इंफाल. पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने बुधवार को कहा कि मणिपुर में एक लोकप्रिय सरकार की जरूरत है. सिंह ने एक कार्यक्रम से इतर संवाददाताओं से कहा कि राज्य की स्थिति के कारण उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा. उन्होंने कहा, ” हम सभी जानते हैं कि राज्य में राष्ट्रपति शासन कैसे लागू हुआ… एक लोकप्रिय सरकार की जरूरत है, और वह बननी भी चाहिए. मैं शुरू से ही लोकप्रिय सरकार के पक्ष में रहा हूं. परिस्थितियों के कारण मुझे इस्तीफा देने को बाध्य होना पड़ा. आप सब जानते हैं.”
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ”मैं समझता हूं कि लोग कठिनाई का सामना कर रहे हैं, और मैं एक लोकप्रिय सरकार की भी कामना करता हूं. मेरी राय में, एक लोकप्रिय सरकार में जनता और प्रशासक आपसी सामंजस्य के साथ अधिक सहजता से आगे बढ़ सकते हैं..” इससे पहले, इंफाल पूर्वी जिले के हिंगांग में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता ने कहा कि असम के लोगों ने राज्य में बेदखली अभियान का पूरे दिल से समर्थन किया है जबकि मणिपुर में अतिक्रमण के खिलाफ उनकी सरकार द्वारा की गई कार्रवाई को उतना समर्थन नहीं मिला.
बीरेन सिंह ने कहा, ” जब मैंने राष्ट्रीय राजमार्ग पर अतिक्रमणकारियों के एक वर्ग को बेदखल किया तो मुझे सांप्रदायिक कहा गया. बेहतर होता यदि मुझे कुछ सहयोग दिया जाता, क्योंकि बेदखली अभियान लोगों और राज्य के लिए था, मेरे लिए नहीं. फिर, मुझे आरक्षित वनों से अतिक्रमणकारियों को बेदखल करने का दोषी ठहराया गया और मुझसे पूछा गया कि मैंने नशीले पदार्थों के उन्मूलन के लिए अभियान क्यों चलाया?”
थाडोउ और मेइती संगठनों ने शांति पर चर्चा के लिए की बैठक
मणिपुर में शांति बहाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए थाडोउ जनजाति का प्रतिनिधित्व करने वाली एक नागरिक संस्था ने बुधवार को यहां प्रमुख मेइती संस्था के साथ एक बंद कमरे में बैठक की. अधिकारियों ने यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि थाडोउ इनपी मणिपुर (टीआईएम) के 13 से अधिक प्रतिनिधियों ने सामुदायिक आपसी समझ कार्यक्रम पर चर्चा करने के लिए यहां एक होटल में ‘कॉर्डिनेशन कमिटी ऑन मणिपुर इंटिग्रिटी(सीओसीओएमआई)’ , अरम्बाई टेंगोल, अखिल मणिपुर यूनाइटेड क्लब संगठन (एएमयूसीओ) और अन्य संगठनों के सदस्यों के साथ बैठक की. टीआईएम ने बैठक को ‘शांति का रोडमैप: सामुदायिक समझ पर सह-अस्तित्व की संधि’ बताया.
शोधकर्ताओं का दावा है कि थाडोउ कुकी समुदाय की सबसे बड़ी उप-जनजाति है लेकिन टीआईएम का कहना है कि वह एक अलग जनजाति है और कुकी समूह का हिस्सा नहीं है. मई 2023 में राज्य में हिंसा भड़कने के बाद यहां टीआईएम और मेइती संगठनों के बीच ये पहली बैठक है. थाडोउ इंपी मणिपुर, दिल्ली में मेइती संगठनों के साथ बैठकें कर चुका है.
टीआईएम के एक बयान में कहा गया है, ”थाडोउ जनजाति और इसे कुकी जनजाति के रूप में पहचानने वालों के बीच भ्रम का एक प्रमुख कारण पहनावे और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों में समानताएं हैं. हालांकि, यह समझना महत्वपूर्ण है कि थाडोउ जनजाति एक विशिष्ट स्वदेशी पहचान है, जबकि कुकी नामकरण, जैसा कि आज प्रयोग किया जाता है, एक राजनीतिक और वैचारिक नाम बन गया है. कुकी नामकरण एक वास्तविक जातीय पहचान नहीं है.” इसमें कहा गया, ”यह हमारे साझा इतिहास में एक निर्णायक क्षण है. आइए हम सच्चाई के लिए एकजुट रहें. मणिपुर में स्थायी शांति का मार्ग पहचान की स्पष्टता, उग्रवाद की अस्वीकृति और सह-अस्तित्व के लिए नई प्रतिबद्धता से शुरू होता है.”

