रायपुर. छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में शनिवार को चौथे ‘हिंद युग्म साहित्य’ महोत्सव की शुरूआत हुई और इस दौरान भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल को उनके र्चिचत उपन्यास ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ के लिए प्रकाशक ने उन्हें 30 लाख रुपये की रॉयल्टी का प्रतीकात्मक चेक भेंट किया महोत्सव के आयोजकों ने रविवार को बताया कि शहर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में शनिवार को वरिष्ठ कवि नरेश सक्सेना द्वारा दीप प्रज्वलन किए जाने के साथ दो दिवसीय उत्सव की शुरुआत हुई.

इस अवसर पर देश के शीर्षस्थ कवि-कथाकार और भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित विनोद कुमार शुक्ल महोत्सव के मुख्य आकर्षण रहे. उनके र्चिचत उपन्यास ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ की अभूतपूर्व सफलता पर प्रकाशक ने उन्हें 30 लाख रुपये की रॉयल्टी का प्रतीकात्मक चेक भेंट किया. यह उपन्यास मार्च से जून 2025 तक लगातार अमेज.न बेस्टसेलर सूची में पहले स्थान पर रहा. इस दौरान युवा लेखक नीलोत्पल मृणाल भी मौजूद रहे. उन्होंने बताया कि इस मंच से विनोद कुमार शुक्ल की नई पुस्तक ‘कहानियों का कहानियाना’ का विमोचन भी हुआ.

शुक्ल ने इस दौरान कहा, ”कहानियाना शब्द नया है. जब अभिव्यक्ति के लिए कोई शब्द नहीं मिलता, तो मैं नया शब्द गढ़ लेता हूं-जैसे नदियों का समुद्र में मिलना ‘समुद्राना’.” इस अवसर पर उनकी पत्नी सुधा शुक्ल भी मौजूद थीं. आयोजन से जुड़े पदाधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष डॉक्टर रमन सिंह ने भी महोत्सव में शिरकत की.

सिंह ने कहा, ”हिंद युग्म महोत्सव साहित्य, कला और संस्कृति का ऐसा संगम है जो पूरे देश और विश्व में अपनी छाप छोड़ेगा. यह गर्व का विषय है कि देशभर से 100 से अधिक साहित्यकार इसमें शामिल हुए हैं.” उन्होंने विशेष रूप से विनोद कुमार शुक्ल का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका उपन्यास ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ साधारण परिवार की कहानी के माध्यम से समाज की गहरी असमानताओं को उजागर करता है.

इस अवसर पर मौजूद साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा ने कहा कि यदि लेखकों को लेखन से ही जीवनयापन का अवसर मिले, तो निश्चित रूप से युवा बड़ी संख्या में इस क्षेत्र में आएंगे. आयोजकों ने बताया कि महोत्सव के पहले दिन महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के चयनित विद्यार्थियों -अंकिता कौशिक, उदय शंकर साहू, चंचल कुंवर, प्रतीक कश्यप और यशपाल जंघेल ने कविता पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया. दलित आत्मकथा पर विमर्श में ‘ज.ख्म से ज.ुबान तक’ विषय पर सरवर कुमार चहल और राकेश कुमार सिंह ने विचार साझा किए.

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