सोशल मीडिया पर सजा के बाद राजपाल यादव का पहला पोस्ट-बॉलीवुड के जाने-माने अभिनेता और कॉमेडियन राजपाल यादव एक बार फिर कानूनी विवादों में फंसे हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने 10 जुलाई 2026 को चेक बाउंस मामले में उनकी तीन महीने की जेल की सजा को बरकरार रखा है। इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर इस मामले की चर्चा तेज हो गई। इसी बीच राजपाल ने अपने इंस्टाग्राम पर ‘कैच मसाला’ का एक प्रमोशनल वीडियो शेयर किया, जिसमें बॉलीवुड के अक्षय कुमार भी नजर आए। इस वीडियो ने फैंस का ध्यान अपनी ओर खींचा और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ।
2010 में लिए गए कर्ज से शुरू हुआ विवाद-राजपाल यादव की कानूनी परेशानी की शुरुआत 2010 में हुई जब उन्होंने अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ के लिए M/s मुरली प्रोजेक्ट्स से करीब 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो सकी और उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। इसके बाद वे तय समय पर कर्ज नहीं चुका पाए। ब्याज बढ़ता गया और बकाया रकम लगभग 9 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। मामला अदालत तक पहुंचा और कई सालों तक कानूनी लड़ाई चली।
कोर्ट में कैसे बढ़ा मामला, जानिए पूरा घटनाक्रम-2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राजपाल और उनकी पत्नी राधा यादव को चेक बाउंस का दोषी मानते हुए छह महीने की जेल की सजा सुनाई। 2019 में सेशंस कोर्ट ने भी यह फैसला सही माना। राजपाल ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की। जून 2024 में हाईकोर्ट ने उन्हें कुछ राहत देते हुए सजा पर रोक लगाई और बकाया राशि चुकाने के लिए कहा। लेकिन बाद की सुनवाई में अदालत ने पाया कि तय शर्तों का पालन नहीं हुआ।
सरेंडर, जमानत और फिर अंतिम फैसला-दिल्ली हाईकोर्ट ने 2 फरवरी 2026 को राजपाल यादव को सरेंडर करने का आदेश दिया। उन्होंने 5 फरवरी को सरेंडर किया और जेल में कुछ समय बिताया। 16 फरवरी को उन्होंने 1.5 करोड़ रुपये जमा कर जमानत हासिल की। मामला अदालत में चलता रहा और 10 जुलाई 2026 को हाईकोर्ट ने दोषसिद्धि और तीन महीने की जेल की सजा को बरकरार रखा। इस फैसले के बाद मामला फिर चर्चा में आ गया।
10 जुलाई के फैसले में कोर्ट ने क्या कहा?-दिल्ली हाईकोर्ट ने पहले के फैसले को सही ठहराते हुए राजपाल यादव पर प्रत्येक मामले में 1.05 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया, जो कुल 7.35 करोड़ रुपये होता है। उनकी पत्नी राधा यादव पर भी प्रत्येक मामले में 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। अदालत ने कहा कि कई बार समझौते के मौके दिए गए, लेकिन बार-बार भरोसा तोड़ा गया। इसी वजह से सजा बरकरार रखी गई।
