राष्ट्रवाणी: पनघट वनस्पति घी, जिसे 1946 में लाला श्री राम के DCM ग्रुप ने लॉन्च किया था, भारत के पुराने और …और पढ़ें पनघट वनस्पति घी 1946 में DCM ग्रुप ने लॉन्च किया लाला श्री राम ने DCM ग्रुप को विशाल औद्योगिक साम्राज्य बनाया यह घी थोक बाजार, हलवाइयों और घरों में आज भी लोकप्रिय बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली।

भारत में कई घी ब्रांड हैं। इनमें कई बहुत पुराने ब्रांड भी हैं, जिनका इतिहास कई दशकों पहले का है। इनमें से एक है पनघट वनस्पति घी (Panghat Ghee)।

70-80 के दशक के बाद 90s में पैदा हुए भी इस घी को खूब पहचानते होंगे। तब घरों में डालडा के साथ-साथ पनघट वनस्पति घी का खूब इस्तेमाल होता था। पर इसकी शुरुआत किसने की थी?

आइए जानते हैं। पनघट वनस्पति को मूल रूप से 1946 में ऐतिहासिक दिल्ली क्लॉथ एंड जनरल मिल्स (DCM) ग्रुप ने लॉन्च किया था, जिसे उद्योगपति लाला श्री राम ने आगे बढ़ाया और मैन्युफैक्चरिंग तथा कंज्यूमर गुड्स के क्षेत्र में इसका विस्तार किया।वैसे DCM ग्रुप की स्थापना मूल रूप से 1889 में हुई थी।

मगर लाला श्री राम ने इसके विशाल औद्योगिक साम्राज्य को खड़ा करने में अहम और आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई थी। इसके प्रमुख सेक्टर्स में टेक्सटाइल, चीनी, केमिकल और वनस्पति शामिल रहे। पनघट घी ब्रांड का शुरुआती लक्ष्य थोक बाजार, हलवाइयों, होटलों और रेस्टोरेंटों के लिए 15 किलो के बड़े डिब्बे तैयार करना था।

आज भी इसका उपयोग मुख्य रूप से पारंपरिक भारतीय मिठाइयों, बेकिंग और घरेलू खाना पकाने में किया जाता है।दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में यह ब्रांड अपने पारंपरिक और बेहतरीन गुणवत्ता वाले वनस्पति घी के लिए पीढ़ियों से जाना जाता रहा है। पनघट वनस्तपि घी के साथ-साथ कच्ची घानी सरसों का तेल भी पेश किया गया।

अन्य वैरायटी में यह ब्रांड रिफाइंड सोयाबीन, मूंगफली और कॉटनसीड ऑयल भी बेचता है। 1940 और 1950 के दशक में जब भारत में देशी घी महंगा था, तब पनघट ने भी रसोई और खानपान के क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बनाई थी। पनघट घी को लॉन्च करने वाले लाला श्री राम एक जाने-माने और जन-हितैषी समाजसेवी, एक उद्योगपति और भारतीय व्यापार जगत के नए रास्ते दिखाने वाले दूरदर्शी नेताओं में से एक माने जाते हैं।

उन्होंने एक साधारण कर्मचारी के तौर पर शुरुआत की और आगे चलकर भारत के सबसे बड़े व्यापारिक समूहों में से एक – DCM ग्रुप – की स्थापना की। साधारण आर्थिक स्थिति वाले परिवार में जन्मे श्री राम ने अपने 79 साल के जीवनकाल में एक ऐसा औद्योगिक साम्राज्य खड़ा किया जो कई तरह के सामान बनाता था। जैसे – कपड़ा, चीनी, रसायन, वनस्पति, मिट्टी के बर्तन, पंखे, सिलाई मशीनें, इलेक्ट्रिक मोटर और कैपेसिटर आदि।

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