राष्ट्रवाणी: प्रतिनिधि, रायपुर। कभी बैंक में पैसे जमा करने या निकालने के लिए लंबी कतार लगती थी। अब वही काम मोबाइल की स्क्रीन पर हो रहा है।
दुकान पर जेब से रुपये निकालने के बजाय QR कोड स्कैन हो रहा है और कुछ सेकंड में भुगतान पूरा हो जाता है। प्रदेश में पिछले करीब 10 वर्षों में बैंकिंग की यह तस्वीर तेजी से बदली है। SLBC के आंकड़े बताते हैं कि 2016 के मुकाबले डिजिटल भुगतान के साधनों का नेटवर्क प्रदेशभर में तेजी से बढ़ा है।
मोबाइल बैंकिंग के 1.79 करोड़ से ज्यादा और इंटरनेट बैंकिंग के 1.18 करोड़ कनेक्शन दर्ज किए गए हैं। UPI इस बदलाव का सबसे बड़ा माध्यम बनकर सामने आया है। रायपुर में 1.37 करोड़ से ज्यादा UPI आईडी दर्ज हैं।
दुर्ग में यह संख्या 86.28 लाख और बिलासपुर में 70.57 लाख से ज्यादा है। रायगढ़ में 57.88 लाख, जांजगीर-चांपा में 46.99 लाख और कोरबा में 42.06 लाख कनेक्शन हैं। डिजिटल भुगतान की सुविधा अब सिर्फ बड़े बाजार तक सीमित नहीं है।
बस्तर, कांकेर, सरगुजा, सूरजपुर और बलरामपुर जैसे जिलों में भी UPI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। यानी बैंकिंग की सुविधा शाखा से निकलकर मोबाइल और दुकानों के QR कोड तक पहुंच गई है। डिजिटल भुगतान बढ़ने के साथ दुकानदारों के पास भी इसके साधन बढ़े हैं।
रायपुर में 3.39 लाख QR कोड दर्ज हैं। दुर्ग में 1.91 लाख और बिलासपुर में 1.22 लाख QR कोड हैं। POS मशीनों की संख्या भी लगातार बढ़ी है।
इससे कार्ड और डिजिटल भुगतान स्वीकार करना कारोबारियों के लिए आसान हुआ है। बस्तर में 20.20 लाख और कांकेर में 17.07 लाख से अधिक UPI कनेक्शन दर्ज किए गए हैं। सरगुजा में 21.44 लाख, सूरजपुर में 14.58 लाख और बलरामपुर में 12.16 लाख कनेक्शन हैं।
डिजिटल भुगतान अब प्रदेश के दूरस्थ इलाकों में भी रोजमर्रा की बैंकिंग का हिस्सा बन रहा है।
