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Home»Blog»तहव्वुर हुसैन राणा का प्रत्यर्पण सफलतापूर्वक हुआ : एनआईए
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तहव्वुर हुसैन राणा का प्रत्यर्पण सफलतापूर्वक हुआ : एनआईए

atulpradhanBy atulpradhanApril 10, 2025No Comments5 Mins Read
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तहव्वुर हुसैन राणा का प्रत्यर्पण सफलतापूर्वक हुआ : एनआईए
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नयी दिल्ली/मुंबई. राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने बृहस्पतिवार को कहा कि उसने 26/11 मुंबई आतंकवादी हमलों के मुख्य आरोपी तहव्वुर हुसैन राणा का ”सफलतापूर्वक प्रत्यर्पण” कराया है. एनआईए ने एक बयान में कहा कि 2008 के मुंबई हमलों के मुख्य साजिशकर्ता को न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में लाने के लिए वर्षों के सतत एवं ठोस प्रयासों के बाद यह प्रत्यर्पण हुआ है.

बयान में कहा गया, ”यूएसडीओजे, अमेरिकी स्काई मार्शल की सक्रिय सहायता से एनआईए ने संपूर्ण प्रत्यर्पण प्रक्रिया के दौरान अन्य भारतीय खुफिया एजेंसियों, एनएसजी के साथ मिलकर काम किया, जिसमें भारत के विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय ने भी मामले को सफल निष्कर्ष तक ले जाने के लिए अमेरिका में अन्य संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय किया.” यह बयान इन खबरों के बीच आया है कि राणा दिल्ली लाया जा चुका है. हालांकि, एजेंसी ने इस बारे में स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहा.

26/11 हमले के सभी आरोपियों को मृत्युदंड मिले:कसाब को पकड़ने वाली टीम के पूर्व पुलिस अधिकारी

साल 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों के दौरान आतंकी अजमल कसाब को पकड़ने वाली टीम में शामिल सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी ने बृहस्पतिवार को कहा कि 26/11 हमले की साजिश में शामिल सभी आरोपियों पर भारत की अदालतों में मुकदमा चलाया जाना चाहिए और उन्हें मृत्युदंड दिया जाना चाहिए. सेवानिवृत्त अधिकारी हेमंत बावधनकर ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बात करते हुए 26/11 हमलों के प्रमुख साजिशकर्ताओं में से एक तहव्वुर हुसैन राणा के भारत में सफल प्रत्यर्पण पर राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण(एनआईए) को बधाई दी.

उन्होंने कहा, “न केवल मेरी, बल्कि सभी भारतीयों की यह भावना है कि 26/11 के आतंकवादी हमलों में शामिल आरोपियों को भारत में मुकदमा चलाकर मृत्युदंड दिया जाना चाहिए.” बावधनकर ने कहा, “यदि हम मुंबई आतंकवादी हमलों की साजिश में शामिल सभी आरोपियों को दंडित कर पाते हैं, तो इससे हमारे शहीदों और निर्दोष नागरिकों को न्याय मिलेगा. ऐसा मैं महसूस करता हूं.”

आतंकवादियों द्वारा 26 नवंबर 2008 को महानगर में विभिन्न स्थानों पर हमले शुरू करने के तुरंत बाद, बावधनकर नाकाबंदी अभियान के तहत अपनी टीम के साथ दक्षिण मुंबई के गिरगांव चौपाटी पर तैनात थे. वह उस समय पुलिस निरीक्षक थे. इस टीम में शामिल सहायक पुलिस उपनिरीक्षक तुकाराम ओंबले ने आतंकवादी अजमल कसाब को जिंदा पकड़ने में अहम भूमिका निभाई थी. कसाब ने अबू इस्माइल के साथ मिलकर एक कार को अगवा कर लिया था. केवल एक डंडे से लैस ओंबले ने कार में बैठे आतंकवादियों का सामना किया और इस दौरान वह शहीद हो गए.

बावधनकर और टीम के अन्य सदस्यों ने बाद में कसाब को जीवित पकड़ लिया, जबकि अबू इस्माइल अधिकारी द्वारा चलाई गई गोली से मारा गया. कसाब पाकिस्तानी समूह का एकमात्र आतंकवादी था जिसे जीवित पकड़ा गया था. पाकिस्तान के 10 आतंकवादियों के एक समूह ने 26 नवंबर 2008 को अरब सागर में समुद्री मार्ग से भारत की वित्तीय राजधानी मुंबई में घुसपैठ करने के बाद एक रेलवे स्टेशन, दो आलीशान होटलों और एक यहूदी केंद्र पर हमला किया था. इन हमलों में 166 लोगों की मौत हुई थी जिनमें अमेरिकी नागरिक भी शामिल थे.

जब 26/11 आतंकी हमला हुआ, गृह सचिव गुप्ता बातचीत के लिए इस्लामाबाद में थे

भारी हथियारों से लैस 10 पाकिस्तानी आतंकवादियों ने मुंबई में जब 26/11 हमलों को अंजाम दिया, तब तत्कालीन केंद्रीय गृह सचिव मधुकर गुप्ता के नेतृत्व में एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल आतंकवाद सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करने के लिए द्विपक्षीय वार्ता के वास्ते इस्लामाबाद में था.

सूत्रों ने बताया कि 26 नवंबर 2008 को जब आतंकवादी पाकिस्तान से अरब सागर के रास्ते मुंबई पहुंचे तो उस समय गुप्ता द्विपक्षीय गृह सचिव स्तर की वार्ता में भाग लेने के लिए इस्लामाबाद में थे, जिसे तब ‘समग्र वार्ता’ का नाम दिया गया था. भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने 26 नवंबर को अपने पाकिस्तानी समकक्षों के साथ वार्ता पूरी की थी. मौजूदा परंपरा के तहत भारतीय प्रतिनिधिमंडल को शिष्टाचार भेंट के लिए पाकिस्तान के गृह मंत्री से मिलना था.

हालांकि, सूत्रों ने बताया कि भारतीय प्रतिनिधिमंडल को कहा गया कि पाकिस्तानी मंत्री यात्रा पर होने के कारण उपलब्ध नहीं हैं और वह अगले दिन यानी 27 नवंबर को उनसे मिल सकते हैं. इसलिए टीम वहीं रुक गई. बाद में, उसी दिन (26 नवंबर) भारतीय प्रतिनिधिमंडल को इस्लामाबाद के निकट खूबसूरत पर्वतीय क्षेत्र मुर्री ले जाया गया.

उसी शाम आतंकवादियों ने मुंबई पर हमला कर देश की सबसे भीषण आतंकी घटना को अंजाम दिया जिसमें 166 लोग मारे गए.
जब यह खबर आई, तब गुप्ता मुर्री से दिल्ली में वरिष्ठ नेतृत्व के साथ नियमित संपर्क में थे. पाकिस्तान गए भारतीय प्रतिनिधिमंडल में गृह मंत्रालय के एक अतिरिक्त सचिव, एक संयुक्त सचिव और कुछ अन्य अधिकारी भी शामिल थे. टीम ने अगले दिन भारत वापस लौटने से पहले वह दुर्भाग्यपूर्ण रात मुर्री में बिताई.

बृहस्पतिवार को जब गुप्ता से फोन पर संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है और बात करने में असमर्थ हैं.
उस समय ऐसी अटकलें लगाई जा रही थीं कि पाकिस्तान ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल को धोखा देकर उनका प्रवास एक दिन बढ़ा दिया होगा. वर्ष 2008 के उस दुर्भाग्यपूर्ण दिन गुप्ता की अनुपस्थिति में गृह मंत्रालय में तत्कालीन विशेष सचिव (आंतरिक सुरक्षा) एम एल कुमावत गृह मंत्रालय के मामलों को संभाल रहे थे और तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल की सलाह के अनुसार संबंधित एजेंसियों को प्रारंभिक निर्देश दे रहे थे. पाटिल ने बाद में इस्तीफा दे दिया था. आईपीएस अधिकारी कुमावत को तत्कालीन संयुक्त सचिव नवीन वर्मा और कुछ अन्य अधिकारियों ने सहायता प्रदान की थी.

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