पारित हुआ है। इसके लिए संबंधित अधिनियम में संशोधन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
समूह जीवन बीमा योजना:
राज्य सरकार के माध्यम से अधिवक्ताओं के लिए समूह जीवन बीमा योजना लागू करने की तैयारी की जा रही है। इसके तहत अधिवक्ताओं की संख्या और आवश्यक जानकारी एकत्र कर बीमा कंपनियों के माध्यम से योजना शुरू की जाएगी।
प्रशासनिक निर्देश:
सभी कलेक्टरों को अधिवक्ता कल्याण निधि स्टाम्प के उपयोग को सुनिश्चित करने के निर्देश जारी करने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
जनसंख्या के आधार पर प्रतिनिधित्व:
प्रस्ताव के अनुसार, अधिवक्ता पैनल में विभिन्न वर्गों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में शामिल किया जाएगा, जिससे सभी वर्गों को समान अवसर मिल सके।
कानूनी प्रावधान में संशोधन:
इस व्यवस्था को लागू करने के लिए “छत्तीसगढ़ अधिवक्ता कल्याण निधि अधिनियम, 1982” में आवश्यक संशोधन करने की बात कही गई है। इसके लिए विधि विभाग के माध्यम से आगे की कार्रवाई की जाएगी।
समान अवसर की दिशा में कदम:
इस फैसले को सामाजिक न्याय और समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे अधिवक्ता क्षेत्र में पिछड़े और वंचित वर्गों की भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है।
5 लाख तक चिकित्सा बीमा सुविधा:
अधिवक्ताओं के लिए 5 लाख रुपये तक की चिकित्सा बीमा सुविधा उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है। इस योजना को लागू करने के लिए वित्त विभाग के माध्यम से प्रस्ताव भेजा जाएगा और परिषद द्वारा आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
सरकारी वकीलों को सुविधा और सम्मान:
राज्य के शासकीय अधिवक्ताओं को सुसज्जित कार्यालय एवं सम्मानजनक कार्य वातावरण उपलब्ध कराने पर सहमति बनी है, जिससे उनके कार्य में सुविधा हो सके।
आय में कमी को लेकर सहायता:
वर्तमान में अधिवक्ताओं की आय में आ रही कमी को देखते हुए कल्याणकारी फंड उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी पारित किया गया है। इसके लिए वित्त विभाग को प्रस्ताव भेजा जाएगा।
पहले लिए गए अन्य महत्वपूर्ण निर्णय:
▪️मृत्यु दावा राशि को बढ़ाकर 2.50 लाख रुपये किया गया
▪️समूह जीवन बीमा योजना लागू करने की तैयारी
▪️एससी, एसटी, ओबीसी व अल्पसंख्यकों को पैनल में प्रतिनिधित्व
▪️65 वर्ष के बाद पेंशन योजना पर विचार
▪️युवा अधिवक्ताओं को ₹5000 मासिक मानदेय और ₹20,000 वन टाइम ग्रांट
निष्कर्ष:
इन फैसलों से राज्य के अधिवक्ताओं को आर्थिक राहत और सुरक्षा मिलने की उम्मीद है। अब इन योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए वित्त विभाग की मंजूरी का इंतजार है।

