Punjab Floods: जानकारी के अनुसार, शुक्रवार शाम तक धुस्सी बांध का काफी हिस्सा पानी में बह चुका था। जिला प्रशासन ने ससराली इलाके में रेड अलर्ट जारी कर दिया है। धुस्सी बांध को पक्का करने की कोशिश की जा रही थी। इसके अलावा 700 मीटर की दूरी पर प्रशासन ने एक और बांध बनाना शुरू किया था। रात को पानी धुस्सी बांध तोड़कर आगे बने बांध के नजदीक पहुंच गया है।

प्रशासन ने लोगों के लिए जारी की एडवाइजरी
ससराली में बने धुस्सी बांध में दरारें बुधवार को सही की गई थी, लेकिन पानी का बहाव लगातार नीचे से मिट्टी बहा रहा था। देर रात तक लोग बांध के किनारे डटे रहे। इसके बाद प्रशासन ने एडवाइजरी जारी की कि ससराली का बांध गंभीर दबाव में है। इससे ससराली, बूंट, रावत, हवास, सीड़ा, बूथबढ़, मंगली, टांडा, ढेरी, ख्वाजके, खासी खुर्द, मंगली कादर, मत्तेवाड़ा, मांगट और मेहरबान इलाकों में भी पानी आ सकता है।

प्रशासन ने लोगों को राहोंरोड, चंडीगढ़ रोड, टिब्बा रोड, कैलाश नगर, गांव ससराली, खाली कलां मंडी, खाली कलां स्कूल, भूखड़ी स्कूल, मत्तेवाड़ा स्कूल व मत्तेवाड़ा मंडी सहित अन्य जगहों पर बनाए गए स्टे होम में जाने की सलाह दी है।

सारी रात बांध पर पहरा देते रहे लोग
ससराली में बने धुस्सी बांध को पानी लगातार नुकसान पहुंचा रहा था। बांध का करीब पचास प्रतिशत हिस्सा टूट चुका है। पूरी रात ससराली व आसपास के गांवों के युवक बांध पर डटे रहे और पहरा देते रहे। सुबह होते ही पंजाब पुलिस और सेना ने बांध की स्थिति को देखते हुए आम लोगों को बांध पर जाने से मना कर दिया गया।

इसके बाद सेना बांध को मजबूत करने में जुटी। मांगट कॉलोनी में भी लोगों ने बांध बनाना शुरू कर दिया है। डीसी हिमांशु जैन ने बताया कि ससराली में तीन पॉइंट हैं। एक पर हालात खराब हैं। वहां काम चल रहा है। उन्होंने जनता से सोशल मीडिया पर चल रही बांध टूटने की फर्जी खबरों से न घबराने की अपील की।

बाढ़ से बर्बाद हुई 1.72 हेक्टेयर फसल, 45 लोगों की जा चुकी जान
पंजाब में बाढ़ किसानों पर कहर बरपा रही है। शुक्रवार को मैदानी व पहाड़ी इलाकों में बारिश से राहत दिखी लेकिन बांधों से छोड़े जा रहा पानी पंजाब के जिलों में तबाही मचा रहा है। अभी तक बाढ़ की वजह से 1.72 हेक्टेयर फसल बर्बाद हो चुकी है। बड़ा संकट पानी उतरने के बाद सामने आएगा क्योंकि खेतों में बहुत ज्यादा गाद जम चुकी है। इसे निकालना बड़ी चुनौती से कम नहीं है।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि गाद निकालने में काफी खर्च होगा और यदि इसे समय पर नहीं निकाला गया तो अगली फसल लेने में भी बहुत कठिनाई आएगी। फाजिल्का जिले में सबसे ज्यादा 18073 हेक्टेयर क्षेत्र में फसल बर्बाद हुई है। इसी तरह मानसा में 11041 हेक्टेयर, अमृतसर में 26701, बठिंडा में 587, फिरोजपुर में 17221, गुरदासपुर में 40169, होशियारपुर में 8322, जालंधर में 4800, कपूरथला में 17817, लुधियाना में 52, मोगा में 2240, पटियाला में 808, रूपनगर में 300, संगरूर में 6500, मोहाली में 2000, शहीद भगत सिंह नगर में 362 व तरनतारन में 12828 हेक्टेयर फसल बाढ़ के पानी में डूब चुकी है।

उधर, लोगों की जान बचाने और बांधों को मजबूत करने के लिए खासी जद्दोजहद करनी पड़ रही है। सूबे में सैन्य, अर्धसैनिक बलों व एनडीआरएफ की टीमें बढ़ा दी गई हैं। सैन्य बलों व एनडीआरएफ की 24-24 व बीएसएफ की एक टुकड़ी राहत कार्यों में जुटी हुई है। अभी तक जवानों ने बाढ़ में फंसे 21929 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया है। सरकार की ओर से 196 राहत केंद्र जारी हैं। पंजाब के 1948 जिले बाढ़ की चपेट में है, जहां 384322 लोग इस आपदा से ग्रस्त हैं। अभी तक 45 लोगों की जान जा चुकी है जबकि लापता तीन लोगों का कोई अता-पता नहीं लग पाया है।

सेना ने दूल्हे समेत 11 रिश्तेदारों को रेस्क्यू कर पैलेस पहुंचाया
गुरदासपुर के गांव चौंतरा के एक युवक की शादी थी, लेकिन बारात से ठीक एक दिन पहले गांव में रावी दरिया का पानी भरना शुरू हो गया। गांव के आसपास पांच फीट तक पानी जमा हो गया। ऐसे में परिवार को चिंता हो गई कि बेटे की शादी कैसे होगी और बारात कैसे पहुंचेगी। गांव आलेचक्क के रिटायर सूबेदार गुरप्रीत सिंह के सहयोग से राहत कार्य चला रहे सेना की 270 इंजीनियर रेजीमेंट के जवानों को मामले की सूचना मिली तो वे तुरंत नाव से गांव चौंतरा पहुंचे और दूल्हे व उसके 11 रिश्तेदारों को गांव से निकालकर पैलेस पहुंचाया।

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