रायपुर। दुर्ग रेलवे स्टेशन पर नारायणपुर जिले के तीन आदिवासी महिलाओं से मारपीट और छेड़छाड़ के मामले में छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग ने सख्त कदम उठाया है. मामले की सुनवाई करते हुए आयोग ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को आदेश दिया है कि 15 दिनों के भीतर तीनों महिलाओं की अलग-अलग एफआईआर दर्ज कर रिपोर्ट आयोग को भेजी जाए. साथ ही डीआरएम और दुर्ग एसपी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की गई है.

दरअसल, नारायणपुर जिले की तीन आदिवासी महिलाओं ने आयोग में शिकायत की थी कि दुर्ग रेलवे स्टेशन में बजरंग दल के तीन कार्यकर्ताओं ने उनके साथ मारपीट, गाली-गलौच और अश्लील हरकतें की. आरोपियों ने जातिसूचक अपशब्द भी कहे. महिलाओं का कहना था कि शिकायत के बावजूद पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की. आयोग के सामने पेश हुई रिपोर्ट में सामने आया कि दुर्ग एसपी की ओर से लगातार लापरवाही बरती गई और आरोपियों को आयोग के समक्ष उपस्थित नहीं कराया गया. वहीं जीआरपी थाने के नियंत्रण को लेकर रेलवे और राज्य पुलिस के बीच जिम्मेदारी टालने की प्रवृत्ति देखी गई.
आयोग ने सीसीटीवी फुटेज भी मांगी थी, जिसमें केवल एक गेट की रिकॉर्डिंग दी गई. आयोग ने कहा कि उनसे साक्ष्य छिपाने की कोशिश की जा रही है. आयोग ने डीजीपी को विशेष पत्र लिखकर कहा है कि यदि 15 दिन में एफआईआर दर्ज नहीं होती तो आवेदिकाओं को पुलिस प्रशासन से मुआवजा दिलाने के लिए राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग को मामला भेजा जाएगा.

