राष्ट्रवाणी: प्रतिनिधि, धमतरी। छत्तीसगढ़ किसान यूनियन के पदाधिकारियों की बैठक रविवार को धमतरी जिले के सरसोंपुरी नेशनल हाईवे के पास स्थित कार्यालय में संपन्न हुई। बैठक में खेती-किसानी से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई, जिसमें आगामी समर्थन मूल्य पर होने वाली धान खरीदी को लेकर एग्रीस्टैक पोर्टल में पंजीयन की अनिवार्यता का मुद्दा सबसे प्रमुख रहा।
यूनियन के सदस्यों ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जमीन के हिस्सेदारों का नाम एग्रीस्टैक में दर्ज होना अनिवार्य किए जाने से किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई मामलों में आधार कार्ड में नाम की त्रुटि होने या फिर हिस्सेदारों की आपसी सहमति न मिलने की वजह से समय पर पंजीयन नहीं हो पा रहा है।
किसानों ने आशंका जताई है कि यदि इस जटिल प्रक्रिया में जल्द सुधार नहीं किया गया, तो बड़ी संख्या में किसान अपना धान बेचने से वंचित हो जाएंगे। बैठक के दौरान राज्यभर में लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर से बढ़े हुए बिजली बिलों की समस्या पर भी चर्चा की गई। पदाधिकारियों ने एक स्वर में मांग उठाई कि इन स्मार्ट मीटरों को तुरंत हटाया जाए और पूर्व की तरह सामान्य मीटर लगाए जाएं, ताकि आम उपभोक्ताओं और किसानों को बढ़े हुए बिलों के आर्थिक बोझ से राहत मिल सके।
इसके अलावा बैठक में सर्वसम्मति से कई अन्य प्रस्ताव भी पारित किए गए। किसानों ने मांग की कि बढ़ती महंगाई को देखते हुए राज्य सरकार चार हजार रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदे और एक नवंबर से ही खरीदी का कार्य शुरू किया जाए। साथ ही, पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल की लंबित पड़ी चौथी किस्त की राशि इस आगामी दीपावली के पावन पर्व पर किसानों के खातों में ट्रांसफर करने की मांग उठाई गई।
किसानों ने खेती में उपयोग होने वाली अमानक और नकली दवाइयां बेचने वाले कारोबारियों के खिलाफ भी सख्त रुख अपनाया है। बैठक में मांग की गई कि ऐसे मिलावटखोरों और धोखाधड़ी करने वालों के लाइसेंस तुरंत निरस्त किए जाएं और उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही, समर्थन मूल्य पर राज्य के सभी किसानों का धान बिना किसी अनावश्यक और जटिल नियमों के खरीदे जाने पर जोर दिया गया।
एग्रीस्टैक प्रणाली को लेकर यह भी सुझाव दिया गया कि इसमें केवल मुख्य नंबरदार किसान का पंजीयन ही पर्याप्त माना जाए और अन्य हिस्सेदारों के पंजीयन की अनिवार्यता को समाप्त किया जाए।
