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Home»Blog»कश्मीर से 59 पाकिस्तानी निर्वासित, शौर्य चक्र सम्मानित शहीद पुलिस कर्मी की मां इनमें शामिल नहीं
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कश्मीर से 59 पाकिस्तानी निर्वासित, शौर्य चक्र सम्मानित शहीद पुलिस कर्मी की मां इनमें शामिल नहीं

atulpradhanBy atulpradhanApril 30, 2025No Comments7 Mins Read
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कश्मीर से 59 पाकिस्तानी निर्वासित, शौर्य चक्र सम्मानित शहीद पुलिस कर्मी की मां इनमें शामिल नहीं
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श्रीनगर/जम्मू/कराची. पहलगाम हमले के कुछ दिनों बाद, जम्मू-कश्मीर के अधिकारियों ने 59 पाकिस्तानी नागरिकों को उनके मूल देश वापस भेजने के लिए पंजाब पहुंचाया है. अधिकारियों ने यह जानकारी. अधिकारियों के अनुसार, दशकों से घाटी में रह रहे पाकिस्तानी नागरिकों को विभिन्न जिलों से इकट्ठा किया गया और बसों में पंजाब ले जाया गया, जहां उन्हें सीमा पाकिस्तानी अधिकारियों को सौंप दिया जाएगा. इनमें शौर्य चक्र से सम्मानित शहीद कांस्टेबल मुदस्सिर अहमद शेख की मां भी पहले शामिल थीं.

मई 2022 में आतंकवादियों से लड़ते हुए शहीद हुए कांस्टेबलन मुदस्सिर अहमद शेख की मां शमीमा अख्तर निर्वासित लोगों में से एक थीं. हालांकि, बाद में उन्हें यहीं रहने की अनुमति दे दी गई. शमीमा के देवर मोहम्मद यूनुस ने सावधानीपूर्वक दिए स्पष्टीकरण में कहा कि शहीद मुदस्सिर की मां घर लौट आई हैं और उन्हें निर्वासन के लिए नहीं ले जाया गया. यूनुस ने कहा, “हम भारत सरकार के आभारी हैं.” इससे पहले, मुदस्सिर के चाचा ने संवाददाताओं से कहा था कि उनकी भाभी पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की हैं, इसलिए उन्हें निर्वासित नहीं किया जाना चाहिए था.

उन्होंने कहा, ”मेरी भाभी पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से हैं, जो हमारा क्षेत्र है. केवल पाकिस्तानियों को ही निर्वासित किया जाना चाहिए.” उन्होंने कहा कि मुदस्सिर की मृत्यु के बाद, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने परिवार से मुलाकात की थी और उपराज्यपाल भी दो बार परिवार से मिलने आए थे.

यूनुस ने कहा, ”मेरी भाभी जब यहां आई थीं, तब उनकी उम्र 20 साल थी और वह 45 साल से यहां रह रही हैं. (प्रधानमंत्री नरेन्द्र) मोदी और अमित शाह से मेरी अपील है कि उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए.” शमीमा ने 1990 में जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के फैलने से पहले सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी मोहम्मद मकसूद से विवाह किया था. पुलिसकर्मी की याद में बारामूला शहर के मुख्य चौक का नाम शहीद मुदस्सिर चौक रखा गया है.

मुदस्सिर के प्रशस्ति पत्र के अनुसार, अमरनाथ यात्रा को निशाना बनाने वाली एक बड़ी आतंकवादी साजिश को विफल करने में उनकी भूमिका के लिए उन्हें शांति काल का तीसरे सबसे बड़े सम्मान से 2022 में मरणोपरांत सम्मानित किया गया. पच्चीस मई 2022 को एक वाहन में सवार भारी हथियारों से लैस तीन विदेशी आतंकवादियों की गतिविधि के बारे में विश्वसनीय खुफिया जानकारी मिली थी, जिनका इरादा अमरनाथ यात्रा पर हमला करने का था. इस सूचना के जवाब में, उत्तरी कश्मीर के बारामूला में सुरक्षा बलों द्वारा तेजी से एक संयुक्त अभियान शुरू किया गया.

अभियान टीम के अनुभवी और सतर्क सदस्य कांस्टेबल मुदस्सिर अहमद शेख ने संदिग्ध वाहन को पहचानने में तत्परता दिखाई और उसे चुनौती दी. आसन्न खतरे को भांपते हुए आतंकवादियों ने भागने की कोशिश की. शेख ने अपनी सुरक्षा की परवाह न करते हुए, वाहन पर हमला करके निर्णायक कार्रवाई की. बहादुरी का परिचय देते हुए उन्होंने एक आतंकवादी को गाड़ी से बाहर खींच लिया. इसके बाद शेष आतंकवादियों ने अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके कारण शेख गंभीर रूप से घायल हो गए.

बहुत ज़्यादा खून बहने और असहनीय दर्द से जूझने के बावजूद शेख. ने हिम्मत नहीं हारी और पकड़े गए आतंकवादी से हाथापाई जारी रखी. आख.रिकार उन्होंने उसे मार गिराया. हालांकि, घायल शेख ने अस्पताल ले जाते वक्त दम तोड़ दिया. शमीमा ने अपने पति के साथ मई 2023 में दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से यह पुरस्कार लिया.

पिछले सप्ताह पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद केंद्र ने कई कदमों की घोषणा की थी, जिनमें सिंधु जल संधि को निलंबित करना, इस्लामाबाद के साथ राजनयिक संबंधों को कमतर करना, तथा अल्पकालिक वीजा पर रह रहे सभी पाकिस्तानियों को 27 अप्रैल तक भारत छोड़ने या कार्रवाई का सामना करने का आदेश देना शामिल था.

निर्वासित किए जा रहे 59 लोगों में अधिकतर पूर्व आतंकवादियों की पत्नियां और बच्चे हैं, जो पूर्व आतंकवादियों के लिए 2010 की पुनर्वास नीति के तहत घाटी में लौटे थे. अधिकारियों ने बताया कि इनमें से 36 पाकिस्तानी श्रीनगर में, नौ-नौ बारामूला और कुपवाड़ा में, चार बडगाम में और दो शोपियां जिले में रह रहे थे.

कश्मीरी सैनिक की पत्नी पाकिस्तान जाने के लिए जम्मू से वाघा रवाना

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के एक जवान की पाकिस्तानी पत्नी को वापस पाकिस्तान भेजने के लिए जम्मू से वाघा सीमा के लिए रवाना कर दिया गया है. अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी. अधिकारियों के मुताबिक, मीनल खान अपने पति और कश्मीर के घरोटा निवासी सीआरपीएफ जवान मुनीर खान के साथ जम्मू से पंजाब स्थित वाघा सीमा के लिए रवाना हुई. उन्होंने बताया कि मीनल और मुनीर की दोस्ती सोशल मीडिया के माध्यम से हुई थी और बाद में दोनों ने एक-दूसरे से शादी रचा ली थी.

वाघा सीमा के लिए रवाना होते समय मीनल ने भारत सरकार से देश में ब्याहे पाकिस्तानी नागरिकों को उनके बच्चों से जुदा न करने की अपील की. मीनल ने कहा, “हमें अपने परिवार के साथ रहने की इजाजत दी जानी चाहिए.” उसने यह भी कहा, “हम (पहलगाम) हमले में निर्दोष लोगों की बर्बर हत्या की निंदा करते हैं. उन्हें (हमलावरों को) कड़ी सजा मिलनी चाहिए.” भारत ने 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में लोकप्रिय पर्यटन स्थल बैसरन में हुए आतंकवादी हमले के बाद कुछ विशिष्ट श्रेणियों को छोड़कर, पाकिस्तानी नागरिकों को जारी सभी वीजा को रद्द कर दिया था. पहलगाम हमले में 26 लोग मारे गए थे, जिनमें से अधिकतर पर्यटक थे.

भारतीयों से शादी करने वाले पाकिस्तानियों को वापस भेजने के फैसले पर पुर्निवचार करें: महबूबा मुफ्ती

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने मंगलवार को सरकार से उन पाकिस्तानी नागरिकों को वापस भेजने के फैसले पर पुर्निवचार करने की गुजारिश की, जिन्होंने भारतीयों से शादी की है और कई वर्षों से यहां रह रहे हैं. पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि एक सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है.

मुफ्ती ने ‘एक्स’ पर कहा, “हाल ही में भारत से सभी पाकिस्तानी नागरिकों को वापस भेजने के सरकारी निर्देश ने गंभीर मानवीय चिंताएं पैदा की हैं, खास तौर पर जम्मू कश्मीर में. इससे प्रभावित होने वाली कई महिलाएं हैं, जो 30-40 साल पहले भारत आई थीं, भारतीय नागरिकों से शादी की, परिवार बसाया और लंबे समय से हमारे समाज का हिस्सा रही हैं.” उन्होंने कहा कि दशकों से भारत में शांतिपूर्वक रह रहे लोगों को निर्वासित करना अमानवीय होगा और इससे उनके परिवारों पर गहरा भावनात्मक संकट आएगा.

मुफ्ती ने कहा, “हम सरकार से इस निर्णय पर पुर्निवचार करने तथा महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के प्रति सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह करते हैं.” पूर्व आतंकवादियों से विवाहित कई पाकिस्तानी महिलाएं 2013 में तत्कालीन मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की नीति के तहत कश्मीर आ गईं. इस नीति के तहत उन आतंकवादियों का पुनर्वास संभव हुआ, जो हथियार प्रशिक्षण के लिए पाकिस्तान या पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर गए थे, लेकिन हिंसा का त्याग कर घाटी में वापस लौटना चाहते थे.

बच्चों के उपचार के लिए नयी दिल्ली आए पाकिस्तानी परिवार को बिना सर्जरी लौटना पड़ा

अपने दो नाबालिग बच्चों के इलाज के लिए नई दिल्ली आए पाकिस्तान के एक परिवार को पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत सरकार के आदेश के तहत सर्जरी की प्रक्रिया अधूरी छोड़कर ही सिंध के हैदराबाद शहर लौटना पड़ा. नौ साल के तल्हा और सात साल के ताहा के पिता शाहिद अली ने मंगलवार को कहा कि वह अपने बेटों के कई परीक्षण और मेडिकल वीजा प्राप्त करने की लंबी प्रक्रिया के बाद मार्च में उनके साथ नई दिल्ली गए थे. उनके दोनों बेटों को जल्द से जल्द जीवन रक्षक इलाज की जरूरत है.

उन्होंने कहा, ”दुर्भाग्य की बात है कि पहलगाम की घटना के बाद हालात बदल गए और हमारे पास इतना भी वक्त नहीं था कि हमारी अपील को ठीक से सुना जाए.” उन्होंने कहा, ”हमने बहुत पैसा खर्च किया, लेकिन यह मुद्दा नहीं है. सबसे दुखद बात यह है कि दिल्ली में चिकित्सकों के सर्वोत्तम प्रयासों के बावजूद प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी.” अली ने पाकिस्तानी सरकार से किसी अन्य देश में अपने दोनों बेटों के लिए जीवन रक्षक उपचार की व्यवस्था करने की अपील की.

सोमवार को एक और पाकिस्तानी युवक अयान भी अपने परिवार के साथ नयी दिल्ली से लौट आया. उसकी एक साल पुरानी बीमारी का इलाज पूरा नहीं हो पाया था. अयान को पुलिस ने गलतफहमी में गोली मार दी थी और उसके शरीर का निचला हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया था.

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