राष्ट्रवाणी: प्रतिनिधि, रायपुर। राजधानी में पिछले नौ महीने में 1558 सड़क हादसों में 1085 लोग घायल हुए लेकिन पीएम राहत योजना का लाभ सिर्फ 124 घायलों को मिला। यानी हादसों में घायल हुए लोगों का बड़ा हिस्सा योजना के लाभ से बाहर रह गया।
इसी अवधि में 461 लोगों की मौत भी हुई। योजना में सड़क हादसे के पीड़ित को सात दिन तक 1.50 लाख रुपये तक कैशलेस इलाज का प्रविधान है। इसके बावजूद शहर के 200 से ज्यादा निजी अस्पतालों में करीब 20 ही योजना से जुड़े हैं।
सवाल यह है कि हादसे के बाद घायल को तत्काल उपचार उपलब्ध कराने क्या पहले ऐसा अस्पताल ढूंढना पड़ेगा, जहां योजना लागू हो। निजी अस्पतालों का कहना है कि योजना के तहत इलाज करने के बाद भुगतान के लिए प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है और फंड मिलने में देरी होती है। यही वजह है कि कई अस्पताल योजना से जुड़ने से बच रहे हैं।
इसका सीधा असर उस घायल पर पड़ता है, जिसके पास हादसे के वक्त अस्पताल चुनने का समय नहीं होता। 1085 घायलों में कितने योजना के पात्र थे और कितनों को पात्र होने के बावजूद लाभ नहीं मिला, इसका स्पष्ट आंकड़ा विभाग के पास नहीं है। शहर में 200 से ज्यादा निजी अस्पताल हैं, फिर भी योजना से जुड़े अस्पतालों की संख्या करीब 20 ही क्यों है।
पात्र मरीजों को इलाज दिलाने के लिए विभाग ने क्या व्यवस्था की है। इन सवालों के जवाब अब जरूरी हैं। पीएम राहत योजना के तहत पात्र मरीजों को कैशलेस इलाज दिया जा रहा है।
रायपुर में अब तक 124 मरीज योजना के तहत पात्र पाए गए हैं। इनमें डीकेएस अस्पताल सबसे आगे है और यहां सबसे अधिक मरीजों को योजना का लाभ मिला है। निजी अस्पतालों की स्थिति और योजना को लेकर सामने आ रहे अन्य दावों की समीक्षा की जाएगी।
गाइडलाइन स्पष्ट नहीं होने और फंडिंग की समस्या के कारण निजी अस्पतालों को इलाज में असुविधा हो रही है। योजना के तहत इलाज करने के बाद फंड के लिए प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है। भुगतान में देरी होने से अस्पतालों में योजना को लेकर रुचि कम है।
डॉ. राकेश गुप्ता, अध्यक्ष, एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स ऑफ इंडिया, छत्तीसगढ़
