राष्ट्रवाणी: इस लोकगीत में ठेठ राजस्थानी अंदाज में एक पत्नी अपने पति से पड़ोसन को ताकने और उससे जलने की कहानी कहती है। नीम की कड़वाहट से शुरू होकर मिश्री की मिठास पर खत्म होता है लोकगीत (Image Source: एआई Generated) जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली।

राजस्थान के लोकगीतों में खाने-पीने से लेकर रोजमर्रा में काम आने वाली चीजों को प्रतीक बनाया गया है। कभी गीत के बोल ऊंट के गहने से शुरू होते हैं, तो कभी महिला अपने पति से जीरा न उगाने की गुहार लगाती है। ऐसा ही एक लोकगीत सदियों से लोगों का मनोरंजन कर रहा है, जिसमें नायिका के पति से झगड़े, रूठने-मनाने और पड़ोसन से जलन की दास्तान सुनने को मिलती है।

नीम की कड़वाहट से शुरू, मिश्री की मिठास पर खत्म अगर आप प्रेम प्रसंग पर आधारित लोकगीतों की सूची निकालेंगे तो यह गीत उनमें टॉप 10 में जरूर गिना जाएगा। इन दिनों दशकों पुराना यह गाना फिर से सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगा है, जिसकी कहानी नीम की कड़वाहट से शुरू तो होती है, पर अंत मिश्री की मिठास के साथ होता है।

गीत में नायिका अपने प्रेमी को कहती है : ‘मिसरी को बाग लगा दे रसिया, नीम की निम्बोली म्हाने खारी लागे!’ वह अपने साजन से नीम की निंबोली कड़वी होने के चलते कुछ मीठा खाने की मांग कर रही है। महिलाओं की आदत को कौन नहीं जानता, वो हमेशा अपनी प्यारी और मीठी बातों से अपने प्रेमी को किसी भी तरह ही मना ही लेती हैं।

इस गीत में यही खूबसूरती देखने को मिलती है। नायिका अपने पति के सांवले रंग और रंग-रंगीले अंदाज की खूब तारीफ कर रिझाने की कोशिश करती है। इस लोकगीत में नायिका की अपनी सामने वाली पड़ोसन को लेकर जलन भी साफ तौर पर दिखाई देती है।

वो कहती है कि ‘सामली पाड़ोसन तीखो सुरमो सारे, ठुमका करती, छमछम चाले, वा तो फुट.ड़ी सी…म्हाने एक झारी लागे..उजड़ी सी म्हाने एक क्यारी लागे’ यानी पड़ोसन तीखा सुरमा लगाकर ठुमककर छम-छम करती चलती है, वह सुंदर तो है लेकिन मुझे एक खाली बर्तन और बगीचे की उजड़ी हुई क्यारी लगती है। इस गीत के ये बोल पति-पत्नी की हर रोज की खिट-पिट, प्यार, रूठने-मनाने के उस सिलसिले को दिखाते हैं, जिसका कभी अंत नहीं होने वाला।

नायिका अपने साजन की हरकतों पर उसे ताना मारती भी नजर आती है, जिसके बोल कुछ ऐसे हैं: ‘थे भी तो..बीने लुक छिप झांको, खिड़की खोलो, झुक झुक ताको, म्हाने सामली पाड़ोसन कामणगारी लागे’ यानी आप भी तो पड़ोसन को खिड़की खोलकर छिप-छिप कर देखते हो। इसके बाद वो पड़ोसन को ही जादू टोना करने या पति को वश में करने वाली महिला कह डालती है।

यह गीत लोगों का मनोरंजन तो करता ही है, पर साथ में रिश्तों के ताने-बाने की तस्वीर भी दिखाता है। इसमें जलन, अपने पति पर अधिकार की भावना और पड़ोसन से तुलना करने जैसी बातें लोगों को अपने अनुभवों से जोड़ने में मदद करती है। शायद यही वजह है कि जब भी कोई इस गीत को सुनता है, तो कहीं न कहीं वह भी अपने रिश्तों की रोजाना की नोंक-झोंक को फिर से महसूस कर रहा होता है।

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