दुबई/इस्लामाबाद. राजधानी दोहा में हमास के नेताओं पर इजराइल द्वारा पिछले सप्ताह किए गए हमले के खिलाफ कतर सोमवार को एक शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने की तैयारी कर रहा है. कतर को उम्मीद है कि इस शिखर सम्मेलन में अरब और इस्लामी देशों का एक समूह इजराइल को नियंत्रित करने का तरीका सुझाएगा, क्योंकि गाजा पट्टी में हमास के खिलाफ उसके हमले जारी हैं. हमास के नेताओं पर यह हमला ऐसे समय में हुआ है, जब कतर इजराइल और हमास के बीच जारी युद्ध में संघर्ष विराम करवाने के लिए एक प्रमुख मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है.

कतर ने इस बात पर जोर दिया कि वह इस हमले के बावजूद दोनों के बीच संघर्ष विराम करवाने के लिए प्रयास करता रहेगा.
कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने रविवार को एक बैठक में कहा, ”अब समय आ गया है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोहरे मापदंड अपनाना बंद करे और इजराइल को उसके द्वारा किए गए सभी अपराधों के लिए दंडित करे.” यह स्पष्ट नहीं है कि शिखर सम्मेलन से क्या हासिल हो पाएगा, क्योंकि कुछ देशों के पहले से ही इजराइल के साथ कूटनीतिक संबंध हैं और वे अपने संबंध तोड़ने में संकोच कर सकते हैं.

अरब-इस्लामी देशों की आपात बैठक में भाग लेने के लिए कतर रवाना हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अरब-इस्लामी देशों की एक आपात बैठक में भाग लेने के लिए सोमवार को एक दिवसीय यात्रा पर कतर के लिए रवाना हुए. कतर में हमास पर इजराइल के हमले की संभावित एकजुट प्रतिक्रिया पर चर्चा करने के लिए यह बैठक बुलाई गई है.

यह शिखर सम्मेलन नौ सितंबर को दोहा पर इजराइल के हवाई हमलों और गाजा में मानवाधिकारों की बिगड़ती स्थिति के मद्देनजर आयोजित किया गया है. इस हमले में हमास के पांच सदस्य और कतर का एक सुरक्षा अधिकारी मारा गया था. रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ, सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार और प्रधानमंत्री के विशेष सहायक तारिक फातमी प्रधानमंत्री शहबाज के साथ हैं. जबकि उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार पहले से ही दोहा में हैं. यह एक सप्ताह के भीतर शहबाज की दूसरी कतर यात्रा थी.

शहबाज ने कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी से मुलाकात करने तथा दोहा में आवासीय क्षेत्रों को निशाना बनाकर किए गए हमलों के बाद एकजुटता व्यक्त करने के लिए बृहस्पतिवार को दोहा की यात्रा की थी. दोहा शिखर सम्मेलन में इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) के सदस्य देशों के कई शीर्ष नेताओं के भाग लेने की उम्मीद है. इस बैठक का उद्देश्य इजराइल को एक कड़ा संदेश देना है.

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