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Home»International»ईरान और इजराइल के बीच नाजुक युद्धविराम से दीर्घकालिक शांति की उम्मीद जगी
International

ईरान और इजराइल के बीच नाजुक युद्धविराम से दीर्घकालिक शांति की उम्मीद जगी

Team RashtrawaniBy Team RashtrawaniJune 25, 2025No Comments6 Mins Read
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ईरान और इजराइल के बीच नाजुक युद्धविराम से दीर्घकालिक शांति की उम्मीद जगी
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दुबई. इजराइल और ईरान के बीच नाजुक युद्धविराम मुश्किलों भरी शुरुआत के बाद बुधवार को कायम होता दिखायी दिया, जिससे यह उम्मीद जगी है कि एक दीर्घकालिक शांति समझौता हो सकता है. हालांकि तेहरान ने इस बात पर जोर दिया है कि वह अपना परमाणु कार्यक्रम नहीं छोड़ेगा.

इजराइल और ईरान के बीच युद्ध के 12वें दिन मंगलवार को युद्धविराम लागू हो गया. हालांकि दोनों पक्षों ने शुरू में एक दूसरे पर इसका उल्लंघन करने का आरोप लगाया, लेकिन अंतत: मिसाइल, ड्रोन और बम के हमले बंद हो गए. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को नीदरलैंड में नाटो के एक शिखर सम्मेलन में संवाददाताओं से कहा कि यह (युद्धविराम) “बहुत अच्छी तरह से” जारी है.

युद्धविराम कराने में मदद करने वाले ट्रंप ने कहा, ”वे बम नहीं बनाएंगे और वे संवर्धन नहीं करेंगे.” हालांकि, ईरान ने इस बात पर जोर दिया है कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम को नहीं छोड़ेगा. वहीं ईरानी संसद ने एक मतदान में एक प्रस्ताव को तेजी से आगे बढ़ाने पर सहमति जतायी, जो वियना स्थित संयुक्त राष्ट्र संगठन अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईएए) के साथ देश के सहयोग को प्रभावी रूप से रोक देगा. आईएईए ईरान के परमाणु कार्यक्रम की वर्षों से निगरानी कर रहा है.

मतदान से पहले, ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर कलीबाफ ने आईएईए की इसके लिए आलोचना की कि उसने अमेरिका द्वारा ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर रविवार को किए गए हमले की ”निंदा भी नहीं की.” कलीबाफ ने सांसदों से कहा, ”इस कारण से, ईरान का परमाणु ऊर्जा संगठन आईएईए के साथ सहयोग को तब तक निलंबित रखेगा जब तक कि परमाणु प्रतिष्ठानों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती और ईरान का शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम तेज गति से आगे बढ़ेगा.” वियना में, आईएईए महानिदेशक राफेल मारियानो ग्रॉसी ने कहा कि उन्होंने ईरान को उसके परमाणु प्रतिष्ठानों का निरीक्षण फिर से शुरू करने पर चर्चा करने के लिए पहले ही पत्र लिख दिया है.

अन्य बातों के अलावा, ईरान का दावा है कि उसने अमेरिकी हमलों से पहले अपने अत्यधिक संर्विधत यूरेनियम को स्थानांतरित कर दिया था और ग्रॉसी ने कहा कि उनके निरीक्षकों को देश के भंडार का फिर से आकलन करने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा, “हमें वापस लौटना होगा. हमें चर्चा करनी होगी.” अमेरिका ने ईरान के तीन परमाणु प्रतिष्ठानों को निशाना बनाते हुए हमले किये थे. इस हमले के बारे में ट्रंप ने कहा है कि इससे ईरान का परमाणु कार्यक्रम “पूरी तरह से नष्ट हो गया.” तेहरान से ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने पुष्टि की कि रविवार को अमेरिकी बी-2 बमवर्षकों द्वारा बंकर-बस्टर बमों का उपयोग करके किए गए हमलों में काफी नुकसान हुआ है.

उन्होंने बुधवार को अल जजीरा से कहा, “हमारे परमाणु प्रतिष्ठानों को बुरी तरह से नुकसान पहुंचा है, यह निश्चित है.” हालांकि उन्होंने विस्तार से बताने से इनकार कर दिया. उन्होंने संभवत: यह संकेत दिया कि ईरान शायद अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के निरीक्षकों को स्थायी रूप से बाहर नहीं करेगा. उन्होंने कहा कि संसद के समक्ष जो विधेयक पेश किया गया है, वह एजेंसी के साथ काम को स्थायी रूप से समाप्त करने की नहीं, बल्कि सिर्फ उसे निलंबित करने की बात करता है.

साथ ही उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि ईरान को परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को आगे बढ़ाने का अधिकार है. उन्होंने कहा, ”ईरान किसी भी परिस्थिति में उस अधिकार को सुरक्षित रखने के लिए दृढ़ संकल्पित है.” पश्चिम एशिया के लिए ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने मंगलवार देर रात फॉक्स न्यूज पर कहा कि इजराइल और अमेरिका ने अब ईरान में “संवर्धन क्षमता के पूर्ण विनाश” के अपने उद्देश्य को प्राप्त कर लिया है और वार्ता के लिए ईरान की शर्त – कि इजराइल अपना अभियान समाप्त करे – भी पूरी हो गई है.
नाटो शिखर सम्मेलन में, जब उनसे अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट के बारे में पूछा गया, जिसमें पाया गया कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को केवल कुछ महीने पीछे धकेल दिया गया है, तो ट्रंप ने उपहास किया और कहा कि इसे फिर से खड़ा करने में “वर्षों” लगेंगे.

इजराइली सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल एफी डेफ्रिन ने बुधवार को कहा कि उनके देश का आकलन यह भी है कि ईरान की परमाणु सुविधाओं को “काफी नुकसान पहुंचाया गया है” और हमले से इसका परमाणु कार्यक्रम “कई साल पीछे चला गया है.” ग्रॉसी ने कहा कि वे नुकसान की गंभीरता पर कोई अटकलें नहीं लगा सकते.

उन्होंने कहा, ”तकनीकी ज्ञान मौजूद है और औद्योगिक क्षमता भी है. इसे कोई नकार नहीं सकता, इसलिए हमें उनके साथ मिलकर काम करने की जरूरत है.” विटकॉफ ने ‘फॉक्स न्यूज’ के साथ एक साक्षात्कार में कहा कि ट्रंप अब “एक व्यापक शांति समझौते पर पहुंचना चाहते हैं जो संघर्षविराम से भी आगे तक जाए.” उन्होंने कहा, ”हम पहले से ही एक दूसरे से बात कर रहे हैं, न केवल सीधे, बल्कि मध्यस्थों के माध्यम से भी.”

उन्होंने कहा कि बातचीत आशाजनक रही है और ”हम उम्मीद करते हैं कि हम दीर्घकालिक शांति समझौता कर सकते हैं.” हालांकि, ईरानी प्रवक्ता बाघेई ने कहा कि वाशिंगटन ने ईरान के परमाणु स्थलों पर अपने हमलों से “कूटनीति को नष्ट कर दिया है” जबकि ईरान सैद्धांतिक रूप से हमेशा बातचीत के लिए तैयार था, देश की राष्ट्रीय सुरक्षा प्राथमिकता थी.

उन्होंने कहा, ”हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि जब अन्य पक्ष कूटनीति के बारे में बात कर रहे हैं तो क्या वे वास्तव में गंभीर हैं या फिर यह क्षेत्र और मेरे देश के लिए और अधिक समस्याएं पैदा करने की उनकी रणनीति का हिस्सा है.” संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य और ईरान के करीबी सहयोगी चीन ने भी बुधवार को अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उसे उम्मीद है कि “पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए एक स्थायी और प्रभावी संघर्षविराम हो सकता है.” ईरानी तेल का चीन एक प्रमुख खरीदार है और उसने ईरानी सरकार का लंबे समय से राजनीतिक समर्थन किया है और नवीनतम संघर्ष शुरू करने और क्षेत्र को अस्थिर करने के लिए इजराइल को दोषी ठहराया है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने बीजिंग में संवाददाताओं से कहा कि संघर्ष के मद्देनजर, चीन “पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता की रक्षा के लिए सकारात्मक कारकों को शामिल करने के लिए तैयार है.” ग्रॉसी ने कहा कि ईरान और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को दीर्घकालिक कूटनीतिक समाधान के लिए युद्धविराम के अवसर का लाभ उठाना चाहिए. इजराइल के साथ युद्ध के दौरान, ईरान ने इजराइल के लिए जासूसी करने के आरोप में कई कैदियों को फांसी दी, जिससे सामाजिक कार्यकर्ताओं में यह डर पैदा हो गया कि संघर्ष समाप्त होने के बाद कई और फांसी हो सकती है. इसने बुधवार को जासूसी के आरोप में तीन और कैदियों को फांसी दी, जिससे 16 जून से जासूसी के लिए दी गई फांसी की कुल संख्या छह हो गई.

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