धर्मशाला/बीजिंग. तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने बुधवार को कहा कि दलाई लामा की संस्था जारी रहेगी और केवल गादेन फोडरंग ट्रस्ट के पास उनके उत्तराधिकारी को तय करने का अधिकार होगा. इसके साथ ही उन्होंने इस संबंध में अनिश्चितता को समाप्त कर दिया कि उनके बाद उनका कोई उत्तराधिकारी होगा या नहीं. गादेन फोडरंग ट्रस्ट की स्थापना दलाई लामा ने 2015 में की थी.
चौदहवें दलाई लामा – तेनजिन ग्यात्सो, जिन्हें ल्हामा थोंडुप भी कहा जाता है, ने गत 21 मई, 2025 को बयान दिया था जो उनके कार्यालय ने उनके 90वें जन्मदिन से चार दिन पहले बुधवार को जारी किया गया. तिब्बती भाषा में उनके भाषण का 5.57 मिनट का एक वीडियो भी जारी किया गया. इससे पहले दलाई लामा ने कहा था कि तिब्बत की सबसे पवित्र परंपरा को समाप्त किया जा सकता है या उनका उत्तराधिकारी किसी महिला को या चीन के बाहर जन्मे किसी व्यक्ति को चुना जा सकता है. हालांकि ल्हामा थोंडुप को अलगाववादी मानने वाले चीन ने कहा है कि बीजिंग सदियों पुरानी परंपरा के माध्यम से उनके उत्तराधिकारी की पहचान को मंजूरी देगा.
दलाई लामा के 90वें जन्मदिन का जश्न 30 जून को धर्मशाला के पास मैकलॉडगंज के मुख्य मंदिर सुगलागखांग में शुरू हुआ. यह अवसर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने 2011 में कहा था कि वह 90 वर्ष की आयु में फैसला करेंगे कि संस्था जारी रहेगी या नहीं.
बुधवार को जारी बयान में कहा गया, ”मैं पुष्टि करता हूं कि दलाई लामा की संस्था जारी रहेगी और मैं दोहराता हूं कि गादेन फोडरंग ट्रस्ट के पास भावी पुनर्जन्म को मान्यता देने का एकमात्र अधिकार है. इस मामले में किसी और को हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है.” 24 सितंबर, 2011 को तिब्बती आध्यात्मिक परंपराओं के प्रमुखों की एक बैठक के दौरान दलाई लामा ने कहा था, ”मैंने 1969 में ही स्पष्ट कर दिया था कि संबंधित लोगों को यह तय करना चाहिए कि भविष्य में दलाई लामा के पुनर्जन्म को जारी रखा जाना चाहिए या नहीं.” उन्होंने कहा था कि जब वह 90 वर्ष के हो जाएंगे, तो वह तिब्बती बौद्ध परंपराओं के उच्च लामाओं, तिब्बती जनता और तिब्बती बौद्ध धर्म का पालन करने वाले अन्य लोगों से परामर्श करेंगे, ताकि यह मूल्यांकन किया जा सके कि दलाई लामा की संस्था को जारी रखा जाना चाहिए या नहीं.
बुधवार को यहां जारी दलाई लामा के बयान में कहा गया, ”मुझे दुनिया के अन्य हिस्सों में रहने वाले तिब्बतियों और तिब्बती बौद्धों से विभिन्न चैनलों के माध्यम से संदेश मिले हैं, जिसमें अनुरोध किया गया है कि दलाई लामा की संस्था को जारी रखा जाना चाहिए. मैं पुष्टि करता हूं कि दलाई लामा की संस्था जारी रहेगी.” उन्होंने कहा कि भविष्य में पुनर्जन्म को मान्यता देने की जिम्मेदारी गादेन फोडरंग ट्रस्ट, दलाई लामा कार्यालय के सदस्यों पर है, जिन्हें तिब्बती बौद्ध परंपराओं के विभिन्न प्रमुखों और दलाई लामाओं की वंशावली से अभिन्न रूप से जुड़े और शपथ लेने वाले विश्वसनीय धर्म रक्षकों से परामर्श करना चाहिए. बयान में कहा गया है, ”उन्हें परंपरा के अनुसार खोज और पहचान की प्रक्रिया को पूरा करना चाहिए.”
चीन ने दलाई लामा की उत्तराधिकार योजना को खारिज किया, मंजूरी की जरूरत पर जोर दिया
चीन ने दलाई लामा की उत्तराधिकार योजना को बुधवार को खारिज करते हुए इस पर जोर दिया कि किसी भी भावी उत्तराधिकारी को उसकी मंजूरी लेनी होगी. इस तरह चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के साथ तिब्बती बौद्ध के दशकों पुराने संघर्ष में एक नया अध्याय जुड़ गया है.
तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने बुधवार को कहा कि दलाई लामा की संस्था जारी रहेगी और केवल गादेन फोडरंग ट्रस्ट के पास उनके उत्तराधिकारी को तय करने का अधिकार होगा. इसके साथ ही दलाई लामा ने इस संबंध में अनिश्चितता को समाप्त कर दिया कि उनके बाद उनका कोई उत्तराधिकारी होगा या नहीं. गादेन फोडरंग ट्रस्ट की स्थापना दलाई लामा ने 2015 में की थी. रविवार को दलाई लामा के 90वें जन्मदिन से पहले उनकी यह घोषणा बीजिंग के साथ तनाव बढ़ाने वाली है.
चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने दलाई लामा की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रेस वार्ता में कहा, “दलाई लामा के पुनर्जन्म को धार्मिक परंपराओं और कानूनों के अनुरूप घरेलू मान्यता, ‘स्वर्ण कलश’ प्रक्रिया और केंद्र सरकार द्वारा अनुमोदन के सिद्धांतों का पालन करना होगा.” दलाई लामा की तरफ दुनिया का ध्यान 1959 में उस समय गया जब वह कम्युनिस्ट पार्टी के संस्थापक माओत्से तुंग के नेतृत्व में चीनी सेना द्वारा तिब्बत पर कब्जा कर लेने के बाद तिब्बतियों के एक बड़े समूह के साथ भारत में शरण लेने के लिए आये थे.
तब से वह धर्मशाला में रह रहे हैं. उनकी उपस्थिति चीन और भारत के बीच विवाद का विषय बनी रही. दलाई लामा के उत्तराधिकारी को भी तिब्बती स्वायत्तता के लिए संघर्ष को जारी रखना पड़ सकता है. दलाई लामा के उत्तराधिकारी के मुद्दे से चीन और अमेरिका के बीच भी नए तनाव की आशंका है क्योंकि अमेरिका का तिब्बती नीति और समर्थन अधिनियम 2020, चीन की नीति के उलट है. अमेरिकी अधिनियम में दलाई लामा और तिब्बती बौद्ध धर्म के लिए अमेरिका के दृढ़ समर्थन की पुष्टि की गई है.
माओ ने कहा कि दलाई लामा और तिब्बती बौद्ध धर्म के दूसरे सबसे बड़े आध्यात्मिक नेता पंचेन लामा के पुनर्जन्म के लिए 18वीं सदी के किंग राजवंश द्वारा शुरू की गई स्वर्ण कलश विधि प्रक्रिया की सदियों पुरानी परंपरा से गुजरना पड़ता है. माओ ने कहा कि वर्तमान 14वें दलाई लामा को उनके पूर्ववर्ती के निधन के बाद पारंपरिक अनुष्ठानों के बाद मान्यता दी गई थी, लेकिन उनकी मान्यता तत्कालीन केंद्रीय सरकार द्वारा सीधे दी गई थी, जिससे उन्हें स्वर्ण कलश प्रक्रिया से छूट मिल गई.
माओ ने यह भी बताया कि किस प्रकार इस पारंपरिक समारोह को 2007 में चीन के आधिकारिक नियमों में शामिल किया गया, साथ ही इसमें विदेशी व्यक्तियों और पार्टियों के हस्तक्षेप पर स्पष्ट प्रतिबंध लगा दिया गया. दलाई लामा की उत्तराधिकार योजना से संबंधित प्रश्न और माओ का जवाब बुधवार को चीनी विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर पोस्ट की गई प्रेस वार्ता के आधिकारिक पाठ से गायब है. माओ ने चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के तहत तिब्बती बौद्ध धर्म और अन्य धर्मों के ‘चीनीकरण’ का भी बचाव किया.

