नयी दिल्ली. कांग्रेस ने राष्ट्रीय खेल शासन विधेयक, 2025 को लोकसभा में ”जबरदस्ती पारित” कराने के लिए सरकार की आलोचना करते हुए मंगलवार को दावा किया कि इस विधेयक के परिणामस्वरूप खेल प्रशासन का ”अत्यधिक केंद्रीकरण” हो जाएगा. कांग्रेस महासचिव एवं संचार प्रभारी जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) को सर्वाधिक तरजीही व्यवहार मिलेगा तथा वह देश के सूचना का अधिकार (आरटीआई) जैसे किसी कानून के अधीन नहीं होगा.

उन्होंने कहा, ”राष्ट्रीय खेल शासन विधेयक, 2025 को कल लोकसभा में जबरदस्ती पारित करा दिया गया और आज राज्यसभा में भी इसे शायद इसी तरह पारित करा दिया जाएगा.” शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह ने सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि विधेयक को गहन जांच और व्यापक विचार-विमर्श के लिए समिति को भेजा जाए.

रमेश ने कहा, ”ऐसी समितियों का यही उद्देश्य है लेकिन जैसा कि अतीत में अक्सर होता रहा है, मोदी सरकार ने पूरी तरह से जायज इस अनुरोध को नजरअंदाज कर दिया.” उन्होंने कहा, ”इस विधेयक के परिणामस्वरूप खेल प्रशासन का अत्यधिक केंद्रीकरण हो जाएगा और जाहिर है कि बीसीसीआई को सबसे अधिक विशेषाधिकार प्राप्त होंगे तथा वह आरटीआई जैसे किसी भी देश के कानून के अधीन नहीं होगा.”

लोकसभा ने सोमवार को राष्ट्रीय खेल शासन विधेयक, 2025 तथा राष्ट्रीय डोपिंग रोधी (संशोधन) विधेयक, 2025 को पारित कर दिया और केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि इन विधेयकों के कानून का रूप लेने के बाद खेल के मैदान से गौरव हासिल करने का देश का सपना साकार होगा. उन्होंने यह भी कहा कि ये विधेयक देश में एक पारदर्शी, जवाबदेह और विश्व स्तरीय खेल वातावरण के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.

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