नई दिल्ली: मनोज बाजपेयी की आगामी फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। देश के अलग-अलग हिस्सों में फिल्म के नाम को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। तो वहीं एफएमसी ने भी फिल्म के अनअथराइज्ड टाइटल को लेकर मेकर्स को नोटिस भेजा है। अब लगातार विरोध बढ़ने के बाद फिल्म के निर्माता नीरज पांडे और अभिनेता मनोज बाजपेयी ने एक बयान जारी कर पूरे मामले पर स्पष्टीकरण दिया है। दोनों ने फिल्म के उद्देश्य और टाइटल को लेकर भी सफाई दी है। साथ ही प्रमोशनल चीजें हटाने की भी बात कही है।
फिल्म का उद्देश्य किसी की भावना को ठेस पहुंचाना नहीं
विवाद पर मनोज बाजपेयी ने सफाई देते हुए सोशल मीडिया पर एक बयान जारी किया है। इस बयान में उन्होंने लिखा, ‘लोगों द्वारा साझा की गई भावनाओं और चिंताओं का मैं सम्मान करता हूं और उन्हें गंभीरता से लेता हूं। जब आप जिस चीज का हिस्सा होते हैं, उससे कुछ लोगों को ठेस पहुंचती है, तो यह आपको रुककर उनकी बात सुनने के लिए मजबूर कर देता है। एक अभिनेता के रूप में, मैं किसी फिल्म में अपने द्वारा निभाए जा रहे किरदार और कहानी के माध्यम से ही प्रवेश करता हूं। मेरे लिए यह एक गलत व्यक्ति और उसकी आत्म-साक्षात्कार की यात्रा के बारे में था।
इसका उद्देश्य किसी भी समुदाय के बारे में कोई टिप्पणी करना नहीं था। नीरज पांडे के साथ काम करने के अपने अनुभव में मैंने देखा है कि वो अपनी फिल्मों के प्रति हमेशा गंभीरता और सावधानी बरतते हैं। जनता की भावनाओं को देखते हुए फिल्म निर्माताओं ने प्रचार सामग्री को हटाने का निर्णय लिया है। यह इस बात को दर्शाता है कि चिंताओं को कितनी गंभीरता से लिया जा रहा है।’
फिल्म में है काल्पनिक कहानी
‘घूसखोर पंडित’ की घोषणा होते ही फिल्म के टाइटल में ‘पंडित’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर लोगों ने नाराजगी जताई है। इसे ब्राह्मण समुदाय का अपमान बताया है। अब विवाद बढ़ने पर नीरज पांडे ने इंस्टाग्राम पर अपना एक लंबा-चौड़ा स्पष्टीकरण जारी किया है। अपने बयान में नीरज पांडे ने कहा, ‘हमारी फिल्म एक काल्पनिक पुलिस ड्रामा है। इसमें ‘पंडित’ शब्द का प्रयोग केवल एक काल्पनिक पात्र के बोलचाल के नाम के रूप में किया गया है। कहानी एक व्यक्ति के कामों और विकल्पों पर केंद्रित है। किसी भी जाति, धर्म या समुदाय पर टिप्पणी या प्रतिनिधित्व नहीं करती है। एक फिल्म निर्माता के रूप में मैं अपने काम को गहरी जिम्मेदारी की भावना के साथ करता हूं, ऐसी कहानियां कहना जो अच्छी और सम्मानजनक हों।’
प्रमोशनल सामग्री हटाने की कही बात
अपने बयान में निर्माता ने आगे कहा, ‘मेरी पिछली फिल्मों की तरह, यह फिल्म भी पूरी ईमानदारी से बनाई गई है और इसका एकमात्र उद्देश्य दर्शकों का मनोरंजन करना है। हम समझते हैं कि फिल्म के शीर्षक से कुछ दर्शकों को ठेस पहुंची है और हम उनकी भावनाओं को समझते हैं। इन चिंताओं को देखते हुए हमने फिलहाल सभी प्रचार सामग्री को हटाने का फैसला किया है, क्योंकि हमारा मानना है कि फिल्म को पूरी तरह से देखा जाना चाहिए। इसे उस कहानी के संदर्भ में समझा जाना चाहिए, जिसे हम बताना चाहते हैं, न कि आंशिक झलक के आधार पर। हम जल्द ही दर्शकों के साथ फिल्म साझा करने के लिए उत्सुक हैं।’
एफएमसी ने मेकर्स को टाइटल को लेकर भेजा नोटिस
फिल्म निर्माता संघ (एफएमसी) ने भी ‘घूसखोर पंडित’ को लेकर मेकर्स को नोटिस जारी किया है। एफएमसी का कहना है कि मेकर्स ने नियमों के अनुसार शीर्षक के लिए अनिवार्य अनुमति प्राप्त नहीं की थी। नोटिस में कहा गया कि फिल्म निर्माता नीरज पांडे, जो इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के सदस्य हैं, उन्होंने ‘घुसखोर पाण्डत’ शीर्षक के उपयोग के लिए अनुमति लेने के लिए आवेदन नहीं किया था। ऐसे में बिना अनुमति के इसका उपयोग अनुशासनात्मक कार्रवाई का कारण बन सकता है।
फिल्म में मनोज बाजपेयी बने हैं पुलिसवाले
रिेतेश शाह द्वारा निर्देशित ‘घूसखोर पंडित’ को नीरज पांडे ने प्रोड्यूस किया है। फिल्म में मनोज बाजपेयी ने अजय दीक्षित का किरदार निभाया है, जो एक रिश्वतखोर पुलिसवाला है। फिल्म में मनोज बाजपेयी के अलावा नुसरत भरूचा, कीकू शारदा, दिव्या दत्ता, साकिब सलीम, श्रद्धा दास और अक्षय ओबेरॉय प्रमुख भूमिका में नजर आए हैं।

