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Home»Business»‘रचनात्मक विनाश’ की अवधारणा पर शोध के लिए तीन अर्थशास्त्रियों को अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार
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‘रचनात्मक विनाश’ की अवधारणा पर शोध के लिए तीन अर्थशास्त्रियों को अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार

Team RashtrawaniBy Team RashtrawaniOctober 13, 2025No Comments10 Mins Read
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‘रचनात्मक विनाश’ की अवधारणा पर शोध के लिए तीन अर्थशास्त्रियों को अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार
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स्टॉकहोम. आर्थिक विकास पर नवाचार के प्रभाव की व्याख्या और ‘रचनात्मक विनाश’ नाम की एक प्रमुख आर्थिक अवधारणा पर शोध के लिए जोएल मोकिर, फिलिप एगियन और पीटर हॉविट को सोमवार को इस साल के अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किए जाने की घोषणा की गई.

नोबेल समिति ने कहा कि विजेता अर्थशास्त्र के प्रति विपरीत, लेकिन पूरक दृष्टिकोणों का प्रतिनिधित्व करते हैं. मोकिर एक आर्थिक इतिहासकार हैं, जिन्होंने ऐतिहासिक स्रोतों का इस्तेमाल करके दीर्घकालिक रुझानों का गहन अध्ययन किया, जबकि हॉविट और एगियन ने यह समझाने के लिए गणित का सहारा लिया कि ‘रचनात्मक विनाश’ कैसे काम करता है.

‘रचनात्मक विनाश’ से आशय उस आर्थिक अवधारणा से है कि जब एक नया और बेहतर उत्पाद या प्रौद्योगिकी बाजार में दस्तक देती है, तो पुराने उत्पाद बेचने वाली या पुरानी प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करने वाली कंपनियां घाटे में आ जाती हैं. नीदरलैंड में जन्मे मोकिर (79) नॉर्थवेस्टर्न यूनिर्विसटी से, फ्रांस में जन्मे एगियन (69) कॉलेज डी फ्रांस और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से तथा कनाडा में जन्मे हॉविट (79) ब्राउन यूनिर्विसटी से हैं. मोकिर ने समाचार एजेंसी ‘एसोसिएटेड प्रेस’ से बातचीत में अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार जीतने पर विस्मय जाहिर किया.

उन्होंने कहा, ह्ललोग हमेशा ऐसा कहते हैं, लेकिन इस मामले में मैं सच कह रहा हूं-मुझे इस बात का कोई अंदाजा नहीं था कि ऐसा कुछ होने वाला है.ह्व मोकिर के मुताबिक, उनके छात्रों ने उनसे नोबेल पुरस्कार जीतने की संभावनाओं के बारे में पूछा था. उन्होंने बताया, ह्लमैंने उनसे कहा कि मेरे अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार जीतने के बजाय पोप चुने जाने की संभावना ज्यादा है… और वैसे भी मैं यहूदी हूं.ह्व मोकिर अगले कुछ महीने में 80 साल के हो जाएंगे, लेकिन उन्होंने कहा कि उनका रिटायर होने का कोई इरादा नहीं है. उन्होंने कहा, ह्लयह उस तरह का काम है, जिसे करने का मैंने सपना देखा.ह्व एगियन ने भी नोबेल पुरस्कार जीतने पर विस्मय जाहिर किया. उन्होंने स्टॉकहोम में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में फोन के माध्यम से कहा, ह्लमैं जो महसूस कर रहा हूं, उसे शब्दों में बयां नहीं कर पा रहा हूं.ह्व एगियन ने कहा कि वह नोबेल पुरस्कार राशि अपनी शोध प्रयोगशाला में लगाएंगे. दुनिया में जारी व्यापार युद्धों और बढ़ते संरक्षणवाद के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ह्लमैं अमेरिका में संरक्षणवादी रवैये का स्वागत नहीं करता हूं. यह विश्व के विकास और नवाचार के लिए अच्छा नहीं है.ह्व विजेताओं को अर्थशास्त्र की एक प्रमुख अवधारणा ‘रचनात्मक विनाश’ को बेहतर ढंग से समझाने और उसका परिमाणन करने का श्रेय दिया गया. कहा जाता है कि अर्थशास्त्री जोसेफ शुम्पीटर ने 1942 में अपनी किताब ‘पूंजीवाद, समाजवाद और लोकतंत्र’ में ‘रचनात्मक विनाश’ की अवधारणा पेश की थी.

नोबेल समिति ने कहा कि मोकिर ने ह्लयह प्रर्दिशत किया कि अगर यह सुनिश्चित करना है कि एक के बाद एक नये नवाचार स्वत: प्रक्रिया के तहत सामने आएं, तो हमें न केवल यह जानना होगा कि कौन-सी चीज काम करती है, बल्कि हमें इस बात की वैज्ञानिक समझ भी हासिल करनी होगी कि वह क्यों काम करती है.ह्व समिति ने कहा कि एगियन और हॉविट ने सतत विकास के पीछे के तंत्र का अध्ययन किया, जिसमें 1992 के एक लेख में उल्लिखित तंत्र भी शामिल है, जिसके तहत ‘रचनात्मक विनाश’ को समझाने के लिए एक गणितीय मॉडल तैयार किया गया था.

एगियन ने 2017 में फ्रांस में राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान इमैनुएल मैक्रों के आर्थिक कार्यक्रम को आकार देने में मदद की थी. हाल ही में उन्होंने फ्रांस में एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता आयोग की सह-अध्यक्षता की, जिसने 2024 में राष्ट्रपति मैक्रों को सौंपी रिपोर्ट में देश को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में अग्रणी शक्ति के रूप में स्थापित करने के लिए 25 सिफारिशें कीं.

अर्थशास्त्र के लिए नोबेल पुरस्कार समिति के अध्यक्ष हैस्लर ने कहा, ह्लपुरस्कार विजेताओं का काम दर्शाता है कि आर्थिक विकास को हल्के में नहीं लिया जा सकता. हमें रचनात्मक विनाश को रेखांकित करने वाली प्रणालियों को कायम रखना होगा, ताकि हम फिर से आर्थिक ठहराव के दौर में न अटक जाएं.ह्व अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार के तहत दी जाने वाली 1.1 करोड़ स्वीडिश क्रोनर (करीब 12 लाख अमेरिकी डॉलर) की धनराशि का आधा हिस्सा मोकिर को मिलेगा, जबकि शेष भाग एगियन और हॉविट में बराबर बंटेगा. विजेताओं को 18 कैरेट का स्वर्ण पदक और एक प्रशस्ति पत्र भी मिलेगा.

पिछले साल अर्थशास्त्र का नोबेल तीन अर्थशा्त्रिरयों-डेरॉन ऐसमोग्लू, साइमन जॉनसन और जेम्स ए रॉबिंसन को दिया गया था, जिन्होंने इस बात का अध्ययन किया था कि कुछ देश अमीर और अन्य गरीब क्यों हैं. उन्होंने इस बात को प्रमाणित किया था कि अधिक स्वतंत्र, खुले समाजों के समृद्ध होने की संभावना अधिक होती है.

अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार को औपचारिक रूप से ‘अल्फ्रेड नोबेल की याद में अर्थशास्त्र में बैंक ऑफ स्वीडन पुरस्कार’ के रूप में जाना जाता है. सेंट्रल बैंक ने 1968 में 19वीं सदी के स्वीडिश व्यवसायी और रसायन शास्त्री अल्फ्रेड नोबेल की याद में यह पुरस्कार शुरू किया था.

अल्फ्रेड नोबेल ने डायनामाइट का आविष्कार किया था. उन्होंने पांच नोबेल पुरस्कारों की स्थापना की थी, जिनमें चिकित्सा, भौतिकी, रसायन विज्ञान, साहित्य और शांति के नोबेल पुरस्कार शामिल हैं. अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार अब तक 56 बार कुल 96 विजेताओं को प्रदान किया जा चुका है. इनमें महज तीन महिला विजेता शामिल हैं. नोबेल पुरस्कार के जानकार इस बात पर जोर देते हैं कि अर्थशास्त्र पुरस्कार तकनीकी रूप से नोबेल पुरस्कार नहीं है, लेकिन इसे हमेशा 10 दिसंबर को अल्फ्रेड नोबेल की पुण्यतिथि पर अन्य नोबेल पुरस्कारों के साथ प्रदान किया जाता है. अल्फ्रेड नोबेल का निधन 10 दिसंबर 1896 को हुआ था. चिकित्सा, भौतिकी, रसायन विज्ञान, साहित्य और शांति के क्षेत्रों में नोबेल पुरस्कारों के विजेताओं की घोषणा पिछले हफ्ते की जा चुकी है.

अर्थशास्त्र के नोबेल के साथ पुरस्कारों की घोषणा प्रक्रिया पूरी हुई

आर्थिक विकास पर नवाचार के प्रभाव की व्याख्या और ‘रचनात्मक विनाश’ नाम की एक प्रमुख आर्थिक अवधारणा पर शोध के लिए जोएल मोकिर, फिलिप एगियन और पीटर हॉविट को सोमवार को इस साल के अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किये जाने की घोषणा के साथ सभी श्रेणियों में विजेताओं के ऐलान की प्रक्रिया पूरी हो गई.

नोबेल शांति पुरस्कारों की घोषणा शुक्रवार को नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में की गई थी, जबकि बाकी सभी पुरस्कारों की घोषणा स्टॉकहोम में की गई. पुरस्कार समारोह 10 दिसंबर को इसके संस्थापक अल्फ्रेड नोबेल की पुण्यतिथि पर आयोजित किए जाएंगे इस साल के विजेता इस प्रकार हैं :

चिकित्सा:-
छह अक्टूबर को, मैरी ई ब्रुनको, फ्रेड रैमस्डेल और शिमॉन साकागुची को ‘पेरिफेरल इम्यून टॉलरेंस’ से संबंधित उनकी खोजों के लिए इस साल का चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार देने की घोषणा की गई. ब्रुनको (64) सिएटल स्थित इंस्टीट्यूट फॉर सिस्टम्स बायोलॉजी में वरिष्ठ कार्यक्रम प्रबंधक हैं. रैमस्डेल (64) सैन फ्रांसिस्को स्थित सोनोमा बायोथेरेप्यूटिक्स के वैज्ञानिक सलाहकार हैं, वहीं 74 वर्षीय साकागुची जापान के ओसाका विश्वविद्यालय के इम्यूनोलॉजी फ्रंटियर रिसर्च सेंटर में प्रोफेसर हैं. प्रतिरक्षा प्रणाली में विषाणु, जीवाणु और अन्य हानिकारक कारकों का पता लगाने और उनसे लड़ने के लिए कई प्रणालियां होती हैं. टी कोशिकाओं जैसे प्रमुख प्रतिरक्षा योद्धाओं को हानिकारक कारकों की पहचान करने का प्रशिक्षण दिया जाता है. अगर कुछ कारक इस तरह से गड़बड़ा जाते हैं कि स्वप्रतिरक्षी (ऑटो इम्यून) रोग उत्पन्न हो सकते हैं, तो उन्हें थाइमस में नष्ट कर दिया जाना चाहिए – इस प्रक्रिया को ‘सेंट्रल टॉलरेंस’ (केंद्रीय सहनशीलता) कहा जाता है. नोबेल विजेताओं ने शरीर द्वारा इस प्रणाली को नियंत्रित रखने के एक अतिरिक्त तरीके का खुलासा किया.

भौतिकी:
सात अक्टूबर को, जॉन क्लार्क, माइकल एच डेवोरेट और जॉन एम मार्टिनिस को डिजिटल प्रौद्योगिकी को आगे बढ.ाने वाली ‘क्वांटम टनलिंग’ पर शोध के लिए भौतिकी का नोबेल पुरस्कार दिये जाने की घोषणा की गई. इससे एमआरआई मशीनों द्वारा अति संवेदनशील माप प्राप्त करना संभव हुआ और बेहतर मोबाइल फोन तथा तेज कंप्यूटर के लिए आधार तैयार हुआ है.
क्लार्क (83) ने अपना शोध कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले में किया. वहीं, मार्टिनिस(67) ने कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, सांता बारबरा में तथा डेवोरेट (72) ने येल में और कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, सांता बारबरा में भी अपना शोध किया.
क्वांटम यांत्रिकी का यह 100 साल पुराना क्षेत्र, असंभव प्रतीत होने वाले उप-परमाणु जगत से संबंधित है, जहां स्विच एक ही समय पर चालू और बंद हो सकते हैं और परमाणुओं के कुछ हिस्से अभेद्य प्रतीत होने वाली बाधाओं को भेदकर सुरंग बना सकते हैं. पुरस्कार विजेता तिकड़ी के काम ने इसे विश्व फलक पर व्यापक रूप से ले जाने में मदद की है, जहां इसमें कंप्यूटिंग और संचार को गति देने की क्षमता है.

रसायन:-
आठ अक्टूबर को, तीन वैज्ञानिकों को रसायन विज्ञान का नोबेल पुरस्कार मिला, क्योंकि उन्होंने नई आणविक संरचनाएं विकसित की हैं जो भारी मात्रा में गैस को अपने अंदर समाहित कर सकती हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि यह कार्य वायुमंडल से ग्रीनहाउस गैसों को सोखने या रेगिस्तानी वातावरण से नमी इकट्ठा करने का आधार तैया करता है. विशेषज्ञों का कहना है कि सुसुमु कितागावा, रिचर्ड रॉब्सन और उमर एम. याघी का काम ”मानव जाति की कुछ सबसे बड़ी चुनौतियों को हल करने में योगदान दे सकता है.” कितागावा (74) जापान के क्योटो विश्वविद्यालय से संबद्ध हैं, जबकि 88 वर्षीय रॉब्सन ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न विश्वविद्यालय से संबद्ध हैं. याघी (60) कैलिफ.ोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले से संबद्ध हैं.

साहित्य:-
नौ अक्टूबर को, हंगरी के लेखकलास्लो क्रास्नाहोरकाई को साहित्य के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की गइ. पुरस्कार निर्णायक मंडल सदस्यों ने बताया, ”सर्वनाशकारी आतंक” के बीच कला की शक्ति को मजबूत करता है. उनके अतियथार्थवादी और अराजक उपन्यासों में एक निराशाजनक विश्वदृष्टि और तीखे हास्य का संगम है. लास्लो क्रास्नाहोरकाई की पहली कृति ”सैटानटैंगो’ के साथ ही ”द मेलांकली ऑफ रेसिस्टेंस” सहित कई कृतियों को हंगेरियन निर्देशक बेला टार ने फिल्मों में रूपांतरित किया है. क्रास्नाहोरकाई (71) हंगरी के निरंकुश प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान के मुखर आलोचक रहे हैं और खासकर रूसी आक्रमण के बाद उनकी सरकार द्वारा यूक्रेन को समर्थन न देने के विरोधी रहे हैं. उन्होंने इस साल ‘येल रिव्यू’ को दिए एक साक्षात्कार में कहा था, ”जब रूस अपने पड़ोसी देश पर आक्रमण करता है, तो कोई देश तटस्थ कैसे रह सकता है?”

शांति:-
वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो को 10 अक्टूबर को इस साल के नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किए जाने की शुक्रवार को घोषणा की गई. मारिया को एक ऐसी महिला के रूप में मान्यता दी गई, जिन्होंने “गहराते अंधकार के बीच लोकतंत्र की लौ जलाए रखी है.” नोबेल शांति पुरस्कार एकमात्र नोबेल पुरस्कार है, जो ओस्लो (नॉर्वे) में प्रदान किया जाता है. मारिया इस पुरस्कार को हासिल करने वाली 20वीं महिला हैं.

अर्थशास्त्र: 
आर्थिक विकास पर नवाचार के प्रभाव की व्याख्या और ‘रचनात्मक विनाश’ नाम की एक प्रमुख आर्थिक अवधारणा पर शोध के लिए जोएल मोकिर, फिलिप एगियन और पीटर हॉविट को सोमवार को अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किए जाने की घोषणा की गई. मोकिर(79) नॉर्थवेस्टर्न यूनिर्विसटी से, एगियन(69) कॉलेज डी फ्रांस और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से तथा हॉविट (79) ब्राउन यूनिर्विसटी से हैं. नोबेल समिति ने कहा कि मोकिर ने “यह प्रर्दिशत किया कि अगर एक के बाद एक नये नवाचार की स्व-उत्पादक प्रक्रिया सुनिश्चित करनी है, तो हमें न केवल यह जानना होगा कि कौन-सी चीज काम करती है, बल्कि हमें इस बात की वैज्ञानिक समझ भी हासिल करनी होगी कि वह क्यों काम करती है.” ‘रचनात्मक विनाश’ से आशय इस आर्थिक अवधारणा से है कि जब एक नया और बेहतर उत्पाद बाजार में दस्तक देता है, तो पुराने उत्पाद बेचने वाली कंपनियां नुकसान में आ जाती हैं.

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संपादक : नीरज दीवान

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