गणेश विसर्जन का पर्व गणेश चतुर्थी के अंतिम दिन मनाया जाता है, जो अनंत चतुर्दशी भी कहलाता है। यह पूजा और भक्ति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। विसर्जन का अर्थ है, भगवान गणेश को सम्मानपूर्वक विदा करना, ताकि वे अपने लोक को लौट सकें।
विसर्जन से पहले की तैयारी
- अंतिम पूजा और आरती: विसर्जन के दिन, सबसे पहले गणेश जी की अंतिम पूजा करें। उन्हें स्नान कराकर, नए वस्त्र पहनाकर और तिलक लगाएं। इसके बाद, उन्हें उनके प्रिय भोग जैसे मोदक, लड्डू और फल अर्पित करें।मंत्र:“ॐ श्रीं गं सौभाग्य गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा।”इस मंत्र का जाप करते हुए धूप, दीप और नैवेद्य चढ़ाएं। अंत में, कपूर जलाकर गणेश जी की आरती करें।
- क्षमा प्रार्थना: पूजा के बाद, भगवान गणेश से जाने-अनजाने में हुई गलतियों और पूजा में हुई कमियों के लिए क्षमा मांगें।क्षमा प्रार्थना मंत्र:“आवाहनं न जानामि, न जानामि विसर्जनं। पूजां चैव न जानामि, क्षमस्व परमेश्वर॥”अर्थ: हे परमेश्वर, न मैं आपका आह्वान करना जानता हूँ, न ही विसर्जन। मैं पूजा करना भी नहीं जानता, इसलिए मुझे क्षमा करें।
- दक्षिणा अर्पण: पूजा सामग्री और दक्षिणा (कुछ पैसे) गणेश जी के सामने रखें, ताकि आप उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकें।
विसर्जन की प्रक्रिया
- मूर्ति को उठाना: विसर्जन के लिए मूर्ति को उठाने से पहले, परिवार के सभी सदस्य मिलकर गणपति बप्पा का जयकारा लगाएं।मंत्र:“गच्छ गच्छ सुरश्रेष्ठ स्वस्थाने परमेश्वर। मम पूजां गृहीत्वाय पुनरागमनाय च॥”अर्थ: हे देवताओं में श्रेष्ठ, आप अपने स्थान पर वापस जाएं। मेरी पूजा स्वीकार करें और अगले साल फिर से आएं।
- विसर्जन यात्रा: मूर्ति को सम्मानपूर्वक उठाकर विसर्जन स्थल (नदी, तालाब या घर में टब) की ओर ले जाएं। इस दौरान, ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ का जयघोष करते रहें। यह जयकारा खुशी, उत्साह और उम्मीद का प्रतीक है।
- जल में विसर्जन:
- नदी/तालाब में: विसर्जन के समय, मूर्ति को धीरे से जल में प्रवाहित करें। ध्यान रखें कि मूर्ति मिट्टी की हो ताकि पर्यावरण को कोई नुकसान न हो।
- घर में विसर्जन: यदि आप घर में ही विसर्जन कर रहे हैं, तो एक बड़े बर्तन में जल भरें और उसमें मूर्ति को विसर्जित करें। कुछ समय बाद जब मूर्ति गल जाए, तो उस जल को घर के गमलों या बगीचे में डाल दें। यह जल अत्यंत पवित्र माना जाता है।
- अंतिम प्रणाम: मूर्ति के विसर्जन के बाद, जल में हाथ जोड़कर गणेश जी को अंतिम प्रणाम करें और उनसे प्रार्थना करें कि वे आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाएं।
यह विसर्जन विधि आपको अपनी भक्ति और श्रद्धा को पूरी तरह से व्यक्त करने में मदद करेगी।

