नयी दिल्ली. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोमवार को कहा कि नीति आयोग ने भारत-अमेरिका कृषि व्यापार संबंधों पर एक ‘र्विकंग पेपर’ (कार्य पत्र) को वापस ले लिया है. आयोग ने नई अमेरिकी व्यापार व्यवस्था के तहत भारत-अमेरिका कृषि व्यापार को बढ़ावा देने से संबंधित कार्य पत्र में सुझाव दिया था कि अमेरिका द्वारा जवाबी शुल्क लगाने के बाद, भारत को दोहरे मार्ग वाला दृष्टिकोण अपनाना चाहिए और वाशिंगटन से गैर-संवेदनशील कृषि वस्तुओं के आयात पर उच्च शुल्क को चुनिंदा रूप से कम करना चाहिए तथा साथ ही रणनीतिक रूप से रियायतें भी देनी चाहिए जहां घरेलू आपूर्ति में अंतर है.
रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”नई अमेरिकी व्यापार व्यवस्था के तहत भारत-अमेरिका कृषि व्यापार को बढ़ावा देने पर नीति आयोग का र्विकंग पेपर था, जिसे आधिकारिक तौर पर 30 मई, 2025 को जारी किया गया था, लेकिन कुछ दिनों बाद इसे वेबसाइट से हटा दिया गया और अब इसे आधिकारिक तौर पर वापस ले लिया गया है.” उन्होंने कहा कि ”नीति आयोग के एक पेपर में अमेरिका से ‘जेनेटिकली मॉडिफाइड’ मक्का और सोयाबीन के शुल्क मुक्त आयात की सिफारिश की गई है.” रमेश ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार के लिए बिहार के मक्का किसानों और मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र व राजस्थान के सोयाबीन उत्पादकों की तुलना में अमेरिका के किसानों और बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हित ज्यादा महत्वपूर्ण हैं. उन्होंने सवाल किया कि ”इस पेपर को जारी करने की अनुमति किसने दी और क्या यह भारत-अमेरिका आगामी व्यापार समझौते की झलक है?” इस बारे में संपर्क करने पर नीति आयोग के प्रवक्ता ने कोई टिप्पणी नहीं की.

