काठमांडू. नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली 16-17 सितंबर को भारत की आधिकारिक यात्रा पर जा सकते हैं. काठमांडू में विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी. सूत्रों ने बताया कि इस यात्रा के दौरान व्यापार, पर्यटन, सूचना प्रौद्योगिकी, संपर्क, पनबिजली और सीमा जैसे कई बड़े मुद्दों पर चर्चा की जाएगी.

विदेश मंत्री के प्रेस सलाहकार एकराज पाठक ने बताया कि विदेश मंत्रालय प्रस्तावित उच्च-स्तरीय दौरे के लिए एजेंडा और यात्रा कार्यक्रम को अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रहा है. विदेश मंत्री आरजू राणा देउबा ने सोमवार को कहा कि नेपालगंज और दिल्ली के बीच सीधी उड़ानें प्रधानमंत्री ओली की आगामी भारत यात्रा के दौरान एजेंडे में शीर्ष पर होंगी.

देउबा प्रधानमंत्री ओली के साथ भारत जाने वाले प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हो सकती हैं. उन्होंने विदेश मंत्रालय में शीर्ष नेताओं, सांसदों और उद्योगपतियों के साथ बैठक में कहा, “पश्चिमी नेपाल के नेपालगंज शहर और नयी दिल्ली के बीच सीधा हवाई संपर्क हमारे एजेंडे में शीर्ष पर होगा.” देउबा ने कहा, “अगर ऐसा हुआ, तो निश्चित रूप से पश्चिमी नेपाल की तस्वीर बदल जाएगी.” उन्होंने कहा कि सरकार ने इस उद्देश्य के लिए क्षेत्र में आवश्यक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के वास्ते जरूरी जमीनी कार्य पहले ही कर लिया है.
विदेश मंत्री ने दावा किया कि नेपालगंज और दिल्ली के बीच प्रस्तावित सीधी उड़ान से पश्चिमी नेपाल के लगभग 25 जिलों के लोगों को फायदा होगा.

उन्होंने कहा कि अगर हम नेपालगंज और दिल्ली के बीच सीधी उड़ान शुरू करते हैं, तो नेपालगंज तिब्बत स्थित कैलाश-मानसरोवर का प्रवेश द्वार बन सकता है. नेपाल पांच भारतीय राज्यों (सिक्किम, पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड) के साथ 1,850 किलोमीटर से अधिक लंबी सीमा साझा करता है. वह माल और सेवाओं के परिवहन के लिए भारत पर बहुत अधिक निर्भर है. नेपाल, क्षेत्र में भारत के समग्र सामरिक हितों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है. दोनों देशों के नेताओं ने अपने संबोधन में अक्सर सदियों पुराने “रोटी-बेटी के रिश्ते” का जिक्र किया है.

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