राष्ट्रवाणी, 25 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा है कि वर्तमान नियमों और प्रावधानों के अनुसार किसी नगरपालिका के कर्मचारी को नगर निगम में स्थानांतरित नहीं किया जा सकता। इस आधार पर कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा जारी कुम्हारी नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी नेतराम चंद्राकर का तबादला आदेश रद्द कर दिया। राज्य सरकार ने उन्हें रायपुर नगर निगम में डिप्टी कमिश्नर के पद पर स्थानांतरित किया था।

याचिकाकर्ता ने अपने अधिवक्ता संदीप दुबे के माध्यम से दायर याचिका में कहा कि नगरपालिका और नगर निगम दो अलग-अलग संस्थाएं हैं, जिनके सेवा नियम और ढांचा भी अलग हैं। ऐसे में एक संस्था से दूसरी संस्था में सीधे तबादला करना नियमों के विपरीत है।

राज्य सरकार की ओर से पेश विधि अधिकारी ने दलील दी कि वर्ष 1961 के अधिनियम में ऐसा कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है जो नगरपालिका से नगर निगम में स्थानांतरण पर रोक लगाता हो। उन्होंने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता एक शासकीय कर्मचारी है। और प्रशासनिक आधार पर किए गए तबादलों में हस्तक्षेप का कोई औचित्य नहीं है।

सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति पी.पी. साहू की एकलपीठ ने पाया कि प्रचलित नियमों के अनुसार नगरपालिका और नगर निगम के बीच सेवा शर्तों में स्पष्ट अंतर है।

ऐसे में एक कर्मचारी का सीधे स्थानांतरण नियमों के अनुरूप नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासनिक निर्णय भी कानून और नियमों के दायरे में ही होने चाहिए। इसके बाद कोर्ट ने 26 दिसंबर 2024 के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसके तहत नेतराम चंद्राकर को रायपुर नगर निगम भेजा गया था। इस मामले में एक अन्य आदेश को भी चुनौती दी गई थी, जिसमें सौरभ वाजपेयी को पाटन नगर पंचायत से कुम्हारी नगर पालिका में प्रभारी सीएमओ के रूप में स्थानांतरित किया गया था। हालांकि मुख्य विवाद नेतराम चंद्राकर के तबादले को लेकर था, जिस पर कोर्ट ने राहत प्रदान की।

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