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Home»International»राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच ‘बहुत सकारात्मक’ संबंध हैं: अमेरिकी अधिकारी
International

राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच ‘बहुत सकारात्मक’ संबंध हैं: अमेरिकी अधिकारी

Team RashtrawaniBy Team RashtrawaniSeptember 25, 2025No Comments7 Mins Read
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राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच ‘बहुत सकारात्मक’ संबंध हैं: अमेरिकी अधिकारी
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न्यूयॉर्क. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच “बहुत, बहुत सकारात्मक” संबंध हैं और दोनों नेताओं की मुलाकात होगी. अमेरिकी विदेश विभाग के एक अधिकारी ने यह बात कही और रेखांकित किया कि अगली क्वाड शिखर बैठक इस वर्ष के अंत या अगले वर्ष कराने के लिए तैयारियां की जा रही हैं.

भारत इस बार क्वाड शिखर बैठक में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के नेताओं की मेजबानी करेगा. पिछली क्वाड शिखर बैठक 2024 में अमेरिका के विलमिंगटन, डेलावेयर में हुई थी. विदेश विभाग के अधिकारी ने पीटीआई-भाषा से कहा, ”जहां तक आगामी बैठक की बात है, मैं राष्ट्रपति की ओर से कोई भी घोषणा पहले से नहीं करना चाहता, लेकिन मुझे पूरा विश्वास है कि आप दोनों (प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप) की मुलाकात होते हुए देखेंगे. ” अधिकारी ने कहा, ”उनके बीच बहुत, बहुत सकारात्मक संबंध हैं. हम क्वाड शिखर बैठक की योजना पर काम कर रहे हैं. यह किसी न किसी समय होगी, यदि इस वर्ष नहीं तो अगले साल की शुरुआत में होगी. तारीख (तय करने) पर काम चल रहा है.” उन्होंने अमेरिका-भारत के बीच वर्तमान सम्पर्क को ह्लअत्यंत उपयोगीह्व बताया और कहा कि आने वाले महीनों में ह्ललगातार सकारात्मक प्रगतिह्व की उम्मीद की जा सकती है.

अधिकारी ने कहा, ”हमारे बीच कुछ मतभेद हैं. पिछले कुछ सप्ताह में यह स्पष्ट हो गया है कि हम इन मतभेदों को दूर करने को लेकर काम कर रहे हैं, खासकर व्यापार और रूसी तेल की खरीद को लेकर. हम इनके समाधान को लेकर काम कर रहे हैं.ह्व उन्होंने इस ओर ध्यान दिलाया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल में प्रधानमंत्री मोदी को उनके 75वें जन्मदिन की बधाई देने के लिए फोन किया था और उस बातचीत को “बहुत सकारात्मक” बताया.

राजनयिक मोर्चे की चर्चा करते हुए अधिकारी ने कहा कि भारत में अमेरिका के राजदूत के रूप में नामित और दक्षिण और मध्य एशिया के विशेष दूत र्सिजयो गोर, राष्ट्रपति ट्रंप के बेहद करीबी हैं. उन्होंने कहा कि उनकी नियुक्ति की जल्द ही पुष्टि की जाएगी और उसके बाद वह नयी दिल्ली में अमेरिकी राजदूत होंगे. उन्होंने कहा कि इससे पता चलता है कि ट्रंप भारत अमेरिका संबंधों को कितना महत्व देते हैं.

अधिकारी ने अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो की 80वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक से पहले भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ हुई बैठक को भी रेखांकित किया. सोमवार को हुई इस घंटे भर की बैठक को ह्लबेहद उपयोगीह्व बताते हुए, अधिकारी ने कहा कि बातचीत में व्यापार, रक्षा और तकनीक जैसे कई मुद्दों पर चर्चा हुई.

हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि दोनों देशों के रिश्तों में “थोड़ी खटास” रही है किंतु अधिकारी ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप अपने विचारों को लेकर स्पष्ट हैं और ” यदि वह किसी देश से हताश होते हैं तो इसे छिपाते नहीं हैं”, जो अमेरिका की स्थिति को पारदर्शी बनाता है. उन्होंने कहा, ह्लहम अपने दोस्तों के साथ स्पष्ट रहते हैं और हम भारत को एक अच्छा दोस्त, भागीदार और भविष्य का सहयोगी मानते हैंह्व. भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद जारी रखने के मुद्दे पर अधिकारी ने स्वीकार किया कि यह मुद्दा इस सप्ताह रुबियो और जयशंकर की द्विपक्षीय बैठक में उठाया गया.

अधिकारी ने कहा, ह्लयह मुद्दा हर बैठक में उठाया जाता है… राष्ट्रपति पूरी तरह स्पष्ट हैं. वह यूक्रेन युद्ध को समाप्त करना चाहते हैं. वह नहीं चाहते कि रूस की कोई आय हो… उन्होंने यह बात अपने यूरोपीय साझेदारों और भारत, दोनों से स्पष्ट रूप से कही है. हमने इस बात को हर अवसर पर उठाया है कि हम (रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर) पुतिन को प्राप्त होने वाली राजस्व रेखा (आय) को समाप्त करना चाहते हैं.ह्व यह पूछे जाने पर कि अमेरिका चीन पर ऐसा ही दबाव क्यों नहीं बना रहा, अधिकारी ने कहा कि ट्रंप प्रशासन बीजिंग के साथ अपने तरीके से निबट रहा है और वहां भी इसी प्रकार के संदेश (अमेरिका द्वारा लिये जाने वाले कड़े फैसले) सुने जा सकते हैं.
अधिकारी ने कहा कि भारत पर ट्रंप प्रशासन द्वारा लगातार जो दबाव डाला जा रहा है वह यूरोपीय संघ सहित कुछ अन्य देशों पर डाले जा रहे इसी तरह के दबाव से अलग नहीं है और उन्हें भी इसी प्रकार के ह्लकठिन संदेश (कड़े निर्णय)ह्व दिए जा रहे हैं.

उन्होंने अमेरिकी संसद में पेश एक विधेयक का उल्लेख किया, जिसमें रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत शुल्क लगाने का प्रस्ताव है. उन्होंने कहा कि इस विधेयक के प्रस्तावों को देखते हुए वाशिंगटन ने वर्तमान में 25 प्रतिशत का जो शुल्क लगा रखा है, वह ह्लइतना बुरा प्रतीत नहीं होता.ह्व अधिकारी ने कहा, ”हम इन देशों पर दबाव डालते रहेंगे ताकि वे रूसी ऊर्जा से होने वाली आय को बंद करें”.

अमेरिका ने रूसी तेल की खरीद को लेकर भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया है, जिससे भारतीय निर्यात पर कुल अमेरिकी शुल्क ब­ढ़कर 50 प्रतिशत तक पहुंच गया है. यह शुल्क अमेरिका द्वारा किसी भी देश पर लगाये गये शुल्क की तुलना में सबसे अधिक में से एक है.

विदेश विभाग के अधिकारी ने कहा कि अमेरिका अभी तक भारत को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में ह्लएक महत्वपूर्ण साझेदारह्व मानता है.
उन्होंने इस बात की पुष्टि की कि अमेरिका ने ईरान स्वतंत्रता एवं प्रसार रोधी कानून (आईएफसीए) के तहत दी गई छूटों को समाप्त कर दिया है. इसके तहत अफगानिस्तान में पुर्निनर्माण कार्यों के अंतर्गत चाबहार बंदरगाह का भारत द्वारा किए जाने वाले उपयोग के लिए दी गयी छूट भी वापस ले ली गयी हैं.

इसी बात को विस्तार देते हुए अधिकारी ने कहा,ह्ल राष्ट्रपति (ईरान पर) अधिकतम दबाव की नीति वाले अभियान पर लौट रहे हैं… और इसके साथ ही न केवल भारत बल्कि सभी देशों के लिए चाबहार बंदरगाह तक पहुंच की अनुमति रद्द कर दी गई है. आईआरजीसी (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर) को जो भी आय होगी, उस पर अब प्रतिबंध लगाए जाएंगे, जिनमें चाबहार बंदरगाह (से होने वाली आय) भी शामिल है.ह्व एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा एच1बी वीजा आवेदकों के लिए हाल में घोषित 100,000 डॉलर के शुल्क का है जिसके बारे में अधिकारी ने कहा कि अमेरिका इस मुद्दे पर भारत के साथ सम्पर्क बनाए हुए है. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह शुल्क केवल नए आवेदकों के लिए है, वर्तमान एच1बी वीजा धारकों के लिए नहीं है.

अधिकारी ने कहा, ह्लहमने भारत को यह बात स्पष्ट कर दी है. हमें अब तक कोई खास आपत्ति नहीं मिली है. देखेंगे कि यह कैसे चलता है. इसका एक मकसद आवेदन प्रक्रिया में धोखाधड़ी को रोकना है. जो कंपनियां अत्यधिक योग्य पेशेवरों को लाना चाहती हैं, वे यह शुल्क देकर ऐसा करती रहेंगी.ह्व.

अधिकारी ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस की इस वर्ष हुई भारत यात्रा का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने भारत-अमेरिका संबंधों को ह्ल21वीं सदी को परिभाषित करने वाले सबसे महत्वपूर्ण रिश्तों में से एकह्व बताया था.

विदेश विभाग के अधिकारी ने कहा, ह्लयही इस (ट्रंप) प्रशासन का भी मानना है, और हम इन मुद्दों पर काम करना जारी रखेंगेह्व.
उन्होंने इस बात की ओर भी ध्यान दिलाया कि विदेश मंत्री रुबियो के पद भार संभालने के बाद जनवरी में हुई क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक उनका पहला विदेश दौरा था. इसके बाद फरवरी में विदेश मंत्री जयशंकर और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ उनकी व्हाइट हाउस में द्विपक्षीय बैठक हुई थी.. अधिकारी ने दावा किया, ” यदि आप इस (रिश्तों में खटास आने के वर्तमान) संक्षित दौर से थोड़ा पीछे हटकर संबंधों को देखते हैं तो वास्तव में यह सकारात्मक दिशा में ब­ढ़ रहे हैं और इनका लगातार विस्तार हो रहा है.

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संपादक : नीरज दीवान

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