दीर अल बलाह (गाजा पट्टी)/लंदन. संयुक्त राष्ट्र की खाद्य एजेंसी ने इजराइल पर खाद्य सहायता मांगने आए फलस्तीनियों की भीड़ पर टैंक, स्नाइपर और अन्य हथियारों से गोलीबारी करने का आरोप लगाया है. क्षेत्र के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि 21 महीने से अधिक समय से जारी युद्ध में सहायता मांगने वालों के लिए यह घातक दिन रहा.
गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि खाद्य सामग्री से लदे ट्रकों के काफिले तक पहुंचने की कोशिश कर रहे फलस्तीनियों पर किए गए हमले में कम से कम 80 लोग मारे गए. विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) ने रविवार को एक बयान जारी कर इस घटना की निंदा की. इजराइली सेना ने फलस्तीनियों द्वारा बताई गई मृतकों की संख्या पर सवाल उठाए और कहा कि उसने तत्काल खतरे को दूर करने के मकसद से चेतावनी के रूप में गोलियां चलाईं.
इजराइल और हमास अब भी युद्धविराम वार्ता में लगे हुए हैं, लेकिन स्थायी रूप से युद्धविराम होने का कोई साफ संकेत नहीं है. गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, जैसे-जैसे बातचीत आगे बढ़ रही है, युद्धग्रस्त क्षेत्र में मरने वालों की संख्या 59 हजार से ज़्यादा हो गई है. मारे गए लोगों में आधे से अधिक महिलाएं और बच्चे हैं.
अब इज.राइल ने ऐसे इलाकों को भी खाली करने को कहा है जो अभी तक कम प्रभावित थे. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि उन इलाकों में भी अब लड़ाई शुरू होगी तथा फलस्तीनियों को गाज.ा में और भी छोटे इलाकों में सिमटकर रहना पड़ेगा. उत्तरी गाजा में रविवार को स्वास्थ्य मंत्रालय, प्रत्यक्षर्दिशयों और संयुक्त राष्ट्र के एक अधिकारी ने कहा कि इजराइली सेना ने उस भीड़ पर गोलीबारी की, जो 25 ट्रकों के काफिले से भोजन लेने की कोशिश कर रही थी. बुरी तरह प्रभावित क्षेत्र में राहत सामग्री देने के मकसद से ये ट्रक यहां पहुंचे थे.
डब्ल्यूएफपी ने बयान में कहा कि काफिले के पास पहुंची भीड़ पर इजराइल के टैंक, स्नाइपर और अन्य ने गोलाबारी की. गाजा के स्वास्थ्य अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि रात से इजराइली हमलों में दो महिलाओं और पांच बच्चों सहित कम से कम 13 लोग मारे गए हैं. शिफा अस्पताल के निदेशक डॉ. मोहम्मद अबू सेल्मियाह के अनुसार, सोमवार सुबह मध्य गाजा के नेत्ज.ारिम गलियारे में सहायता ट्रकों का इंतज.ार कर रहे फलस्तीनियों की भीड़ पर गोलीबारी में कम से कम दो लोग मारे गए. उन्होंने बताया कि इज.राइली सेना ने गोलीबारी की थी.
गाजा में युद्ध ‘अब समाप्त होना चाहिए’: ब्रिटेन, फ्रांस सहित 25 देशों ने कहा
ब्रिटेन और फ्रांस सहित 25 देशों का कहना है कि गाजा में युद्ध “अब समाप्त होना चाहिए” और इजराइल को अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करना चाहिए. ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और जापान सहित अन्य देशों के विदेश मंत्रियों ने कहा कि “गाजा में नागरिकों की पीड़ा नये स्तर तक पहुंच गई है.” उन्होंने “पानी और भोजन की अपनी बुनियादी जरूरतें हासिल करने की कोशिश कर रहे बच्चों और नागरिकों के लिए सहायता की धीमी आपूर्ति और उनकी अमानवीय हत्या की निंदा की.” इन देशों के विदेश मंत्रियों ने एक बयान में कहा, “इजराइल सरकार का सहायता वितरण मॉडल खतरनाक है, अस्थिरता को बढ़ावा देता है और गाजा वासियों को मानवीय सम्मान से वंचित करता है.”
बयान में कहा गया है, “इजराइल सरकार का नागरिक आबादी को आवश्यक मानवीय सहायता देने से इनकार करना अस्वीकार्य है. इजराइल को अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत अपने दायित्वों का पालन करना चाहिए.” बयान पर हस्ताक्षर करने वालों में लगभग 20 यूरोपीय देशों के विदेश मंत्रियों के साथ-साथ कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री तथा समानता, तैयारी और संकट प्रबंधन के लिए यूरोपीय संघ के आयुक्त शामिल थे. अमेरिका और जर्मनी ने इस बयान पर हस्ताक्षर नहीं किए.
हस्ताक्षरकर्ताओं ने तत्काल युद्ध-विराम का आह्वान किया और कहा कि वे क्षेत्र में शांति लाने के लिए राजनीतिक मार्ग का समर्थन करने के वास्ते कदम उठाने को तैयार हैं. गाजा पट्टी की 20 लाख से अधिक की फलस्तीनी आबादी एक भयावह मानवीय संकट से जूझ रही है और अब मुख्यत? उस क्षेत्र में आने वाली सीमित सहायता पर निर्भर है. बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हो चुके हैं.
हमास ने सात अक्टूबर 2023 को दक्षिणी इजराइल पर हमला कर दिया था, जिसमें लगभग 1,200 लोग मारे गए थे और 251 अन्य को बंधक बना लिया गया था. गाजा में इजराइल के 50 बंधक अब भी हमास के कब्जे में हैं, लेकिन माना जा रहा है कि इसमें से आधे से भी कम जीवित हैं. गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इजराइल के सैन्य हमले में 59,000 से अधिक फलस्तीनी मारे गए हैं. मंत्रालय का कहना है कि मृतकों में आधे से अधिक महिलाएं और बच्चे हैं. इजराइल और हमास युद्ध-विराम के प्रस्ताव पर कतर में वार्ता कर रहे हैं. इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बार-बार कहा है कि गाजा में इजराइल के सैन्य अभियान का विस्तार करने से हमास पर दबाव बढ़ेगा.

