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Home»Blog»सरकार अगले हजार साल की रूपरेखा तय करने वाली नीतियां बना रही है: मोदी
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सरकार अगले हजार साल की रूपरेखा तय करने वाली नीतियां बना रही है: मोदी

atulpradhanBy atulpradhanApril 21, 2025No Comments8 Mins Read
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सरकार अगले हजार साल की रूपरेखा तय करने वाली नीतियां बना रही है: मोदी
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को कहा कि भारत की नौकरशाही और नीति निर्माण प्रक्रिया पुराने ढर्रे पर नहीं चल सकती तथा उनकी सरकार जिन नीतियों पर काम कर रही है, वे अगले 1,000 वर्ष के भविष्य को आकार देंगी. मोदी ने औद्योगीकरण और उद्यमिता की गति को नियंत्रित करने वाले नियामक के रूप में नौकरशाही की पुरानी भूमिका का जिक्र करते हुए इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्र इस मानसिकता से आगे बढ़ चुका है और अब ऐसा माहौल बना रहा है जो आम नागरिकों के बीच उद्यमिता को प्रोत्साहित करता है एवं उन्हें बाधाओं से निपटने में मदद करता है.

मोदी ने यहां विज्ञान भवन में सिविल सेवा दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि सिविल सेवाओं को अपने में बदलाव कर नियम पुस्तिकाओं का मात्र रखवाला न बनकर, विकास का सूत्रधार बनना चाहिए. उन्होंने नौकरशाहों को दिए गए लगभग 40 मिनट के अपने भाषण के दौरान भारत के समाज, युवाओं, किसानों और महिलाओं की आकांक्षाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनके सपने अभूतपूर्व ऊंचाइयों पर पहुंच गए हैं. उन्होंने इन असाधारण आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए असाधारण गति की आवश्यकता पर बल दिया.

उन्होंने कहा, ”आज हम जिन नीतियों पर काम कर रहे हैं और जो निर्णय ले रहे हैं, वे आगामी 1,000 वर्ष के भविष्य को आकार देंगे.” प्रधानमंत्री ने विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में सामूहिक प्रयास एवं दृढ़ संकल्प के महत्व को रेखांकित किया और सभी से इस साझा दृष्टिकोण की दिशा में हर दिन और हर पल अथक परिश्रम करने का आग्रह किया. मोदी ने वैश्विक स्तर पर हो रहे त्वरित बदलावों का उल्लेख करते हुए हर दो से तीन साल में ‘गैजेट’ के तेजी से बदल जाने को रेखांकित किया और इस बात का जिक्र किया कि बच्चे इन परिवर्तनों के बीच कैसे बड़े हो रहे हैं.

उन्होंने कहा, ”भारत की नौकरशाही, कामकाज के तरीके और नीति निर्माण की प्रक्रिया पुराने ढर्रें पर नहीं चल सकती.” मोदी ने कहा कि भारत का आकांक्षी समाज – युवा, किसान एवं महिलाएं – और इसके सपने अभूतपूर्व ऊंचाइयों पर पहुंच रहे हैं. उन्होंने कहा, ”इन असाधारण आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए असाधारण गति आवश्यक है.” प्रधानमंत्री ने आने वाले वर्षों के लिए ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, खेलों के क्षेत्र में प्रगति और अंतरिक्ष अन्वेषण में उपलब्धियों समेत विभिन्न क्षेत्रों में भारत के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को रेखांकित किया. उन्होंने हर क्षेत्र में भारत का परचम लहराने के महत्व पर बल दिया.

उन्होंने भारत को शीघ्र अति शीघ्र विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में सिविल सेवकों की बड़ी जिम्मेदारी को रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि इस वर्ष सिविल सेवा दिवस का विषय ‘भारत का समग्र विकास’ है जो देश के लोगों के प्रति एक प्रतिबद्धता एवं वादा है. मोदी ने कहा कि भारत के समग्र विकास का तात्पर्य है कि कोई भी गांव, कोई भी परिवार और कोई भी नागरिक पीछे न छूटे.

प्रधानमंत्री ने कहा कि शासन की गुणवत्ता इस बात से निर्धारित होती है कि योजनाएं लोगों तक कितनी गहराई से पहुंचती हैं और उनका जमीनी स्तर पर कितना वास्तविक प्रभाव पड़ता है. उन्होंने कहा कि पिछले 10 साल में भारत धीमी गति के परिवर्तन से आगे बढ़कर अब प्रभावशाली बदलाव देख रहा है. प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि देश का शासन मॉडल अब अगली पीढ़ी के सुधारों पर केंद्रित है तथा सरकार एवं आम नागरिकों के बीच की खाई को पाटने के लिए प्रौद्योगिकी एवं नयी प्रक्रियाओं का लाभ उठाया जा रहा है.

उन्होंने कहा, ”भारत शासन, पारर्दिशता और नवोन्मेष में नए मानक स्थापित कर रहा है.” उन्होंने कहा, ”भारत अब न केवल अपने विकास के लिए बल्कि शासन, पारर्दिशता और नवोन्मेष के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करने के लिए भी जाना जाता है.” मोदी ने भारत की जी-20 अध्यक्षता को इन प्रगतियों का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बताया और कहा कि जी-20 के इतिहास में पहली बार 60 से अधिक शहरों में 200 से अधिक बैठक आयोजित की गईं. उन्होंने कहा कि जनभागीदारी के दृष्टिकोण ने इस आयोजन को जन आंदोलन में बदल दिया.

प्रधानमंत्री ने कहा, ”विश्व ने भारत के नेतृत्व को स्वीकार किया है. भारत सिर्फ भाग नहीं ले रहा है, बल्कि नेतृत्व भी कर रहा है.” मोदी ने सरकारी दक्षता के बारे में बढ़ती चर्चा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस संबंध में भारत अन्य देशों से 10-11 वर्ष आगे है.

प्रधानमंत्री मोदी ने लोक सेवकों को सुशासन के लिए ‘नागरिक देवो भव’ मंत्र दिया

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को लोक सेवकों से वंचित लोगों की समस्याओं के समाधान के दौरान ”नागरिक देवो भव” के सिद्धांत का पालन करने को कहा और समावेशी विकास के लिए अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने पर जोर दिया. यहां 17वें सिविल सेवा दिवस समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि लोक सेवकों को स्वयं को केवल प्रशासक के रूप में ही नहीं देखना है, बल्कि विकसित भारत के शिल्पकार के रूप में खुद को तैयार करना है. मोदी ने कहा कि भारत दुनिया में सबसे अधिक आबादी वाला देश बन गया है और उन्होंने बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता देने तथा अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने पर विशेष रूप से ध्यान देने पर जोर दिया.

उन्होंने नागरिकों की बढ़ती जरूरतों और आकांक्षाओं का हवाला देते हुए कहा कि सिविल सेवा को प्रासंगिक बने रहने के लिए समकालीन चुनौतियों के अनुकूल बनना होगा. प्रधानमंत्री ने कहा कि अब तक की उपलब्धियों को कई गुना बढ़ाया जाना चाहिए तथा प्रगति के लिए उच्च मानक स्थापित किए जाने चाहिए. उन्होंने प्रौद्योगिकी-चालित विश्व में मानवीय निर्णय के महत्व पर बल दिया तथा लोक सेवकों से संवेदनशील बने रहने, वंचितों की आवाज सुनने, उनके संघर्षों को समझने तथा उनके मुद्दों के समाधान को प्राथमिकता देने का आग्रह किया.

मोदी ने ”नागरिक देवो भव” का मंत्र दिया और इसकी तुलना ”अतिथि देवो भव” के सिद्धांत से की तथा लोक सेवकों से समर्पण एवं करुणा की भावना के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने की अपील की. प्रधानमंत्री ने नागरिकों के लिए पोषण में सुधार के वास्ते नये सिरे से प्रतिबद्धता की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि अंतिम लक्ष्य 100 प्रतिशत कवरेज और 100 प्रतिशत प्रभाव होना चाहिए.

उन्होंने कहा कि कि इस दृष्टिकोण ने पिछले दशक में 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है और विश्वास जताया कि इससे गरीबी मुक्त भारत बनेगा. मोदी ने कहा कि वैश्विक परिवर्तनों के बीच भारत में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र, स्टार्टअप और युवा उद्यमियों के पास अभूतपूर्व अवसर हैं.

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को वैश्विक सर्वोत्तम परंपराओं में अपनी स्थिति का निरंतर मूल्यांकन करने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि जहां भारतीय उद्योगों का लक्ष्य विश्व स्तर पर सर्वोत्तम उत्पाद तैयार करना है, वहीं भारत की नौकरशाही का लक्ष्य विश्व में सर्वोत्तम सुगम अनुपालन का वातावरण उपलब्ध कराना होना चाहिए. मोदी ने लोक सेवकों के लिए ऐसे कौशल हासिल करने की आवश्यकता पर बल दिया, जो न केवल उन्हें प्रौद्योगिकी को समझने में मदद करेगा, बल्कि स्मार्ट और समावेशी शासन के लिए इसके उपयोग में भी दक्ष बनाएगा.

उन्होंने कहा, ”प्रौद्योगिकी के युग में, शासन का मतलब प्रणालियों का प्रबंधन करना नहीं है, बल्कि संभावनाओं को बढ़ाना है.” प्रधानमंत्री ने नीतियों और योजनाओं को प्रौद्योगिकी के माध्यम से अधिक सुलभ बनाने के लिए तकनीक अपनाने के महत्व पर बल दिया. मोदी ने सटीक नीति डिजाइन और कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए डेटा-संचालित निर्णय लेने में विशेषज्ञता की आवश्यकता को भी रेखांकित किया.

कृत्रिम बुद्धिमत्ता और क्वांटम भौतिकी में तेजी से हो रही प्रगति को देखते हुए, प्रौद्योगिकी में आने वाली क्रांति का उल्लेख करते हुए मोदी ने लोक सेवकों से कहा कि वे इस तकनीकी क्रांति के लिए तैयार रहें, ताकि सर्वोत्तम सेवाएं प्रदान की जा सकें और नागरिकों की आकांक्षाओं को पूरा किया जा सके.

प्रधानमंत्री ने तेजी से बदलते समय में वैश्विक चुनौतियों पर पैनी नजर रखने की आवश्यकता पर बल दिया तथा यह उल्लेख किया कि खाद्य, जल और ऊर्जा सुरक्षा प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं, विशेष रूप से ‘ग्लोबल साउथ’ के लिए, जहां चल रहे संघर्षों के कारण कठिनाइयां बढ़ रही हैं तथा जनजीवन और आजीविका पर असर पड़ रहा है.

मोदी ने इन उभरते वैश्विक मुद्दों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए स्थानीय रणनीति विकसित करने की आवश्यकता पर बताई.
प्रधानमंत्री ने बुनियादी ढांचे, नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य, आंतरिक सुरक्षा, भ्रष्टाचार को समाप्त करने और सामाजिक कल्याण योजनाओं, खेल और ओलंपिक से संबंधित लक्ष्यों जैसे प्रमुख क्षेत्रों को रेखांकित किया और हर क्षेत्र में नए सुधारों के कार्यान्वयन की अपील की.
इस साल प्रधानमंत्री द्वारा जिलों के समग्र विकास, आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम और लोक सेवकों के लिए नवाचार श्रेणियों में 16 पुरस्कार प्रदान किए गए.

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