Close Menu
Rashtrawani
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • देश
  • विदेश
  • खेल
  • व्यापार
  • मनोरंजन
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
प्रमुख राष्ट्रवाणी

रोहित ने कहा टी20 विश्व कप में अर्शदीप और हार्दिक होंगे सफलता की कुंजी

January 28, 2026

आईसीसी टी20: सूर्यकुमार सातवें स्थान पर, अभिषेक शीर्ष पर कायम; ईशान, दुबे और रिंकू ने लगाई लंबी छलांग

January 28, 2026

फिल्म ‘बॉर्डर 2’ ने देश में टिकट खिड़की पर 250 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की

January 28, 2026
Facebook X (Twitter) Instagram
  • Terms
  • About Us – राष्ट्रवाणी | Rashtrawani
  • Contact
Facebook X (Twitter) Instagram
RashtrawaniRashtrawani
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • देश
  • विदेश
  • खेल
  • व्यापार
  • मनोरंजन
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
Subscribe
Rashtrawani
Home»International»हवा में तैरते बच्चे, शून्य-गुरुत्वाकर्षण के बीच जन्म: अंतरिक्ष में क्या हो सकता है
International

हवा में तैरते बच्चे, शून्य-गुरुत्वाकर्षण के बीच जन्म: अंतरिक्ष में क्या हो सकता है

Team RashtrawaniBy Team RashtrawaniJuly 23, 2025No Comments5 Mins Read
Share Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Reddit Telegram Email
हवा में तैरते बच्चे, शून्य-गुरुत्वाकर्षण के बीच जन्म: अंतरिक्ष में क्या हो सकता है
Share
Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

लीड्स: जैसे-जैसे मंगल मिशन संबंधी योजनाओं में तेजी आ रही है, वैसे-वैसे यह सवाल भी उठ रहा है कि मानव शरीर वहां के अनुसार कैसे स्वयं को ढालेगा? क्या अंतरिक्ष में गर्भधारण करना और इसका सुरक्षित रहना संभव है? और पृथ्वी से इतनी दूर पैदा हुए बच्चे का क्या होगा? हममें से अधिकतर लोग जन्म से पहले जिन जोखिमों से गुजरे हैं, उनके बारे में शायद ही कभी सोचते हैं। उदाहरण के लिए लगभग दो-तिहाई मानव भ्रूण जीवित नहीं रह पाते और अधिकतर भ्रूण शुरूआती कुछ सप्ताह में अक्सर महिला को यह पता लगने से पहले ही नष्ट हो जाते हैं कि वह गर्भवती है।

गर्भावस्था को जैविक अहम पड़ावों की एक श्रृंखला के रूप में समझा जा सकता है। हर एक पड़ाव को सही क्रम में होना चाहिए और हर एक पड़ाव के सफल होने की एक निश्चित संभावना होती है। पृथ्वी पर इन संभावनाओं का अनुमान क्लीनिकल अनुसंधान और जैविक मॉडल का उपयोग करके लगाया जा सकता है। मेरा नवीनतम शोध इस बात का पता लगाता है कि ये पड़ाव अंतरग्रहीय अंतरिक्ष की चरम स्थितियों से कैसे प्रभावित हो सकते हैं।

सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण यानी अंतरिक्ष उड़ान के दौरान अनुभव की जाने वाली लगभग भारहीनता की स्थिति गर्भधारण को अधिक कठिन बना देगी, लेकिन भ्रूण के बनने के बाद गर्भवती रहने में शायद अधिक बाधा नहीं डालेगी।
हालांकि शून्य गुरुत्वाकर्षण में जन्म देना और नवजात शिशु की देखभाल करना कहीं अधिक मुश्किल होगा। अंतरिक्ष में आखिरकार कुछ भी स्थिर नहीं रहता। तरल पदार्थ तैरते रहते हैं। लोग भी तैरते हैं। इससे बच्चे को जन्म देना और उसकी देखभाल करना पृथ्वी की तुलना में कहीं अधिक मुश्किल और जटिल प्रक्रिया बन जाती है।

साथ ही भ्रूण गर्भ के अंदर पहले से ही सूक्ष्म-गुरुत्वाकर्षण जैसी स्थिति में विकसित हो रहा होता है। यह गर्भाशय के अंदर ‘एमनियोटिक द्रव’ में सुरक्षित एवं गद्देदार अवस्था में तैरता रहता है। दरअसल, अंतरिक्ष यात्री भी भारहीनता का अनुभव करने के लिए तैयार किए गए पानी के टैंकों में अंतरिक्ष-चहलकदमी का प्रशिक्षण लेते हैं। इस तरह गर्भ भ्रूण को पहले से ही सूक्ष्म-गुरुत्वाकर्षण जैसी स्थिति का अनुभव देता है।

विकिरण

पृथ्वी की सुरक्षात्मक परतों के बाहर एक और भी हानिकारक खतरा है: ब्रह्मांडीय किरणें। ये उच्च ऊर्जा वाले कण हैं जो अंतरिक्ष में लगभग प्रकाश की गति से दौड़ते हैं। ये ऐसे अणु हैं जो अपने सभी इलेक्ट्रॉन खो चुके होते हैं तथा केवल प्रोटॉन एवं न्यूट्रॉन का घना केंद्रक ही बचता है। जब ये नाभिक मानव शरीर से टकराते हैं तो ये गंभीर कोशिकीय क्षति पहुंचा सकते हैं। कभी-कभी किरण बिना किसी चीज से टकराए सीधे गुजर जाती है लेकिन अगर यह डीएनए से टकराती है तो यह उत्परिवर्तन पैदा कर सकती है जिससे कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

कोशिकाओं के जीवित रहने पर भी विकिरण प्रतिरक्षा प्रणाली पर असर डाल सकता है जिसके कारण रोग प्रतिरोधी प्रणाली ऐसे रसायन छोड़ती है जो स्वस्थ ऊतकों को नुकसान पहुंचा सकते हैं और अंगों के कार्य को बाधित कर सकते हैं।

गर्भावस्था के शुरूआती कुछ सप्ताह में भ्रूण की कोशिकाएं तेजी से विभाजित एवं गतिमान होती हैं और प्रारंभिक ऊतक एवं संरचनाएं बनाती हैं। विकास जारी रखने के लिए भ्रूण को इस नाजुक प्रक्रिया के दौरान जीवित रहना जरूरी है। गर्भावस्था का पहला महीना सबसे संवेदनशील समय होता है।

इस अवस्था में उच्च-ऊर्जा वाली ब्रह्मांडीय किरण का एक भी प्रहार भ्रूण के लिए घातक हो सकता है। भ्रूण हालांकि बहुत छोटा होता है और ब्रह्मांडीय किरणें, खतरनाक होते हुए भी, अपेक्षाकृत दुर्लभ होती हैं इसलिए इस पर सीधा प्रहार असंभव है लेकिन अगर ऐसा हुआ तो गर्भपात होने का खतरा है जिसका संभवत: पता भी नहीं लगेगा।

गर्भावस्था के जोखिम

जैसे-जैसे गर्भावस्था का समय बढ़ता है, जोखिम भी बदलते रहते हैं। जब गर्भरक्­त परिसंचरण (मां और भ्रूण को जोड़ने वाला रक्त प्रवाह तंत्र) पहली तिमाही के अंत तक पूरी तरह से विकसित हो जाता है तो भ्रूण तेजी से बढ़ता है। ऐसे में ब्रह्मांडीय किरणों के गर्भाशय की मांसपेशियों से टकराने की संभावना अधिक है जिससे समय से पहले प्रसव हो सकता है।

समय से पूर्व पैदा हुए शिशु की गहन देखभाल के मामले में हालांकि काफी सुधार हुआ है, फिर भी शिशु जितनी जल्दी पैदा होता है, जटिलताओं का जोखिम, खासकर अंतरिक्ष में उतना ही अधिक होता है।
पृथ्वी पर भी गर्भावस्था और प्रसव के दौरान जोखिम होते हैं लेकिन अंतरिक्ष में ये जोखिम और भी बढ़ जाते हैं।

विकास जन्म के साथ ही रुक नहीं जाता। अंतरिक्ष में जन्मा शिशु सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण में बढ़ता रहेगा जिससे उसे शारीरिक समन्वय विकसित करने में बाधा का सामना करना पड़ सकता है। यह समन्वय वे सहज प्रवृत्तियां हैं जो शिशु को अपना सिर उठाना, बैठना और अंतत? चलना सीखने में मदद करती हैं: ये सभी गतिविधियां गुरुत्वाकर्षण पर निर्भर करती हैं।

साथ ही विकिरण का खतरा भी खत्म नहीं होता। जन्म के बाद भी शिशु का मस्तिष्क बढ़ता रहता है और ब्रह्मांडीय किरणों के लंबे समय तक संपर्क में रहने से स्थायी क्षति हो सकती है – जिससे संज्ञानात्मक, स्मृति संबंधी, व्यवहार संबंधी और दीर्घकालिक स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है।

Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email
Previous Articleसंसद में प्रधानमंत्री और गृह मंत्री शाह की मुलाकात, पीएम के विदेश दौरे से पहले बैठक
Next Article भारत-पाकिस्तान पर ट्रंप के दावे जारी, राहुल गांधी का पीएम मोदी पर हमला, कहा- दाल में कुछ काला है
Team Rashtrawani
  • Website

Related Posts

International

भारतीय मूल के व्यक्ति ने पारिवारिक विवाद में पत्नी, तीन रिश्तेदारों की गोली मारकर हत्या की

January 24, 2026
International

‘बाहर के लोगों ने की हिंसा’, प्रदर्शन को लेकर ईरान का बड़ा दावा; कहा- थोपा गया तो युद्ध के लिए तैयार

January 24, 2026
International

ईरान के शीर्ष अभियोजक ने 800 कैदियों की फांसी रोकने के ट्रंप के दावे को खारिज किया

January 23, 2026
Add A Comment
Leave A Reply Cancel Reply

Top Posts

निर्मला सीतारमण ने जातिगत गणना का श्रेय लेने पर तमिलनाडु सरकार को घेरा

May 3, 202546 Views

सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति ने जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की

April 30, 202546 Views

चपरासी से उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के आरोप में एक प्रिंसिपल और प्रोफेसर निलंबित

April 8, 202543 Views
Stay In Touch
  • Facebook
  • WhatsApp
  • Twitter
  • Instagram
Latest Reviews
राष्ट्रवाणी

राष्ट्रवाणी के वैचारिक प्रकल्प है। यहां आपको राष्ट्र हित के ऐसे दृष्टिकोण पर आधारित समाचार, विचार और अभिमत प्राप्त होंगे, जो भारतीयता, हिंदुत्व और पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली, विश्व बंधुत्व और वसुधैव कुटुंबकम के शाश्वत चिंतन को पुष्ट करता है।

संपादक : नीरज दीवान

मोबाइल नंबर : 7024799009

Most Popular

निर्मला सीतारमण ने जातिगत गणना का श्रेय लेने पर तमिलनाडु सरकार को घेरा

May 3, 202546 Views

सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति ने जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की

April 30, 202546 Views

चपरासी से उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के आरोप में एक प्रिंसिपल और प्रोफेसर निलंबित

April 8, 202543 Views
Our Picks

रोहित ने कहा टी20 विश्व कप में अर्शदीप और हार्दिक होंगे सफलता की कुंजी

January 28, 2026

आईसीसी टी20: सूर्यकुमार सातवें स्थान पर, अभिषेक शीर्ष पर कायम; ईशान, दुबे और रिंकू ने लगाई लंबी छलांग

January 28, 2026

फिल्म ‘बॉर्डर 2’ ने देश में टिकट खिड़की पर 250 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की

January 28, 2026
Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • देश
  • विदेश
  • खेल
  • व्यापार
  • मनोरंजन
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
© 2026 Rashtrawani

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.